सुप्रीम कोर्ट ने वैक्सीनेशन के लिए घोषित 35,000 करोड़ रुपये का केंद्र सरकार से मांगा हिसाब

देश के सर्वोच्च अदालत ने केंद्र की कोविड टीकाकरण नीति को लेकर सख्त टिप्पणी की है। सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड आदेश में नीति को प्रथम दृष्टया मनमानापूर्ण और  अतार्किक करार दिया गया है जिसके पहले दो चरणों में वैक्सीन मुफ्त में दी गयी और अब राज्यों और निजी अस्पतालों को 18-44 साल आयु वर्ग के लोगों से इसका शुल्क वसूलने की मंजूरी दे दी गयी है।

सर्वोच्च अदालत ने केंद्र को आदेश दिया है कि इसकी समीक्षा करे। अदालत ने कहा कि जब कार्यपालिका की नीतियां नागरिकों के अधिकारों का अतिक्रमण करती हैं तो अदालतें खामोश नहीं रह सकतीं। कोविड टीकाकरण नीति का विस्तार से मूल्यांकन करने का प्रयास करते हुए सर्वोच्च अदालत ने केंद्र से कई जानकारियां तलब की हैं  और यह भी जानना चाहा कि टीकाकरण के लिए निर्धारित 35,000 करोड़ रुपये अब तक कैसे खर्च किए गए हैं।