कब तक लाये जाएँगे भगौड़े घोटालेबाज़?

ब्रिटिश सरकार ने नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को दी हरी झंडी


पीएनबी बैंक घोटाले के बड़े डिफाल्टर नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को लेकर फिर से हलचल है। लेकिन कहीं यह महज़ एक राजनीतिक सूचना तो नहीं? क्योंकि ऐसी बयानबाज़ियाँ पहले भी होती रही हैं।
सरकारी तंत्र की ऐसी ही ख़ामियों का फ़ायदा नीरव मोदी जैसे लोग उठा रहे हैं। हैरत है कि पिछले सात साल में भारत से दर्ज़नों लोग बैंकों को मोटा चूना लगाकर विदेश फ़रार हो चुके हैं और एक को भी सरकार वापस नहीं ला सकी है। हीरा व्यापारी नीरव मोदी जनवरी, 2018 को पंजाब नेशनल बैंक को तक़रीबन 11,000 करोड़ से अधिक रुपये का चूना लगाकर रातोंरात देश छोडक़र फ़रार हो गया था। तबसे नीरव मोदी क़ानूनी तौर पर भगौड़ा घोषित है। हैरत है कि देश के इतिहास में सबसे बड़े घोटालेबाज़ के रूप में उसके ख़िलाफ मामला तो दर्ज है, लेकिन उसकी सियासी पकड़ और धमक के कारण आज तक वह भारतीय क़ानून की पकड़ से बाहर ही रहा है। अब भले ही नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को ब्रिटिश सरकार से हरी झंडी मिल गयी है; लेकिन क़ानूनी, स्वास्थ्य सम्बन्धी और कोरोना महामारी जैसी अड़चनें नीरव मोदी को भारत लाने और प्रत्यर्पण सन्धि में अड़ंगा लगा सकती हैं। और उसने ब्रिटिश हाईकोर्ट में प्रत्यर्पण को चुनौती दे दी है। इस तरह उसके पास बचने के कई रास्ते हैं।

वैसे नीरव मोदी के कारनामों और गतिविधियों को देखकर तो ऐसा लगता है कि यह महज़ एक सूचना ही है। क्योंकि प्रत्यर्पण को लेकर दोनों देशों के बीच सन्धि होती रहती है और टूटती भी रहती है।
विदेश मामलों के जानकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अमित सिंह का कहना है कि प्रत्यर्पण सन्धि के तहत नीरव मोदी को भारत लाने में भारत और ब्रिटिश सरकार के बीच आपसी राजनीतिक सम्बन्धों की भूमिका है। नीरव ने जिस तरह बैंक अधिकारियों से मिलकर देश की अर्थ-व्यवस्था को चूना लगाया है, वह क़ानूनी अपराध है; जिस की सज़ा उसे मिलनी ही चाहिए। प्रो. अमित का कहना है कि ब्रिटिश पुलिस ने मार्च, 2019 में नीरव मोदी को लंदन में गिरफ़्तार किया था। तबसे लेकर दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण सन्धि के क़ानूनी दाँव-पेच में मामला उलझा रहा है। अब 16 अप्रैल, 2021 को ब्रिटिश सरकार की गृह मंत्री प्रीति पटेल ने भारत प्रत्यर्पण को हरी झंडी दी है, जो दोनों देशों के बीच अच्छे रिश्तों और विदेश नीति का हिस्सा है।

आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. हरीश खन्ना का कहना है कि भारत सरकार को इस मामले में गम्भीरता दिखानी चाहिए। नीरव के ख़िलाफ क़ानूनी कार्रवाई के साथ-साथ वसूली प्रक्रिया भी चलनी चाहिए। क्योंकि क़ानूनी प्रक्रिया लम्बी चलेगी और इसका फ़ायदा वह राजनीतिक और दूसरे तरीक़ों से लेगा; जो कि वह लेता आया है। वह एक शातिर अपराधी है। जिस अंदाज़ में वह देश छोडक़र भागा था, वह बिना उसके राजनीतिक आकाओं के सम्भव नहीं था। नीरव मोदी का मामा और पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के मास्टर माइंड मेहुल चौकसी की भी गिरफ़्तारी हो और उससे भी वसूली हो। दोनों की देश-विदेश की सम्पत्ति को सरकार को अपने क़बज़े में लेना चाहिए।