अबकी बार किसकी ललकार?

पहले आईपीएल का खिताब अपने नाम करनेवाली राजस्थान रॉयल्स को उस सुनहरे मौके का इंतजार इस बार भी होगा. साल 2008 के बाद टीम कभी भी उस प्रदर्शन को नहीं दोहरा पाई है. बावजूद इसके रॉयल्स विपक्षी टीम को कड़ी टक्कर देने का इतिहास तो रखती ही है. स्टीव स्मिथ, अजिंक्य रहाणे, संजू सैमसन, टिम साऊदी, जेम्स फॉकनर और कप्तान शेन वॉटसन जैसे खिलाड़ी अपने दम पर मैच का पासा पलट सकते हैं. समूह के तौर पर देखें तो स्मिथ, रहाणे और वॉटसन टीम को ठोस शुरुआत दिलाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जबकि निचले क्रम पर फॉकनर और स्टुअर्ट बिन्नी को बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल करने की आखिरी कोशिश करनी होगी. हां, शेन वार्न के बाद टीम को कोई स्तरीय स्पिनर नहीं मिल पाया है. 44 साल के प्रवीण तांबे अपने चर्चित लेग ब्रेक की बदौलत इस कमी को पाटने की पूरी कोशिश करेंगे.

मुंबई इंडियंस की बात करें तो हर साल इसे खिताब का दमदार दावेदार माना जाता है. हालांकि रोहित शर्मा की अगुवाई वाली ये टीम सिर्फ साल 2013 में ही कप पर कब्जा जमा पाई. कभी टीम के कप्तान रहे रिकी पोंटिंग इस बार कोच के तौर पर टीम को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कंगारुओं को दो बार विश्व विजेता बनानेवाले पोंटिंग अपनी नई पारी को सफल बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहेंगे. एक समूह के तौर पर मुंबई इंडियंस संतुलित नजर आती है. विपक्षी आक्रमण को तहस-नहस करनेवाले विस्फोटक बल्लेबाजों के साथ पिच पर विकेटों की आंधी उड़ानेवाले गेंदबाजों की पूरी फौज रोहित की मदद के लिए मौजूद है. इस बार टीम को विजेता बनाने की जिम्मेदारी एरॉन फिंच, केरॉन पोलार्ड, लासिथ मलिंगा, जोश हेजलवुड और खुद रोहित शर्मा के कंधे पर है.

किंग्स इलेवन पंजाब की हैसियत हमेशा ही एक ऐसी विपक्षी की रही जो कभी भी मैदान पर पूरा दमखम नहीं झोंकती. लेकिन पिछले साल उसने अचानक ही अपना स्तर इतना ऊंचा कर लिया कि उसके सामने विरोधी टीमें बौनी नजर आने लगीं.  2013 में इसने न सिर्फ खिताबी मुकाबला खेला बल्कि पूरे टूर्नामेंट में जबरदस्त प्रतिस्पर्द्धा की मिसाल भी पेश की. कप्तान जॉर्ज बेली के अलावा वीरेंद्र सहवाग और कोच संजय बांगड़ की इसमें बड़ी भूमिका है. मिशेल जॉनसन, अक्षर पटेल, करनवीर सिंह और संदीप शर्मा गेंदबाजी आक्रमण की जिम्मेदारी सही से संभालें तो टीम इस बार भी अपना शानदार प्रदर्शन दोहरा सकती है. लेकिन टीम को विजेता बनाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी ये होगा कि ग्लेन मैक्सवेल और डेविड मिलर का बल्ला विरोधी गेंदबाजों के सामने सही सलीके और सही समय पर बोले. आईपीएल के पहले संस्करण में शानदार प्रदर्शन करनेवाले दिल्ली डेयरडेविल्स उसके बाद औसत प्रदर्शन करने में भी असफल रही है. पिछले साल मुरली विजय, दिनेश कार्तिक और केविन पीटरसन जैसे महंगे खिलाड़ियों के आने से टीम को उम्दा प्रदर्शन की उम्मीद थी. बावजूद इसके उसने आखिरी पायदान पर ही अपना सफर समाप्त किया. इस बार दिल्ली ने युवराज सिंह पर दांव खेला है. आईपीएल के सबसे महंगे खिलाड़ी युवराज के साथ एल्बी मोर्केल और जहीर खान पर भी इस बार बड़ी जिम्मेदारी है. टीम की कमान नए कप्तान जेपी ड्यूमनी के हाथों में है जो हमवतन कोच गैरी कर्स्टन के साथ टीम में जुझारुपन के तत्व को तलाशने की कोशिश करेंगे.

शानदार खिलाड़ियों से सुसज्जित सनराइजर्स हैदराबाद के पिछले साल का प्रदर्शन संतोषजनक ही कहा जा सकता है. टीम किसी तरह दूसरे दौर तक पहुंचने में कामयाब रही. इस साल डेविड वार्नर की अगुवाई में टीम को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है. टीम के पास शिखर धवन, डेल स्टेन, भुवनेश्वर कुमार और ट्रेंट बाउल्ट के तौर पर शानदार खिलाड़ियों की भरमार है. अगर ये इकाई के तौर पर प्रदर्शन करते हैं तो कोई वजह नहीं कि सनराइजर्स के सिर पर आईपीएल के आठवें संस्करण का ताज ना सजे.

आईपीएल पर हमेशा ही गैरसंजीदा होने के आरोप लगते रहे हैं. आरोप ये भी हैं कि इस खेल ने बॉल पर बल्ले के वर्चस्व को बढ़ने में बड़ी भूमिका निभाई है

आईपीएल पर हमेशा ही गैरसंजीदा होने के आरोप लगते रहे हैं. आरोप ये भी है कि इस खेल ने बॉल पर बल्ले के वर्चस्व को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है. कहने वाले तो यहां तक कहते हैं कि पिछले सात सालों में आईपीएल ने क्रिकेट के इस छोटे प्रारूप को भी बेहद ऊबाऊ, थकाऊ और एकतरफा बना दिया है. ऐसे में इस बार कागज पर बेहद मजबूत दिखनेवाली इन आठों टीमों पर ही आईपीएल को अधिक रोमांचक और मनोरंजक और प्रतिस्पर्द्धात्मक बनाने की जिम्मेदारी होगी.

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