केजरीवाल इतनी जल्दी में क्यों हैं?

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अब अगर चुनाव थोड़ा देर से होते हैं तो इस तरह की आशंकाएं पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ सकती है. आप को लगता है कि अभी भाजपा उसकी पार्टी में या फिर कांग्रेस में तोड़-फोड़ इसलिए नहीं कर रही है क्योंकि दो राज्यों –हरियाणा और महाराष्ट्र – में इसी साल चुनाव होने हैं और इसका असर वहां के चुनावों पर पड़ सकता है. चूंकि ये चुनाव लोकसभा चुनावों के बाद होने वाले पहले चुनाव हैं और अमित शाह के अध्यक्षीय जीवन के भी इसलिए भाजपा इनसे पहले अपनी छवि खराब करने का जोखिम नहीं उठाना चाहती. एक बार चुनाव हो गए तो भाजपा हो सकता है कि अपनी हिचक को उठाकर खूंटी पर टांग दे. उस हालत में अगर भाजपा ने किसी तरह की तोड़ा-फोड़ी करके सरकार बना ली तो फिर केंद्र में भी उसकी मजबूत सरकार होने की स्थिति में उसका समय से पहले गिरना बड़ा मुश्किल होगा. ऐसे में दिल्ली में चार साल का इंतजार आम आदमी पार्टी के लिए बड़े संकट पैदा कर सकता है. दिल्ली के अलावा पंजाब में भी आप के लिए थोड़ी संभावनाओं का जन्म हुआ है लेकिन वहां पर भी चुनाव होने में अभी तीन साल का समय है.

एक और समस्या आप के सामने यह भी हो सकती है कि तहलका की ही एक रिपोर्ट के मुताबिक उसके कार्यकर्ताओं ने पिछले दिनों बड़ी संख्या में उसका साथ छोड़ा है. ऐसे में सालों तक संघर्ष के लिए हजारों कार्यकर्ताओं को जोड़े रखना उसके लिए आसान नहीं होगा. ये सब मिली-जुली वजहें ही हैं कि कांग्रेस की मदद से फिर से सरकार बनाने की असफल कोशिश करने के बाद अब आप जल्द से जल्द चुनाव कराने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रही है.

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