बेनीवाल पर बहुत से सवाल

इससे पहले कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने बेनीवाल की बर्खास्तगी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अगर उन्हें हटाना ही था तो मिजोरम क्यों भेजा गया. पार्टी के दूसरे नेता राजीव शुक्ला ने इसे भाजपा का राजनीतिक बदला करार दिया था. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भी इस फैसले का विरोध किया था. उधर, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना था कि यह फैसला संविधान के नियमों के अनुरूप हुआ है और महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने इसकी अनुमति दी है. पुडुचेरी के उपराज्यपाल वीरेन्द्र कटारिया को हटाए जाने के बाद बेनीवाल बर्खास्त की जाने वाली दूसरी राज्यपाल हैं.

गौरतलब है कि गुजरात में लोकायुक्त और कुछ अन्य मुद्दों पर राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी तत्कालीन राज्यपाल बेनीवाल के बीच लंबा टकराव चला था. बेनीवाल ने गुजरात सरकार से सलाह लिए बगैर जस्टिस आरए मेहता को गुजरात का लोकयुक्त नियुक्त कर दिया था. मोदी सरकार ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए राज्यपाल के फैसले को अदालत में चुनौती दी थी. अदालत ने मेहता की नियुक्ति को सही ठहराया था, लेकिन बाद में जस्टिस मेहता ने लोकायुक्त बनने से ही इंकार कर दिया था. इसके अलावा बेनीवाल ने राज्य विधानसभा में पारित विभिन्न विधेयकों को भी रोक दिया था.
स्थाई व्यवस्था होने तक मणिपुर के राज्यपाल वीके दुग्गल को मिजोरम के राज्यपाल का प्रभार सौंपा गया है.

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