‘कश्मीर में अत्याचार के लिए उमर अब्दुल्ला जिम्मेदार हैं, मैं नहीं’

इन दो घटनाओं के बीच कैसा संबंध हो सकता है? गिलानी जब दिल्ली में थे तो पाक उच्चायोग ने उनसे मुलाकात की. यह मुलाकात हर वर्ष होती है, इसमें नया क्या है? यह एक किस्म की शिष्टाचार मुलाकात होती है. इस वर्ष भी इस मुलाकात के बाद उन्हें 23 मार्च को होनेवाले ‘पाकिस्तान दिवस’ के लिए आमंत्रित किया गया. महज संयोग है कि जिस वक्त गिलानी की पाक उच्चायोग से मुलाकात हुई, तभी मैं भी जेल से रिहा हुआ.

राज्य में जिस तरह का राजनीतिक परिदृश्य बना है उसे देखते हुए क्या आपको लगता है कि अलगाववादियों को अपनी रणनीति बदलने की जरूरत है? यदि जवाब हां है तो फिर वह क्या होगी ?

हमारा लक्ष्य है कि संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर के लिए भारत सरकार ने जो वादा किया है, उसे लागू किया जाए. इस मुद्दे पर हम कोई समझौता नहीं कर सकते है. रणनीति में बदलाव किया जा सकता है. लेकिन रातों-रात यह बदलाव भी संभव नहीं है. इस पर हमें गहराई व गंभीरता से विचार करना होगा. सभी पहलुओं पर चर्चा करनी होगी. गिलानी समेत सभी हुर्रियत नेताओं के साथ मिलकर हम इस पर चर्चा अवश्य करेंगे.

राजनीतिक प्रक्रिया में हुर्रियत की भागीदारी पर आपका क्या कहना है?

मैं पिछले साढ़े चार वर्षों से जेल में बंद था. इस दौरान यहां की स्थिति में क्या बदलाव हुए हैं, उससे परिचित होने में मुझे थोड़ा वक्त लगेगा. चुनावों में जनता की भागीदारी बढ़ रही है, हमें इसके कारणों की पड़ताल करनी होगी. गिलानी के दिल्ली लौटने के बाद हम उनसे चर्चा करेंगे. कोई भी रणनीति आपसी सहमति से बनेगी.

जेल से बाहर आने के बाद प्राथमिकताएं क्या हैं? अलगाववादी आंदोलन के लिए आपके पास कोई नई दृष्टि है ?

फिलहाल मैं अपने परिवार और परिजनों से मिलूंगा. इस बीच उन्होंने अपने जिन करीबियों को खो दिया है, मैं उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करूंगा. इसके बाद हम मिल-बैठकर भविष्य की योजनाओं पर बात करेंगे. कश्मीर की आजादी के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष करेंगे. न ही मैं और न आम कश्मीरी आतंकवादी है. हम अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं.

1 COMMENT

  1. पाकमे जीवन दुखदाई है भारत किी तुलना मे फिर ःी यह लोग पाक में शामील होना चाहते है कयों?कारण धारमीक जनुन की अधीकता

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