सिर के बल राजनीति

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1-Nitish02एक कदम आगे, दो कदम पीछे

बिहार की राजधानी पटना में मशहूर डाकबंगला चौराहे के पास ही है होटल गली. गली में आड़े-तिरछे, ऊपर-नीचे, दायें-बायें बिखरे बहुतेरे होटल हैं. सस्ते भी और इस वजह से लंबे समय तक टिकने लायक भी. इन होटलों में सबसे ज्यादा बसेरा राजनीतिक कार्यकर्ताओं और जिलास्तरीय नेताओं का होता है. इलाके में सुबह से शाम तक राजनीति की अखाड़ेबाजी होती है.

इसी होटल गली में चाय की एक दुकान के पास मजमा लगा है. सभी दलों के नेता गप्प में मशगूल हैं. बातचीत चलती है तो कोई जदयू के एक नेताजी से कहता है कि उनकी पार्टी का राजद, सीपीआई और कांग्रेस के साथ 100-100-39-04 वाला फॉर्मूला तय हो गया है, ऐसी बात हवा में उड़ रही है. यानी अगले विधानसभा चुनाव में 100 सीटों पर जदयू, 100 पर राजद, 39 पर कांग्रेस और चार सीटों पर सीपीआई. नेताजी गुस्से में आ जाते हैं. कहते हैं, ‘हवा की बात पर फालतू की हवाबाजी न कीजिए! जिस जदयू के पास अभी ही 117 सीटें हैं  वह भला 100 पर क्यों लड़ने को तैयार होगी?’

एक दूसरे नेता बात काटते हैं. कहते हैं, ‘अरे महाराज, यही तो मूल बात है कि 117 विधायक मिल के 10 सीट भी नहीं दिलवा सके लोकसभा में. एक-एक दर्जन विधायक भी ऊर्जा लगाते एक सीट पर तो 10 का हिसाब-किताब तो होना ही चाहिए था.’ बात जारी रहती है. एक और नेता हंसते हुए कहते हैं, ‘खाली गाल बजाइएगा कि 117 विधायक हैं  इसलिए ज्यादा सीट चाहिए तो लालू जी भी तो कहेंगे कि अभी जो लोकसभा चुनाव निपटा है उसमें अधिकांश सीटों पर  उनकी पार्टी भाजपा के मुकाबले में थी इसलिए उन्हें ज्यादा सीट चाहिए.’ तीसरे नेताजी का हस्तक्षेप होता है, ‘बेकार बात कर रहे हैं आप लोग. लालू जी से अगर नीतीश कुमार मिले और दो दशक में बनाई हुई पार्टी को मटियामेट करने के रास्ते पर चले तो सबसे पहले आदमी हम होंगे जो 2010 के चुनाव से लेकर पिछले लोकसभा चुनाव तक सारे बयान और इंटरव्यू मिलाकर पोस्टर- किताब तैयार करेंगे और पूरे बिहार में बंटवाएंगे.’  Read More>>

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