‘पुलिस, न्यायालय, मीडिया किसी ने भी हमारा साथ नहीं दिया…’

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डर है कि आगे उन्हें कोई काम नहीं देगा क्योंकि उन पर जेल काटकर आने का ठप्पा लग चुका है.

रमन इस सबके लिए पूरे सिस्टम और मीडिया को दोषी मानते हैं. रमन के मुताबिक उनके साथ वही हुआ जो अब तक वो केवल टीवी या सिनेमा में देखते रहे हैं. वो कहते हैं, ‘मेरे साथ जो हुआ है वैसा होते हुए मैंने आज तक केवल फिल्मों में ही देखा है. फिल्म की शुरुआत में पूरा सिस्टम एक साथ मिलकर हीरो और उसके परिवार को परेशान करता है. फिल्म के आखिर में हीरो पूरे सिस्टम को सबक सिखाता है. लेकिन यहां ऐसा नहीं है. मैं फिल्म का हीरो नहीं हूं और यहां सब कुछ असली है. वास्तव में पूरा सिस्टम भ्रष्ट है. पुलिस ने हमे बिना एफआईआर में नाम के जेल में डाल दिया और अदालतों ने दो-ढाई साल तक जमानत नहीं दी… मीडिया ने भी हमारा साथ नहीं दिया… और मैं कुछ नहीं कर सकता. मैं केवल अपनी जिंदगी को शुरू होने से पहले ही बर्बाद होते हुए देख सकता हूं.’

मई की दोपहर में एक पेड़ के नीचे रमन विश्नोई हमसे ये सारी बातें एक सांस में कह गए. ऐसा महसूस होता है कि रमन ने जो कहा उसकी वजह से दिन का पारा सौ डिग्री के आसपास पहुंच गया है और इस आंच में सबकुछ धू-धूकर जल रहा है.

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