‘तुम लोग धरना देने में उस्ताद हो, देते रहो’

क्यों
मैं और मेरे साथी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बतौर अतिथि शिक्षक पढ़ाते हैं लेकिन स्थाई शिक्षक के आते ही हमें हटा दिया जाता है. कब नौकरी चली जाए कोई भरोसा नहीं. ऊपर से वेतन भी कम मिलता है, अब बताइए दिल्ली जैसे शहर में 10 से 12 हजार रुपये में कैसे खर्चा चले हम सबका. आखिर पढ़ाने का ही काम तो हम भी करते हैं तो फिर स्थाई को अधिक वेतन और हमें कम क्यों. यह सवाल है दिल्ली में अतिथि शिक्षक के रूप में पढ़ा रहे शोहेब राजा का. शोहेब, अस्मिता, प्रवीण, मनीष, आलोक समेत सात और साथियों के साथ अतिथि शिक्षकों की मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं.

इसके अलावा तमाम दूसरे शिक्षक बारी-बारी से अपने हक की लड़ाई के लिए यहां जुटते हैं. इनकी पूरी मागें जानने से पहले आवश्यक है कि हम यह जान लें कि अतिथि शिक्षक कौन हैं और इनकी नियुक्ति कैसे होती है. अतिथि शिक्षक की भर्ती मेरिट के आधार पर होती है. इनसे लगभग 6 महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर लिया जाता है. इन्हें 600 रुपये रोज के हिसाब मानदेय दिया जाता है. शनिवार, रविवार सहित किसी प्रकार की सरकारी और गैर सरकारी छुट्टी होने पर इन्हें मानदेय नहीं मिलता है. दिल्ली में लगभग 17,000 अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं. और सभी की यही कहानी है.

दिल्ली सरकार से इनकी मांग है कि इन्हें नियमित करने के साथ स्थाई तौर पर एक निश्चित वेतन दिया जाए, ताकि ये एक सम्मानजनक जिंदगी जी सकें और बच्चों का भविष्य संवार सकें. दिल्ली के द्वारका में दिल्ली सरकार के एक स्कूल में अतिथि शिक्षक के रूप में पढ़ानेवाले गौरव साहनी बताते हैं, ‘शिक्षकों के लिए आखिरी भर्ती 2009 में निकाली गई थी. इसका परिणाम 2014 में आया. अगर सरकार इसी तरह लचर भर्ती प्रक्रिया चलाती रही तो और अतिथि शिक्षकों की जरूरत पड़ेगी लेकिन हमारे प्रति सरकार के उदासीन रवैये के कारण हमारा शोषण हो रहा है.’

अतिथि शिक्षक गजेंद्र सिंह बताते हैं, ‘जंतर मंतर पर बैठने से पहले हम लोगों ने दिल्ली सचिवालय के सामने धरना दिया था. उस समय दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया से भी मिले थे. उन्होंने कहा था कि हमें तो यह भी नहीं पता कि दिल्ली में अतिथि शिक्षक भी हैं. उन्होंने हम सबको भाजपा का दलाल कह दिया था. फिर हम मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिले तो उन्होंने कहा कि तुम लोग तो धरना देने में उस्ताद हो, धरना देते रहो कुछ न कुछ हो जाएगा. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि उनके द्वारा किए गए कुल वादों में से 30 से 40 प्रतिशत भी पूरे हो जाएं तो काफी है. अब आप ही बताइए क्या इस 30-40 प्रतिशत में हमारे वादे भी हैं? जबकि पिछली बार जब 49 दिनों की सरकार बनी थी तभी उन्होंने वादा किया कि अतिथि शिक्षकों को स्थाई कर दिया जाएगा.’

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