कनहर में दफन होती समाजवाद की थीसिस

सुंदरी में 18 अप्रैल की सुबह साठ-सत्तर साल के बूढ़ों के सिर पर डंडा मारा गया है. औरतों के कूल्हों में डंडा मारा गया है. जहूर के हाथ पर पुलिस ने इतना जाेर से मारा कि उसकी तीन उंगलियां फट गई हैं. पुलिस अधीक्षक यादव कहते हैं, ‘सिर पर इरादतन नहीं मारा गया, ये ‘इंसिडेंटल’ (संयोगवश) है.’ ‘क्या तीनों बुजुर्गों के सिर पर किया गया वार ‘इंसिडेंटल’ है?’ इस सवाल के जवाब में वे बोले, ‘बल प्रयोग किया गया था, ‘इंसिडेंटल’ हो सकता है. हम कोई दुश्मन नहीं हैं, इसकी मंशा नहीं थी.’ ‘और 14 अप्रैल को अकलू के सीने को पार कर गई गोली?’ यादव विस्तार से बताते हैं, ‘पुलिस ने अपने बचाव में गोली चलाई. थानेदार (कपिलदेव यादव) को लगा कि मौत सामने है.’ इस घटना के बारे में बीएचयू में भर्ती अकलू का कहना है, ‘हमको मारकर के थानेदार (कपिलदेव यादव) अपने हाथ में गोली मार लिए हैं और कह दिए कि ये मारे हैं… बताइए…’

जिलाधिकारी संजय कुमार को इस बात का विशेष दुख है कि अफवाह फैलाकर उनके प्रशासन को बदनाम किया जा रहा है. वे कहते हैं, ‘हजारों मैसेज सर्कुलेट किए गए हैं कि छह लोगों को मारकर दफनाया गया है. इंटरनेशनल मीडिया भी फोन कर रहा है. एमनेस्टी वाले यही कह रहे हैं. हम लोग पागल हो गए हैं जवाब देते-देते. इतनी ज्यादा अफवाह फैलाई गई है. चार दिन तक हम लोग सोये नहीं.’ आखिर कौन फैला रहा है यह अफवाह? जवाब में जिलाधिकारी हमें एक एसएमएस दिखाते हैं जिसमें 18 तारीख के हमले में पुलिस द्वारा छह लोगों को मारकर दफनाए जाने की बात कही गई है. भेजनेवाले का नाम रोमा है. रोमा सोनभद्र के इलाके में लंबे समय से आदिवासियों के लिए काम करती रही हैं. 14 अप्रैल की घटना के बाद जिन लोगों पर नामजद एफआईआर की गई उनमें रोमा भी हैं. पुलिस को उनकी तलाश है. डीएम कहते हैं कि कनहर बांध विरोधी आंदोलन को रोमाजी ने अपना निजी एजेंडा बना लिया है. ‘तो क्या सारे बवाल के केंद्र में अकेले रोमा हैं?’ यह सवाल पूछने पर वे मुस्कराकर कहते हैं, ‘लीजिए, सारी रामायण खत्म हो गई. आप पूछ रहे हैं सीता कौन है.’ डीएम और एसपी दोनों अबकी हंस देते हैं.

स्थानीय लोगों की मानें तो कनहर बचाओ आंदोलन गांधीवादी कार्यकर्ता महेशानंद ने बरसों पहले शुरू किया था लेकिन आज की तारीख में लोग रोमा को ही अपना नेता मानते हैं. नेतृत्व के बारे में सवाल पूछने पर पुलिस अधीक्षक शिवशंकर यादव कहते हैं, ‘महेशानंद आंदोलन छोड़कर भाग गए हैं. उन्होंने मान लिया है कि उनके हाथ में अब कुछ भी नहीं है. उनका कहना है कि बस उनके खिलाफ मुकदमा नहीं होना चाहिए. उनके जाने के बाद रोमाजी ने कब्जा कर लिया है.’ प्रशासन को रोमा से दिक्कत दूसरी वजहों से है. यादव कहते हैं, ‘महेशानंद बांध क्षेत्र से बाहर के इलाके में शांतिपूर्ण आंदोलन चलाते थे. इससे हमें कोई दिक्कत नहीं थी.’ डीएम कहते हैं, ‘रोमा बहुत अडि़यल मिजाज की हैं.’

बांध विरोधी आंदोलन में सक्रिय भीसुर के एक नौजवान शिक्षक दुखी मन से कहते हैं, ‘आंदोलन की दिशा टूटने के कगार पर पहुंच चुकी है. जनता बहुत चोटिल हो चुकी है. आधे लोग धरने से उठकर चले गए थे. उन्हें किसी तरह वापस लाया गया है. महेशानंद भाग ही गए, गम्भीराजी पर लोगों को भरोसा नहीं रहा और रोमाजी तो यहां हैं ही नहीं, हालांकि गोली और लाठी यहां उन्हीं के लोग खा रहे हैं.’ बांध विरोधी आंदोलन के नेता गम्भीरा प्रसाद को 20 अप्रैल की शाम इलाहाबाद से गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. सबसे ताजा गिरफ्तारी भीसुर के पंचायत मित्र पंकज गौतम की है.

इस दौरान राष्ट्रीय हरित पंचाट (एनजीटी) द्वारा लगाई गई रोक का उल्लंघन करके कनहर बांध पर काम लगातार जारी है. डीएम और एसपी इस रोक को ‘व्याख्या’ का मामला मानते हैं. इलाके में पुलिस बल बढ़ा दिया गया है. दिल्ली से एक जांच दल और गोलीकांड के बाद मेधा पाटकर के यहां आने से जो खबरें और तस्वीरें बाहर निकलकर राष्ट्रीय मीडिया में आ पाई हैं, उनसे सरकार बहुत चिंतित है क्योंकि यह मामला सिर्फ एक अवैधानिक बांध बनाने का नहीं बल्कि पैसों की भारी लूट और बंटवारे का भी है.

3 COMMENTS

  1. अभिषेक जी मजबूत खबर लिखी है.. आगे भी इस पर फालोअप हो तो अच्छा लगेगा

  2. “सब पापी पेट का खेला है” कभी यही बात हमें महेशा भाई ने बोली थी ! खैर एक बात की पुष्टि तो हो ही रही है की आन्दोलन चलाना और उसको अंजाम तक ले जाना एन० जी० ओ० वालों के बस की बात नहीं है !

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