न्याय की रक्षक को न्याय की तलाश | Tehelka Hindi

उत्तर प्रदेश, राज्यवार A- A+

न्याय की रक्षक को न्याय की तलाश

एक महिला सब इंस्पेक्टर के यौन उत्पीड़न पर उत्तर प्रदेश पुलिस की टालमटोल सवालों के घेरे में है.
अतुल चौरसिया 2014-09-15 , Issue 17 Volume 6

Aruna-Rai

23 अप्रैल 2014 का दिन खबरों के लिहाज से बेहद घटनापूर्ण था. आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग की जांच के लिए बनी जस्टिस मुद्गल कमेटी ने इसी दिन बीसीसीआई के अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की भूमिका अपनी जांच के दायरे में लेने का फैसला किया था. इसी दिन एक वीडियो सामने आया था जिसमें पूर्व ‘आप’ नेता शाजिया इल्मी मुसलमानों से वोट देते समय ‘कम्युनल’ हो जाने की अपील करती दिख रही थीं. इसी दिन बॉलीवुड के दो चमकदार नामों रानी मुखर्जी और आदित्य चोपड़ा ने एक-दूजे का हो जाने की घोषणा भी की थी. इतनी सारी खबरों के बीच दिल्ली से सटे मेरठ शहर से आई एक खबर लगभग गुम हो गई. यह खबर थी मेरठ के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में तैनात एक महिला सब इंसपेक्टर (एसआई) के साथ हुए यौन दुर्व्यवहार की. हालांकि खबर पूरी तरह दम तोड़ती उससे पहले सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों के जरिए इस पर बहस छिड़ गई. इस चर्चा में आने का नतीजा यह हुआ कि मामले की जांच के लिए पुलिस को विभागीय जांच बिठानी पड़ी और प्रदेश सरकार को एक अलग जांच कमेटी बनानी पड़ी. तहलका को मिली जानकारी के मुताबिक कमेटी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट में आरोपी को दोषी भी पाया है.

लेकिन अब उस रिपोर्ट को लेकर सरकार और पुलिस विभाग का रुख कुछ स्पष्ट नहीं है. आरोपी अधिकारी एक बार फिर से बहाल हो चुका है. पीड़िता एसआई अपनी लड़ाई को फिर भी आगे बढ़ाने में लगी हुई है. उधर, इस मामले में आरोपी और उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उलटे खुद को ही पीड़ित बताते हैं .

यह कहानी मेरठ के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में तैनात एसआई अपूर्वा राय (बदला हुआ नाम) की है. 23 अप्रैल को अपूर्वा अपने दफ्तर में थीं जब उनके वरिष्ठ अधिकारी उप महानिरीक्षक (डीआईजी) देवी प्रसाद श्रीवास्तव ने उन्हें अपने कमरे में तलब किया. अपूर्वा के मुताबिक उनके कमरे में प्रवेश करने के बाद श्रीवास्तव ने उनके साथ मौखिक और शारीरिक रूप से अभद्रता करने की कोशिश की. अपूर्वा किसी तरह से उनके कमरे से निकलीं और अपने वरिष्ठ अधिकारी सीओ धुरेंद्र कुमार सिंह से डीआईजी के आचरण की शिकायत की. श्रीवास्तव यहीं नहीं रुके उन्होंने मोबाइल के जरिए अपूर्वा से संपर्क करने की कई कोशिशें की. पीड़िता द्वारा बतौर सबूत पेश किए गए मोबाइल रिकॉर्ड से भी इस बात की पुष्टि होती है. आरोपों के मुताबिक डीआईजी ने आगे भी पीड़िता को परेशान करना जारी रखा. उन्होंने अपने पद की धौंस देते हुए पीड़िता पर किसी तरह की शिकायत न करने का दबाव डाला. आरोप है कि इससे भी बात नहीं बनी तो उन्होंने अपनी पत्नी को अपूर्वा को मनाने के लिए भेजा. बाद में फोन पर उन्होंने अपूर्वा से माफी मांगते हुए उन्हें अपनी बहन बनाने का प्रस्ताव भी रखा जिसे अपूर्वा ने रिकॉर्ड कर लिया. यह रिकॉर्डिंग भी बतौर साक्ष्य जांच कमेटी के सामने प्रस्तुत की गई है. तहलका ने जब इस मामले पर श्रीवास्तव से बात की तो उनका कहना था, ‘मैंने उसकी गलती पर उसे डांटा था. इन लोगों ने मेरठ पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में अपना गुट बना रखा है. इसके जरिए ये लोग उलटे-सीधे काम करते हैं. वरिष्ठ होने के नाते यह मेरी जिम्मेदारी थी कि मैं चीजों पर नजर रखता. लेकिन उसने इस डांट को यौन उत्पीड़न के रूप में लोगों के सामने रखा. इससे मैं बहुत नर्वस हो गया. उसी दबाव में मैंने उससे माफी मांगी थी.’

अपूर्वा के मुताबिक अपने साथ हुई इस घटना से घबराकर उन्होंने वरिष्ठ अधिकारी के अनैतिक व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया. 26 अप्रैल को डीजी ट्रेनिंग अरविंद कुमार जैन का पुलिस ट्रेनिंग स्कूल, मेरठ का दौरा था. अपूर्वा ने उनसे डीआईजी की लिखित शिकायत कर दी.

यहां एक बात पर ध्यान देना जरूरी है. शुरुआत से ही अपूर्वा कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के लिए बने नए कानून के तहत शिकायत दर्ज करवाना चाहती थीं. लेकिन विभाग ने उनकी बात पर ध्यान दिए बिना एक विभागीय जांच शुरू कर दी. लेकिन अपूर्वा पूरे समय अपनी इस बात पर अड़ी रहीं कि उन्हें महिलाओं के साथ कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न कानून के तहत मामला दर्ज करवाना है. इसके तहत एक स्वतंत्र कमेटी का गठन करना अनिवार्य था. इस बीच अपूर्वा ने एक और काम किया, उन्होंने अपने साथ हुए शोषण को सोशल मीडिया और अखबारों के माध्यम से भी आगे बढ़ाया.

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(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 6 Issue 17, Dated 15 September 2014)

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