सतलुज-यमुना लिंक नहर सींच रही राजनीति की फसल

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पहले ही दिन से एसवाईएल नहर योजना के साथ बदकिस्मती जुड़ गई थी. 31 अक्टूबर, 1984 को इसने तत्कालीन इंदिरा गांधी की जान ली, इसके बाद 20 अगस्त, 1985 को अकाली दल के अध्यक्ष हरचंद सिंह लोंगोवाल की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई. इन दोनों ही से नदी का पानी बांटने को लेकर शिकायत थी. 1982 में इंदिरा गांधी ने ही पटियाला के कपूरी में एसवाईएल नहर की नींव रखी थी. फिर 1988 में माजत गांव में 32 मजदूरों को उग्रवादियों द्वारा गोली मार दी गई थी, जिसके बाद नहर का निर्माण कार्य, जो उस समय 70 से 80 फीसदी तक पूरा हो गया था, बंद हो गया. इसके बाद 1990 में भी उग्रवादियों ने एसवाईएल नहर पर काम कर रहे एक चीफ इंजीनियर और सुप््रिटेंडेंट इंजीनियर की हत्या कर दी थी.[/symple_box]

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इस बीच जब पंजाब में किसान नहर को पाट चुके हैं, हरियाणा के वो किसान जिनकी जमीन एसवाईएल के लिए अधिगृहित की गई थी, उन्होंने राज्य के किसानों से मुकदमा दायर करने की मांग की है. इसका कारण या तो पंजाब के किसानों की तरह जमीन पाने का लोभ भी हो सकता है, जहां जमीन के दाम आसमान छू रहे हैं या फिर वे इस नहर से हरियाणा में पानी आने की उम्मीद ही छोड़ चुके हैं. हरियाणा में नहर के 90 किलोमीटर हिस्सा आता है, जिसका काम 1976 में ही पूरा हो चुका है. हरियाणा में एसवाईएल का क्षेत्र अंबाला से शुरू होकर करनाल जिले के मुनक तक है. जब इसका काम शुरू हुआ था तब नहर कुरुक्षेत्र से गुजरती थी. एसवाईएल के निर्मित क्षेत्र में अब बरसात का पानी ही जमा होता है.

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कोई समाधान न देखते हुए हरियाणा सरकार ने विधानसभा में पंजाब सरकार के इस विधेयक के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है और सुप्रीम कोर्ट से पंजाब सरकार को इस विधेयक को लागू करने से रोकने का निवेदन किया है. अदालत ने हरियाणा की अर्जी पर पंजाब से 28 मार्च तक जवाब देने को कहा था. हरियाणा ने इस अर्जी में एक कोर्ट रिसीवर की नियुक्ति और इस विधेयक को राजपत्र अधिसूचना में शामिल न करने की भी मांग की है.

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नदी पर किसका अधिकार ?

नदी-तट सिद्धांतों के अनुसार अगर कोई नदी पूरी तरह से एक ही राज्य के अंतर्गत बहती है तब उस पर केवल उस राज्य का अधिकार होगा, किसी और राज्य का नहीं. यदि नदी एक राज्य से अधिक राज्यों से होकर बहती है, तो जिस भी राज्य से वह गुजर रही है, उस राज्य में आने वाले नदी के क्षेत्र पर उस राज्य का अधिकार होगा. इन नदी तट अधिकारों का आधार इस बात को माना गया है कि किसी राज्य विशेष के लोगों को नदी के राज्य में होने से उसके बहाव आदि के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है, तो ऐसे में नदी से होने वाले फायदे का एकमात्र लाभार्थी भी वही राज्य होगा. नदी के पानी के बंटवारे को लेकर पहला विवाद 1947 में विभाजन के बाद पाकिस्तान बनने से हुआ था, जब भारत के पंजाब राज्य और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में कई नदियां बहा करती थीं. 1960 में प्रधानमंत्री नेहरू और अयूब खान इंडस बेसिन रिवर्स वाटर्स ट्रीटी (संधि) लेकर आए, जिसके अनुसार यह निश्चित हुआ कि सतलुज, व्यास और रावी नदियों के पानी पर हिंदुस्तान का हक होगा. पाकिस्तान को वर्ल्ड बैंक और कई मित्र देशों ने सहायता दी. एसवाईएल नहर मुद्दे पर पंजाब का तर्क था कि पंजाब रिआॅर्गेनाइजेशन एेक्ट, 1966 के बाद हरियाणा सतलुज नदी के संबंध में पंजाब के साथ सह-तटवर्ती (समान नदी बांटने वाला) राज्य नहीं रहा, ठीक उसी तरह जैसे पंजाब यमुना के लिए नहीं रहा. तो ऐसे में अगर हरियाणा पंजाब की नदियों का पानी लेना चाहता है तो पंजाब को भी यमुना में उसका हिस्सा मिलना चाहिए.
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