किसी की मुसीबत, किसी का मुनाफा

 

 

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कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो चारपाई और रजाई किराए पर नहीं ले पाते. ऐसे लोगों के लिए जमीन पर एक बड़ी दरी बिछा दी जाती है. केवल रजाई किराए पर लेकर लोग साथ-साथ सो जाते हैं. केवल रजाई का किराया 10 रुपये से 20 रुपये के बीच है. सुबह इनके जगने का इंतजार नहीं किया जाता. सुबह होते ही रजाई छीन ली जाती है.

कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो चारपाई और रजाई किराए पर नहीं ले पाते. ऐसे लोगों के लिए जमीन पर एक बड़ी दरी बिछा दी जाती है. केवल रजाई किराए पर लेकर लोग साथ-साथ सो जाते हैं. केवल रजाई का किराया 10 रुपये से 20 रुपये के बीच है. सुबह इनके जगने का इंतजार नहीं किया जाता. सुबह होते ही रजाई छीन ली जाती है.

 

 

 

 जैसे-जैसे ठंड बढ़ती है वैसे-वैसे सोनेवालों की संख्या बढ़ती है. कारोबार बढ़ता है. सोने का सामान किराए पर देनेवाले लोग अपने साथ दो-चार लोग रखते हैं जो सुबह होते ही हरकत में आ जाते हैं और कुछ ही समय में सारी रजाई, खाट और दरी एक जगह जुटा देते हैं. इन मजदूरों को सोने के लिए मुफ्त में रजाई मिलती है और मेहनताने के तौर पर 50 रुपये भी मिलते हैं.

जैसे-जैसे ठंड बढ़ती है वैसे-वैसे सोनेवालों की संख्या बढ़ती है. कारोबार बढ़ता है. सोने का सामान किराए पर देनेवाले लोग अपने साथ दो-चार लोग रखते हैं जो सुबह होते ही हरकत में आ जाते हैं और कुछ ही समय में सारी रजाई, खाट और दरी एक जगह जुटा देते हैं. इन मजदूरों को सोने के लिए मुफ्त में रजाई मिलती है और मेहनताने के तौर पर 50 रुपये भी मिलते हैं.

 

 

यमुनापार रहनेवाले रफीक पिछले कई सालों से यह काम कर रहे हैं. इनके यहां एक रात में तकरीबन दो सौ लोग सोते हैं. ठंड बढ़ने पर हर रात चार सौ लोग तक यहां सोते हैं. रफीक दिल्ली पुलिस से नाराज हैं. वह कहते हैं कि पुलिस उन्हें परेशान करती है और उनसे घूस लेती है. वह कहते हैं, ‘हम किसी को सोने के लिए गर्म रजाई, खाट और दरी देते हैं. बदले में किराया लेते हैं. इसमें गलत क्या है. अगर सरकार इनके सोने का इंतजाम कर दे तो ये लोग हमारे यहां आएंगे ही नहीं. हमारा काम बंद हो जाएगा. सरकार को इन बेघरों के लिए इंतजाम करना चाहिए न कि हमें भगाना चाहिए.’

यमुनापार रहनेवाले रफीक पिछले कई सालों से यह काम कर रहे हैं. इनके यहां एक रात में तकरीबन दो सौ लोग सोते हैं. ठंड बढ़ने पर हर रात चार सौ लोग तक यहां सोते हैं. रफीक दिल्ली पुलिस से नाराज हैं. वह कहते हैं कि पुलिस उन्हें परेशान करती है और उनसे घूस लेती है. वह कहते हैं, ‘हम किसी को सोने के लिए गर्म रजाई, खाट और दरी देते हैं. बदले में किराया लेते हैं. इसमें गलत क्या है. अगर सरकार इनके सोने का इंतजाम कर दे तो ये लोग हमारे यहां आएंगे ही नहीं. हमारा काम बंद हो जाएगा. सरकार को इन बेघरों के लिए इंतजाम करना चाहिए न कि हमें भगाना चाहिए.’

 

 

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