पॉजीटिव खबर चलाइए…

पत्रकारिता में एक नए प्रयोग के तौर पर राजनीति, समाज और सत्ता के सकारात्मक पहलुओं को सामने लाने को नाजायज नहीं ठहराया जा सकता. शायद विकासात्मक पत्रकारिता की अवधारणा भी यही कहती है किंतु समूची पत्रकारिता को दिशा दिखाने के नाम पर समाचार को नकारात्मक या सकारात्मक ठहराए जाने का विचार बेहद अपरिपक्व है. प्रधानमंत्री जी कथित सकारात्मक खबरों को प्रोत्साहित करने के स्थान पर मीडिया संस्थानों को सच को सच की तरह पेश करने की आजादी का भरोसा देते तो शायद अधिक फलदायी होता.

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