मुजफ्फरपुर: गुस्साई भीड़ ने घरों में लगाई आग,चार की मौत

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घटना के बाद गांव का मंज़र
घटना के बाद गांव का मंज़र

मुजफ्फरपुर के सरैया थाने के अज़ीज़पुर गांव में अपहृत हिंदू युवक का शव मिलने के बाद गुस्साई भीड़ ने दूसरे समुदाय के 50 से अधिक घरों में आग लगा दी. दोनों पक्षों के बीच हुई हिंसक भिड़ंत और आगजनी में चार लोगों की मौत हो गई. इसके अलावा कई और लोग गंभीर रूप से घायल हैं. मामले में 14 लोगों की गिरफ्तारी हुई है और 5,000 अज्ञात लोगों को नामजद किया गया है. घटनास्थल पर 1000 पुलिसकर्मी तैनात हैं.स्थिति पर काबू पाने के लिए लगाए गए प्रशासनिक कैंप में सूबे के आईजी, आयुक्त, डीएम, एसएसपी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने डेरा डाल रखा है. सरैया व आसपास के गांवो में भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.

मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी अनुपम कुमार ने कहा, ‘घटना प्रेम-प्रसंग से जुड़ी है. दोनों पक्षों के उपद्रवी तत्वों की गिरफ्तारी हो गई है. मुख्य आरोपित भी गिरफ्तार किया जा चुका है. मुआवजा देने की कार्रवाई की जा रही है. स्थिति नियंत्रण में है.’

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राख़ में तब्दील गांव

अज़ीज़पुर के पड़ोसी गांव बहिलवारा साहनी टोला का उन्नीस वर्षीय भारतेंदु साहनी नौ जनवरी से लापता था. अपहरण की प्राथमिकी 11जनवरी को दर्ज कराई गई थी, जिसमें अज़ीज़पुर निवासी सदाकत अली उर्फ विक्की को नामजद किया गया था. पुलिस अपहरण की गुत्थीसुलझाने में लगी हुई थी, लेकिन रविवार की सुबह अभियुक्त के घर के समीप खेत से लापता युवक की लाश मिलने के बाद सनसनी फैल गई. इसके बाद गुस्साई भीड़ ने अजीतपुर के 50 से अधिक घरों को आग के हवाले कर दिया. गांव की घेराबंदी की वजह से जहां हिंसा के दौरान वहां के लोग बचकर भागने में विफल रहे, वहीं दूसरी ओर पुलिस भी मौके पर पहुंचने में नाकामयाब रही.

बिहर के मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं. जांच की जिम्मेदारी गृह सचिव सुधीर कुमार और एडीजी गुप्तेश्वर पाण्डेय दी गई है. मांझी ने दिल्ली व मुंबई का दौरा बीच में रद्द कर मामले की जानकारी के लिए वापस लौटने का फैसला किया है. राज्य सरकार ने घटना को दुखद बताया है और मृतकों के परिवारवालों को 5 लाख रूपये मुआवजा देने का एलान किया गया है. घायलों को 50-50 हजार रुपये दिए जाएंगे और क्षतिग्रस्त मकानों को फिर से बनवाया जाएगा.

साल 2013 में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में इसी तरह की पृष्ठभूमि पर शुरू हुए विवाद ने बाद में सांप्रदायिक रूप ले लिया था. इस वजह से बिहार सरकार किसी तरह का जोखिम लेने को तैयार नहीं है. ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है.एक उच्च अधिकारी ने कहा, ‘यह स्थानीय मामला था. दोनों पक्षों के ग्रामीणों ने गलती मान ली है. हमारी प्राथमिकता शांति बहाल करने और उससे बनाए रखने की है.’

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