मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह

अपने इसी लेख में राजू आगे लिखते हैं, ‘तब मुलायम के पुराने साथी बेनी प्रसाद वर्मा जो कभी समाजवादी पार्टी में मुलायम के बाद सबसे महत्वपूर्ण नेता माने जाते थे, उन्हें तक किनारे करने की कोशिशें शुरू हो गई थीं. उन दिनों लखनऊ में समाजवादी पार्टी के मुख्यालय में सपा के एक विधायक सीएन सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा पर आए दिन पार्टी हितों और पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए टेलीविजन कैमरों के सामने खड़े दिखाई देते थे. ‘अमर प्रभाव’ से प्रताड़ित, पीड़ित और उपेक्षित होकर सपा से विदाई लेने वालों में राजबब्बर, बेनी प्रसाद वर्मा और आजम खान जैसे दिग्गज समाजवादी नेता रहे.’ ये घटनाएं उस दौर में मुलायम सिंह के ऊपर अमर सिंह के प्रभाव की बानगी हैं.

1994 में समाजवादी पार्टी में शामिल होने वाले और आगरा से दो बार सांसद रहे समाजवादी नेता और अभिनेता राज बब्बर पहले ऐसे सपाई रहे जिन्होंने सार्वजनिक तौर पर अमर सिंह के लिए दलाल जैसे शब्द का इस्तेमाल किया. इसके बाद राज बब्बर पार्टी से बाहर कर दिए गए लेकिन अमर सिंह जस के तस बने रहे. इस दौर में ऐसी स्थितियां पैदा हुईं जिसमें समाजवादी पार्टी के थिंक टैंक कहे जाने वाले, मुलायम के चचेरे भाई रामगोपाल यादव तक राजनीतिक एकांतवास में जाना पड़ा था. पार्टी के वैचारिक तुर्क जनेश्वर मिश्र और मोहन सिंह बिल्कुल खामोश हो गए थे. लक्ष्मीकांत वर्मा जैसे गैरराजनीतिक समाजवादी चिंतक दूर से तमाशा देख रहे थे.

‘अमर प्रभाव’ की वजह से एक जमीनी पार्टी दिन प्रति दिन जमीन में धंसती जा रही थी. कार्यकर्ता नाराज थे. पार्टी के वरिष्ठ नेता और चिंतक कहे जाने वाले चेहरे पार्टी से दूर हो रहे थे. तो ऐसे में सवाल उठता है कि अमर सिंह के साथ में ऐसा क्या था जिसकी वजह से धरतीपुत्र मुलायम सिंह उनके खिलाफ कुछ बोलने या करने की स्थिति में नहीं रह गए थे.

इस बार में दो बातें कहीं जाती हैं पहली यह कि मुलायम सिंह का स्वभाव ही ऐसा है कि वे अपने साथ के किसी व्यक्ति के खिलाफ जल्दी कोई कड़ा कदम नहीं उठाते या ना ही कुछ बोलते हैं. दूसरी बात यह कि अमर सिंह समाजवादी पार्टी में वित्त के सबसे मुख्य स्रोत थे. मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए अमर सिंह उत्तर प्रदेश में निवेश लाने के लिए बनाई गई संस्था के प्रमुख रह चुके थे और अनेक अवसरों पर उन्होंने अनिल अंबानी सहित देश के कई बड़े उद्योगपतियों को यूपी में बुलाया था.

इसके अलावा अमर सिंह जोड़-तोड़ के भी माहिर खिलाड़ी थे.  इन सब वजहों से मुलायम ने अमर को अपने साथ बनाए रखा लेकिन जब जनेश्वर मिश्र यानी ‘छोटे लोहिया’ ने सिद्धांतों का सवाल उठा दिया तो मुलायम सिंह के लिए हालात को नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया. इस तरह फरवरी 2010 में अमर-मुलायम की इस राजनीतिक जोड़ी का अलगाव हो गया. चौदह साल की राजनीतिक जोड़ी अलग हो गई. अमर सिंह ने लोकदल के नाम से एक असफल राजनीतिक पारी भी खेली.

इसी साल अगस्त महीने में एक बार फिर से दोनों साथी एक मंच पर दिखे. जिस जनेश्वर मिश्र के एतराज पर अमर सिंह की पार्टी से विदाई हुई थी उन्हीं की जयंती के अवसर पर लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में अमर और मुलायम साथ आए. जब इस मुलाकात के बारे में पत्रकारों ने अमर सिंह से सवाल किया तो वे बोले, ‘भूगोल बदला जा सकता है, इतिहास नहीं, अतीत नहीं.’

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here