‘एक आदमी जिससे मैं सिर्फ दो बार मिली और अब इस मोड़ पर खड़ी हूं’

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वास्तव में कुछ लोगों के द्वेषपूर्ण रवैये का एक कारण है, वे मुझमें एक पाकिस्तानी को देखते हैं, जो अपने देश से प्यार करती है लेकिन इन सबके बावजूद भारत को शुभकामनाएं. कुछ या तमाम मुझे उस मामले की वजह से जानते होंगे जिसमें मेरा नाम दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से घसीटा गया. घटनास्थल पर वे मौजूद भी नहीं होंगे फिर भी वे मुझे ऐसे ही जानते हैं या होंगे. लेकिन भारतीयों से ऑनलाइन बातचीत में जिस शालीनता और विशुद्ध शिष्टता का मुझे अनुभव हुआ, वह लोगों की जन्मजात अच्छाई पर मेरा विश्वास कायम रखने के लिए काफी है. हालांकि मेरा नाम उस मामले में भारतीय मीडिया ने लगातार खींचा फिर भी यह लोगों का मेरे बारे में अंदाजा लगाने का पैमाना नहीं है. न ही यह वाकया मेरे शब्दों, एक लेख, एक ट्वीट और किसी टीवी शो से मेरे बारे में जानने से लोगों को रोक पाएगा.

इस विवाद के बाद क्या आपकी जिंदगी बदल गई? अचानक हुई इस घटना के चलते भारत और पाकिस्तान के घर-घर में आप चर्चित हो गईं. इस विवाद ने अापके निजी और सार्वजनिक जीवन को कैसे प्रभावित किया?

इसके लिए यह कहना काफी होगा… इस विवाद और मामले में निजी तौर पर मुझे खींचे जाने की इस घटना को मेरे लिए शब्दों में बयां करना संभव नहीं है. यह काफी कठिन है. एक ऐसे देश में जहां मैं सिर्फ दो बार गई हूं, वहां की मीडिया में आपके बारे में लगातार धारणाएं बनाईं और बिगाड़ी जा रहीं हैं. वह वक्त प्रतिक्रिया करने की बेचैनी की बजाय आत्मसंयम रखने की सीख देता है. अपने ईमेल के इनबॉक्स में गूगल एलर्ट खोजते वक्त मुझे एक रिमाइंडर लगातार मिलता था कि कैसे जिनसे मैं कभी नहीं मिली, उन्होंने मुझे लेकर अपना द्वैमासिक बेक्रिंग न्यूज बना दिया. यह सब नरक के जैसा था. मैं किसी के लिए भी ऐसा नहीं चाहूंगी. एक साधारण इंसान होना और इस ज्ञान के साथ जीना कि आपका नाम घर-घर में चर्चित है, वह भी उस वजह से जो आपके खिलाफ हो. यह किसी अग्निपरीक्षा की तरह है. पिछला एक साल बहुत अविश्वसनीय रहा. मेरे परिवार, दोस्तों और सोशल मीडिया पर पूरी तरह से अजनबी लोगों से मिला समर्थन मुझे उत्साहित करनेवाला था. लोग आपके पास आते हैं, आपसे मिलते हैं और आप चुपचाप बैठे रहते हो. तब आपके पास कहने के लिए कुछ ज्यादा नहीं होता या किसी का हाथ पकड़े शांत बैठे रहते हो, यह जताने के लिए कि आप चिंतित हो.

पेशेवर तौर पर मैं काम नहीं करती इसलिए मुझे पता नहीं कि इसका जवाब किस तरह दिया जाए. एक बार फिर इसे रिकॉर्ड के तौर पर रखते हुए मैं बताना चाहूंगी कि ‘डेली टाइम्स’ में मार्च 2012 से नवंबर 2013 तक मैं ओपेड एडिटर थी. यही एकमात्र नौकरी थी जो मैंने की है और पत्रकारिता से मेरा नाता मात्र इसी से जुड़ा था. हां, मैं 2010 से लगातार लिख रही हूं और यह अभी भी जारी है, क्योंकि लेखन मेरा पहला प्यार है. यह वह चीज है जो मेरे सबसे करीब है और जिससे मेरा वजूद है. जब तक मेरी उंगलियां लैपटॉप के कीबोर्ड पर टाइपिंग करने के लिए समक्ष रहेंगी मैं किसी न किसी रूप में लेखन को जारी रखूंगी. पिछले साल मेरे लेखन में कई आयाम भी जुड़े. मेरे दृष्टिकोण में व्यापक रूप से बदलाव आया है. देर से सही लेकिन मैंने यह महसूस किया है कि मैं अपनी बातचीत में उतनी सहज अब नहीं हूं, जितना पहले कभी होती थी. यह जानना बहुत असुविधाजनक और डरानेवाला है कि मैं जो भी लिखती हूं वह अब इस रुचि के साथ पढ़ा जा रहा है जो हमेशा सकारात्मक नहीं होता.

यह मसला वास्तव में बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन उतना षडयंत्रपूर्ण और भयावह नहीं, जैसा कि कुछ लोग इसे बनाने पर अमादा हैं

विवादास्पद मौत: कांग्रेस सांसद शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर नई दिल्ली के एक होटल में मृत पाई गई थीं. जिसके बाद मेहर तरार विवादों में घिर गईं.
विवादास्पद मौत:कांग्रेस सांसद शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर नई दिल्ली के एक होटल में मृत पाई गई थीं. जिसके बाद मेहर तरार विवादों में घिर गईं.

सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में चल रही जांच के दौरान आपका नाम चर्चित रहा. आपने इसका सामना कैसे किया?

जैसा कि मैंने पहले कहा, यह नरक की तरह था, जिसका मैंने सामना किया. हर दिन लगातार एक महिला (सुनंदा) जिससे मैं कभी नहीं मिली, एक व्यक्ति (शशि) जिनसे मैं दो बार मिली और अब मैं यहां खड़ी हूं. उनकी कहानी का एक हिस्सा, यह मसला वास्तव में बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन उतना षडयंत्रपूर्ण और भयावह नहीं है, जैसा कि कुछ लोग इसे बनाने पर अमादा हैं. इस मामले में किसी दिन पुलिस जरूर किसी नतीजे पर पहुंच जाएगी. तब शायद इस संबंध में मेरा नाम लिया जाना बंद हो जाएगा. कम से कम मीडिया में तो जरूर. यह जानकर अवास्तविक लगता है कि अजनबी आप पर बहस करते हैं, आपके शब्दों का विश्लेषण करते हैं, जो भी आप बोलते या लिखते हैं उनके अर्थ का अंदाजा लगाते हैं. मुझे उम्मीद है कि समय के साथ यह खत्म हो जाएगा लेकिन एक यथार्थवादी होने के नाते मैं जानती हूं कि यह सब जल्दी नहीं होगा.

इस विवादास्पद मसले को लेकर आपकी कोई इच्छा है या फिर कुछ ऐसा जिसे आपने किया या कहा न हो?

हां, मैं इसे पहले ही कह चुकी हूं और यहां फिर से कहती हूं. अगर मैं इसे फिर से कर सकती जिन ट्वीट्स के साथ मुझे टैग किया गया उनके जवाब में मैंने उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन कोई ट्वीट नहीं किया होता. मुझे चुप रहना चाहिए था. हालांकि मैंने उस तरह से प्रतिक्रिया नहीं दिखाई जैसाकि आमतौर पर लोग गलत तरीके से निशाना बनाए जाने पर करते हैं. लेकिन उन जवाबों ने विवाद को और बढ़ा दिया. ट्विटर पर मैंने कुछ चीजों के बारे में बताया भी था जो मेरे खिलाफ थीं. मुझे इन सब चीजों को ट्विटर से हटा लेना चाहिए. मुझे लगता है यह एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी, लेकिन दूरदर्शी रूप में देखा जाए तो यह बेवकूफी भरा भी था.

जो कुछ भी हुआ क्या उस पर कभी आप किताब लिखना चाहेंगी? जैसा कि प्रख्यात लेखक पैट्रिक फ्रेंच की ओर से इस मामले को लेकर एक कहानी लिखने की जानकारी मिली है?

नहीं, मैं ऐसे विषय पर कभी कुछ नहीं लिखूंगी जो मेरे लिए काफी निजी है. वे लोग जो मेरे काफी करीबी हैं, जैसे मेरा बेटा, मेरी भतीजी और कुछ दोस्तों को छोड़कर मैं इस बारे में किसी से बात भी नहीं करना चाहती. क्या है और क्या था यह मेरी जिंदगी का बहुत ही निजी हिस्सा है. इसे सनसनीखेज बनते हुए देखना, बिना तथ्यों को जाने इसमें लोगों का जोड़-तोड़ करना और इसका घिनौना अखबारी नाटक बनते हुए देखना मेरे लिए बहुत दुखद था. और इस बारे में ऐसा कुछ भी नहीं कि मैं किसी से कोई बात करना चाहूंगी.

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