Issue wise archive | Tehelka Hindi

Other Articles

नेताजी गुमनाम!

कभी अवध की राजधानी रहा फैजाबाद जिला अपने भीतर तमाम तरह की रहस्यमयी कहानियां समेटे हुए है. सरयू नदी के किनारे बसे इस शहर में ऐसी ही एक कहानी की शुरुआत 16 सितंबर, 1985 को तब होती है जब शहर के सिविल लाइंस में स्थित ‘राम भवन’ में गुमनामी बाबा  

केशव के हाथ कमल

कहते हैं कि राजनीति में टोटके खूब चलते हैं. ऐसा ही एक टोटका सत्तारूढ़ भाजपा में चल रहा है. यह टोटका हिंदुत्व, पिछड़ा और चायवाला कंबिनेशन का है. लोकसभा चुनाव में ऐसे ही उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बड़ी जीत दर्ज की तो अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ऐसे ही  

बुत को पूजते हैं पर इंसानियत की कीमत  पता नहीं

ये घटना बीते साल की है. हमारे शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर एक छोटा पर प्रसिद्ध प्राचीन शिव मंदिर है, जहां हर महीने की 17 तारीख को मेला लगता है. इस मेले में आसपास के क्षेत्रों के लोग अच्छी-खासी संख्या में जुटते हैं. मंदिर बहुत बड़ा और व्यवस्थित नहीं  

नरगिस के नखरे उफ-उफ-उफ!

जिसे इस देश का बच्चा-बच्चा सीरियल किसर के नाम से जानता है, उसकी ‘किसिंग’ काबिलियत पर सवालिया निशान लगाना कम दिलेरी का काम नहीं है. और तो और, ये सवालिया निशान किसी और ने नहीं बल्कि पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी मोहम्मद अजहरुद्दीन की बायोपिक ‘अजहर’ में संगीता बिजलानी का किरदार निभा  

गांवों में बुजुर्गों की बदहाली

वरिष्ठ नागरिकों के लिए चलाई जा रही तमाम योजनाओं के बावजूद गांव में रहने वाले बुजुर्गों की हालत खराब है. बुजुर्गों पर आई सरकार की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, देश के ग्रामीण इलाकों में मौजूद कुल बुजुर्गों में करीब 66 फीसदी ऐसे हैं जो अब भी दिहाड़ी पर अपना  

चुनावी चंदा पाने में भाजपा नंबर एक

देश की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों को पिछले वित्त वर्ष के दौरान कुल 622 करोड़ रुपये चंदे के रूप में मिले हैं. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा चंदा (437.35 करोड़ रुपये) केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को मिला. उसके खाते में आई रकम चार राष्ट्रीय दलों  

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला

क्या है मामला? भारत को 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टर आपूर्ति के दौरान हुए घोटाले के आरोप में इटली की एक अदालत ने दो लोगों को सजा सुनाई है. यह सौदा फिनमेकैनिका से 3600 करोड़ रुपये में किया गया था. मिलान की अपीलीय अदालत ने इस मामले में इटली की रक्षा और  

‘मेरी रग-रग में  बसा है साम्यवाद’

पिनाराई विजयन ऐसे इंसान हैं जिन्होंने अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ हिस्सा एक विचारधारा विशेष को समर्पित कर दिया है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पोलित ब्यूरो का यह वरिष्ठ सदस्य आज केरल के कम्युनिस्ट आंदोलन के प्रसिद्ध नेताओं की जमात से खुद को बाहर पाता है. एक ऐसे वक्त में जब वामपंथ एक बड़े और गहरे विश्वसनीयता के संकट से गुजर रहा है, तब पिनाराई क्या फिर से लाल झंडे की हौसलाअफजाई करने आगे आएंगे?