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अलीगढ़ का वो प्रोफेसर

09 फरवरी 2010, के दिन अलीगढ़ की सुबह हर दिन की तरह सामान्य नहीं थी. ठंड के मौसम में माहौल में अजीब सी कड़वाहट घुली हुई थी. इसकी वजह विभिन्न अखबारों में प्रकाशित एक खबर थी, जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई थी. ये चर्चा अलीगढ़ मुस्लिम  

‘संत की समाधि’ : आस्था या अंधविश्वास

‘केवल महाराज जी (आशुतोष महाराज) ही सच्चे गुरु हैं जो ‘ब्रह्मज्ञान’ दे सकते हैं. मीडिया वालों ने उनके बारे में काफी उल्टी-सीधी बातें फैला दी हैं. मीडिया वाले समाधि का अर्थ नहीं समझते. हम बार-बार कह रहे हैं कि महाराज जी समाधि में हैं और वे वापस आएंगे.’ ये बयान  

देशद्रोही जेएनयू बनाम राष्ट्रवादी सरकार

जेएनयू में देशविरोधी नारा लगाने का मसला उसी तरह गड्ड-मड्ड हो गया है जैसे आजकल की देशभक्ति. एक टीवी चैनल और फिर सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दिखाया गया था कि नौ फरवरी को जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाए जा रहे हैं. उसी आधार पर कुछ छात्रों को  

‘असली निशाना तो जेएनयू की संस्कृति  और लोकतांत्रिकता है’

  देखिए, पहली बात कि मैं यह कन्फर्म नहीं कर सकता कि नौ फरवरी को वह घटना घटी या नहीं, क्योंकि मैं डीयू में एक सेमिनार में था. इसलिए उस घटना के बारे में कोई राय नहीं दे सकता. लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि मान लिया ऐसी कोई  

अगर तुम्हारी भारतमाता में मेरी मां शामिल नहीं तो भारतमाता का ये कॉन्सेप्ट मुझे मंजूर नहीं

वो तिरंगा झंडा जलाने वाले लोग हैं, वो सावरकर के चेले हैं जिन्होंने अंग्रेजों से माफी मांगी थी. ये वो लोग हैं. हरियाणा के अंदर जो अभी खट्टर सरकार है, इस सरकार ने शहीद भगत सिंह के नाम पर जो एक एयरपोर्ट का नाम रखा गया था, उसको एक संघी