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मराठवाड़ा : त्रासदी की तस्वीर
42 डिग्री सेल्सियस की तपा देने वाली धूप और भीषण गर्मी के बीच सधे हुए कदमों से अपने घर की ओर बढ़ती हुई 10...

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आग का ‘झरिया’

धधकते अंगारों पर चलने की कला सदियों से दुनिया को आश्चर्यचकित और रोमांचित करती रही है. झारखंड के अनेक हिस्सों में यह कला आज भी जीवित है और लोगों की मान्यता है कि इसे वे लोग ही कर सकते हैं जिन्हें अलौकिक शक्ति प्राप्त है. झरिया कोयलांचल के लाखों लोग  

मोदी, भाजपा या राजनीति तो महज हथियार हैं, राष्ट्रवाद का उन्माद तो पूंजीवादियों को चाहिए : सच्चिदानंद सिन्हा

देश में इन दिनों राष्ट्रवाद का हो-हल्ला कुछ ज्यादा ही मचा हुआ है. आपने इस बारे में सुना और पढ़ा ही होगा लेकिन इस विषय पर कुछ कहा नहीं. क्या सोचते हैं आप? इस विषय को अगर प्रचलित तौर-तरीकों से समझने की कोशिश करेंगे तो पता चलेगा कि यह शब्द  

ये देखकर दुख होता है कि अभिनेत्रियों का इस्तेमाल डिजाइनर कपड़े बेचने के लिए किया जा रहा है : श्रेया नारायण

एक राजनीतिक परिवार से होने के बावजूद अभिनय का ख्याल कब आया? मैं बिहार के मुजफ्फरपुर शहर से हूं. मैं ऐसे परिवार से हूं जिसने एक ही काम सीखा है और वो है पढ़ाई-लिखाई. मैंने दिल्ली में रहकर पढ़ाई की है. मैं एक अच्छी स्टूडेंट रही हूं और एमबीए किया  

सिंहस्थ की झलकियां

महाकाल, राजा विक्रमादित्य और कालिदास के नगर उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ महापर्व शुरू हो चुका है. उज्जयनी और अवंतिका के नाम से मशहूर क्षिप्रा तट पर स्थित धर्म और आस्था की इस नगरी में आयोजित सिंहस्थ में शामिल होने के लिए संन्यासियों के साथ गृहस्थों का भी रेला लगा हुआ  

‘सत्ता हस्तांतरण संधि से पता चल पाएगी नेताजी की सच्चाई’ : राम तीर्थ विकल

गुमनामी बाबा उर्फ भगवन जी की ‘गुमनाम’ मौत के 42 दिन बाद फैजाबाद से प्रकाशित होने वाले अखबार ‘नये लोग’ के दो पत्रकार राम तीर्थ विकल और उनके सहयोगी चंद्रेश कुमार ने गुमनामी बाबा के नेताजी होने का दावा करते हुए पहली खबर लिखी. इस खबर को अखबार के पहले  

‘डोमिसाइल नीति ने बाहरी आबादी को उनकी मुंहमांगी सौगात देने के साथ आदिवासियों के नैसर्गिक अधिकारों में कटौती कर दी है’

  झारखंड में रघुबर दास की भाजपा सरकार ने स्थानीय नीति लागू कर दी है. इस नीति के अनुसार 1985 को कट ऑफ डेट माना गया है.  जबकि झारखंडी जनता 1932 के खतियान को स्थानीयता का आधार बनाने की मांग करती रही है. राज्य बनने के 15 साल बाद आई  

‘हिंदी इंटरनेट पर बहुत अकेली है’

हिमोजी बनाने का विचार कैसे आया? हिंदी का अब जो सिलेबस है वो पहले की तरह नहीं है कि आपको सिर्फ मध्ययुगीन प्रेम आख्यान पढ़ाने हैं या सिर्फ तुलसीदास या आधुनिक कवि पढ़ाने हैं. हिंदी के सिलेबस में बहुत बदलाव आए हैं. इंटरनेट है, सोशल मीडिया है, ब्लॉगिंग है, वेब  

मराठवाड़ा : त्रासदी की तस्वीर

42 डिग्री सेल्सियस की तपा देने वाली धूप और भीषण गर्मी के बीच सधे हुए कदमों से अपने घर की ओर बढ़ती हुई 10 साल की अमृता मुजमुले इस बात का पूरा ध्यान रखे हुए है कि उसके सिर पर रखे हुए घड़े का पानी जरा भी न छलके. अमृता  

किसका झारखंड?

23 जुलाई, 2002 की बात है. पहली बार रांची पहुंचा था. काम के सिलसिले में जब अगली सुबह निकला तो देखा कि सड़कें वीरान होने लगीं. चारों ओर भय-दहशत का माहौल. तोड़फोड़-आगजनी का दौर शुरू हुआ. गाड़ियां बंद. जो जहां था वहीं छिपने की कोशिश करने लगा. एक-दूसरे के पास  

‘गुजराती समाज के सांप्रदायिकीकरण  की लंबी प्रक्रिया चलाई गई थी’

अपनी किताब  ‘गुजरात बिहाइंड द कर्टेन’  के बारे में बताइए? यह किताब 2015 में प्रकाशित हुई थी, लेकिन इसका लोकार्पण नहीं हो सका था. इसके लिए न तो प्रकाशक और न ही किसी और ने हिम्मत दिखाई क्योंकि लोगों को एक तरह का डर है. इस किताब में मूल रूप