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Volume 8, Issue 4 Back To Archive >

अगर तुम्हारी भारतमाता में मेरी मां शामिल नहीं तो भारतमाता का ये कॉन्सेप्ट मुझे मंजूर नहीं
वो तिरंगा झंडा जलाने वाले लोग हैं, वो सावरकर के चेले हैं जिन्होंने अंग्रेजों से माफी मांगी थी. ये वो लोग हैं. हरियाणा के...

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असंतुलन बढ़ाएगी स्मार्ट सिटी

जिस देश की 26 प्रतिशत यानी 31 करोड़ से ज्यादा की आबादी अनपढ़ हो, जिस देश में सात करोड़ से ज्यादा लोग बेघर हों, जिस देश के शहरों में नौ करोड़ से ज्यादा झुग्गी-झोपड़ी में रहते हों, जिस देश में सबसे ज्यादा भुखमरी हो और 20 करोड़ लोग रोज भूखे  

साइमन उरांव : जल, जंगल और जमीन का सर्जक

गणतंत्र दिवस के ठीक पहले की बात है. हर बार की तरह इस बार भी रस्मअदायगी अंदाज में पद्म सम्मानों को लेकर घमासानी वाकयुद्ध छिड़ा हुआ था. फलाना को क्यों मिला, फलाना पर नजर क्यों नहीं गई, फलाना तो सेटिंग-गेटिंग कर पद्म सम्मान लेने में सफल रहे. ऐसी ही बातें  

एसटीएफ जवान बड़े लोगों के सब्जी-दूध ढो रहे हैं

बिहार में अपराध को लेकर रोजाना बयानों की टकराहट हो रही है. अपराध घटा है, बढ़ा है, ऐसी बयानबाजी, बहस का एक मसला हो सकता है लेकिन ये सच है कि राज्य में अपराधियों का हौसला बढ़ा है. पुलिस दबाव में दिख रही है और इसका कारण राजनीतिक है. यह  

मेरा सुधार मां के जीवन की सबसे बड़ी चुनौती थी…

‘एैसेई मरता-मारता फिरता रै कर पूरा दिन. तुझै सरम तो बिल्कुल रई नाय. जब देखो तब कोई न कोई तेरी शिकायत ई लिए खड़ी रैवै है. मैं तो छक गई तुझसै. इससै तो अच्छा था पैदा होते ई तेरा टैंटवा दबा देती’ मां मुझे देखते ही ऐसे ही अक्सर चिल्लाया  

उम्मीद की डोर पर जिंदगी ‘कठपुतली’

ओ लड़ी लूमा रे लूमा, ओ लड़ी लूमा रे लूमा, लूमा झूमा लूमा झूमा, म्हारो गोरबंद नखरालो. किसी सांस्कृतिक मेले में इस तरह के राजस्थानी लोकगीत पर नाचती कठपुतलियां बरबस ही ध्यान खींच लेती हैं, पर मनोरंजन के साथ शिक्षा का माध्यम रहा कठपुतली का खेल आज अपनी पहचान बचाए रखने  

बिहार में अपराधियों की बहार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 12 फरवरी को राज्य में सुशासन की बहाली और कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बैठक खत्म कर उठने ही वाले होते हैं कि तभी भोजपुर इलाके से खबर आती है कि सोनवर्षा बाजार में विशेश्वर ओझा की हत्या कर दी गई. विशेश्वर  

मीठे गन्ने की कड़वी खेती

फिल्मों की कहानियां समाज की जमीनी सच्चाई से ही निकलती हैं. इसी तरह की एक सच्ची कहानी बागपत जिले के गांव ढिकाना की है. डॉक्टर अगर आपसे कहे कि आपकी बहन को कैंसर है और जल्द से जल्द ऑपरेशन करने की जरूरत है वरना हम कुछ नहीं कर पाएंगे. इस  

‘मैं वो नहीं जो दिखता हूं, मैं वो हूं जो लिखता हूं’

कश्मीर के बारामुला में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे मानव कौल का बचपन मध्य प्रदेश के होशंगाबाद शहर में बीता. 90 के दशक में घाटी में तेजी से पांव पसारते आतंकवाद की वजह से उनके परिवार को पलायन करके होशंगाबाद आना पड़ा. उनके पिता कश्मीर में इंजीनियर थे, जिन्हें समय  

आवारा भीड़ के खतरे : हरिशंकर परसाई

एक अंतरंग गोष्ठी सी हो रही थी युवा असंतोष पर. इलाहाबाद के लक्ष्मीकांत वर्मा ने बताया- पिछली दीपावली पर एक साड़ी की दुकान पर कांच के केस में सुंदर माॅडल खड़ी थी. एक युवक ने एकाएक पत्थर उठाकर उस पर दे मारा. कांच टूट गया. आसपास के लोगों ने पूछा  

मैं प्रो. सिरास से तो नहीं मिला, लेकिन मनोज बाजपेयी ने जिस तरह का रोल किया है उसे देख लगता है कि वे वैसे ही रहे होंगे : दीपू

प्रो. सिरास की जिंदगी पर आधारित फिल्म ‘अलीगढ़’ रिलीज होने वाली है. क्या फिल्म बनाने का विचार आपका था? प्रो. सिरास पर फिल्म बनाने का विचार मेरा नहीं था. हम पत्रकार लोग तो ये सब देखते रहते हैं. हम लोग सिर्फ स्टोरी लिखते हैं और भूल जाते हैं. 2013-14 में