‘मुझे उस छोटे से शहर से प्यार है, जहां से मैं हूं’

नए लोग जो इस क्षेत्र में आना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सलाह देना चाहेंगी?
देखिए मैंने अपनी राह खुद बनाई क्योंकि मैं इस बात को लेकर स्पष्ट थी कि मुझे सिर्फ दिल की बात सुननी है और किसी की सलाह मानकर आगे नहीं बढ़ना. तो जब मैंने किसी दूसरे की सलाह नहीं मानी तो किसी और को कैसे अपने को फॉलो करने को कहूं. यह तो गलत होगा. हर किसी की जिंदगी के अलग अनुभव होते हैं और उन्हें उसी तरह, उसी आधार पर अपने लिए उद्देश्य तय करने पड़ते हैं. हां, मगर इतना जरूर कहूंगी कि सोच कर आएं कि कोई काम छोटा नहीं होता. बड़ा ब्रेक शुरुआत में ही मिल जाए जरूरी नहीं. कुछ न कुछ करते रहना चाहिए. और हमेशा सीखने की प्रक्रिया में विश्वास रखें.

नाकामयाबी का मुकाबला कैसे किया?
मैं यह नहीं कहूंगी कि मैं बाकी लोगों की तरह डिप्रेशन में नहीं गई. मुझे चिंता नहीं हो रही थी कि आगे मेरा क्या होगा. एक दौर में मेरे पास सिर्फ चरित्र भूमिकावाले किरदार करने के ऑफर आ रहे थे. या फिर ऐसी फिल्में जिसमें मुझे सिर्फ नाममात्र के लिए रखा गया है. कई सह-कलाकार तो मेरा मजाक भी उड़ाते थे. मैं नाम नहीं लूंगी. फब्तियां कसते थे. कई लोगों ने कहा कि मेरे पैकअप का टाइम आ गया है. अब मुझे बैग पैक कर चले जाना चाहिए. लेकिन मैंने उस वक्त भी मन में ये बात रखी थी कि वापस नहीं जाऊंगी. चाहे जो हो जाए. फिर मुझे ‘तनु वेड्स मनु’ जैसी फिल्म मिली और मैं वापस से ट्रैक पर आ गई. इसके बाद तो मुझे केंद्रीय भूमिकावाले किरदार निभाने का मौका मिलने लगा. भले ही ‘रज्जो’ और ‘रिवॉल्वर रानी’ बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलीं, लेकिन मेरे दिल के बेहद करीब हैं ये फिल्में.

तीनों खान अभिनेताओं के साथ काम करने का कोई इरादा?
ऐसा नहीं है कि मानकर बैठी हूं कि उनके साथ फिल्में नहीं करनी. लेकिन मुझे अपने लिए मजबूत किरदारों वाली भूमिका ही चाहिए. अब पीछे मुड़कर नहीं देखूंगी. काफी संघर्ष कर लिया है. अब जो समय आया है, उसमें मुझे अच्छी और बेहतरीन फिल्में करनी हैं. ‘क्वीन’ से लोगों ने मुझमें जो विश्वास जगाया है, उससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया है. मुझे दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरना है.

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