‘हमने चुनाव में जनता से किए गए हर वादे को पूरा किया है’

लखनऊ मेट्रो रेल, लखनऊ के बाहर सीजी (चक गंजारिया) सिटी योजना, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और कैंसर अस्पताल हमारी सरकार के दौरान शुरू हुई कुछ ऐसी योजनाएं हैं जिन्हें लोग लंबे समय तक याद रखेंगे.

आपने शुरुआत में शिक्षा और महिलाओं की शिक्षा का जिक्र किया. हमने देखा कि सरकार ने बालिकाओं के लिए चलाई जा रही कुछ योजनाओं को बंद कर दिया था ऐसा क्यों करना पड़ा. बालिकाओं की शिक्षा को लेकर आगे की योजना क्या है?

सरकार इस बात में यकीन करती है कि किसी भी समाज या राज्य की सफलता, समृद्धि और विकास की कुंजी उसकी शिक्षा में है. शिक्षा के बिना हम विकास के लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकते. चाहे वह एक इकाई का हो या फिर पूरे समाज का. सत्ता में आने के बाद मेरी सरकार ने लड़कियों की उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए ‘कन्या विद्या धन योजना’ को पुनर्जीवित किया है. इसके अलावा ‘हमारी बेटी, उसका कल’ और ‘पढ़ें बेटियां, बढ़ें बेटियां’ जैसी योजनाएं लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थीं. वित्त वर्ष 2015-16 में कन्या विद्या धन योजना के तहत 300 करोड़ रुपये की राशि सुनिश्चित की गई है. साथ ही कॉलेजों में लड़कियों के हॉस्टल के लिए 244 करोड़ रुपये की व्यवस्था भी सरकार ने की है. छात्र-छात्राओं को अच्छी शिक्षा दिलवाना सरकार के सबसे महत्वपूर्ण एजेंडे में है.

आपने छात्र-छात्राओं को लैपटॉप देना शुरू किया था, बाद में वह योजना बंद हो गई. क्या इससे आपके शिक्षा के उद्देश्य पूरे हुए?

हां, यह उत्तर प्रदेश में ही नहीं देश-भर की सबसे सफल और प्रसिद्ध योजनाओं में से एक रही. सरकार ने इस बात का ध्यान रखा कि बिना किसी भेदभाव के 15 लाख लैपटॉप छात्र-छात्राओं को मिल सके. मुफ्त में लैपटॉप देने से ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े छात्र-छात्राओं को अपना भविष्य बेहतर बनाने का अवसर मिला है. इससे न सिर्फ उनका आत्मविश्वास बढ़ा बल्कि तकनीक के प्रति उनका डर भी खत्म हुआ है. आप उत्तर प्रदेश के किसी भी गांव में जाकर यह देख सकते हैं कि इस योजना ने छात्र-छात्राओं में कितने सकारात्मक बदलाव किए हैं. इसने उनका जीवन बदल दिया है. यह योजना डिजिटल विभाजन को पाटने के काम में सफल रही. अब उनके लिए अनंत संभावनाएं हैं. आप उनके चेहरे पर खुशी देख सकते हैं. जानकारी के लिए मैं बता दूं कि यह योजना बंद नहीं हुई है. हमारी सरकार मेधावी छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क लैपटॉप दे रही है.

किसी भी सरकार के लिए ग्रामीण इलाकों में शौचालय बनवाना चुनौतीपूर्ण रहा है. उत्तर प्रदेश सरकार इस चुनौती से कैसे निपट रही है?

आपकी बात से हम सहमत हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय बनवाने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं. शौचालय बनाने की सीमा 10 से बढ़ाकर 12 हजार रुपए कर दी गई है. वर्ष 2015-16 के बजट में इसके लिए हमने 1,533 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. इसी तरह, ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय के साथ बाथरूम बनवाने की पायलट परियोजना के लिए 16 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. मैं विश्वास दिलाता हूं कि मेरी सरकार इस समस्या से निपटने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी. हमारा नारा है ‘साफ और हरित उत्तर प्रदेश’.

आपने हाल ही में कई इंवेस्टर्स मीट का आयोजन किया है. ये प्रयास किस हद तक सफल हुए हैं? क्या इससे प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा?

उत्तर प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए मैंने कई स्तरों पर प्रयास किया है. इस रणनीति के तहत हमने आगरा में इंवेस्टर्स मीट और नई दिल्ली में उत्तर प्रदेश इंवेस्टर्स कॉन्क्लेव कराया. दिल्ली में हुए आयोजन में 54 हजार करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं. इसके अलावा सरकार बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है, क्योंकि बिना इसके राज्य में उद्योग पनप नहीं सकते. इसके अलावा राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी सुविधाओं की भी जरूरत है. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे जैसी महत्वपूर्ण परियोजना जल्द ही साकार रूप ले लेगी. 15 हजार करोड़ रुपये की इस योजना से आगरा और लखनऊ के बीच सफर का समय काफी कम हो जाएगा. यह योजना एक्सप्रेस-वे के साथ उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देगी. इसलिए आनेवाले वर्षों में रोजगार के कई सारे अवसर उपलब्ध होंगे. इसके अलावा बेहतर कनेक्टिविटी के लिए सभी जिला मुख्यालयों को चार लेन की सड़क से जोड़ा जा रहा है. लखनऊ में एक आईटी सिटी विकसित की जा रही है, जो प्रदेश की राजधानी को एक आदर्श आईटी हब के रूप में बदल देगा. इससे रोजगार के तमाम अवसर मुहैया होंगे क्योंकि राज्य में उद्यमी अपने आईटी उद्यम लगाएंगे. वास्तव में एचसीएल, इंफोसिस और अमूल ने पहले से ही यहां निवेश कर रखा है. इसके अलावा टाइम्स ग्रुप 600 करोड़ रुपये के निवेश के साथ ग्रेटर नोएडा में एक विश्वविद्यालय स्थापित कर रहा है.

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