भारत का इजरायल प्रेम!

एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या आयरन डोम से भारतीय आकाश को सुरक्षित किया जा सकता है. इजरायल में इस प्रणाली से सिर्फ 20,770 वर्ग किमी की सुरक्षा की जाती है. इस भौगोलिक क्षेत्र को भी मोटे तौर पर चार भागों में विभाजित किया जा सकता है. इसकी तुलना भारत से करें तो इस प्रणाली के हवाले 3,28,7590 वर्ग किमी क्षेत्र होगा यानी इजरायल से 158 गुना ज्यादा. दुनिया में जितने मौसम हो सकते हैं उन सबके बीच इस प्रणाली को काम करना पड़ेगा.

आयरन डोम प्रणाली मुख्य रूप से रॉकेट लॉन्चर वाले वाहनों पर आधारित है. इन्हें जरूरत के हिसाब से कुछ किमी की दूरी पर तुरंत भेजा जा सकता है. इनके जरिए कम दूरी (5-70 किमी) से दागे गए रॉकेटों को भेदा जा सकता है. सुरक्षा तंत्र को सेटेलाइट से हमलावर रॉकेट या मिसाइल का पता चलता है और उसके बाद तुरंत ही ये उस पर सटीक निशाने के लिए तय जगह पर पहुंच जाते हैं. इजरायल के किसी भी पड़ोसी देश के पास इतनी उन्नत प्रणाली नहीं है. वहां के सूत्र बताते हैं कि भारत का अति विविध मौसम तो इजरायल के लिए चुनौती है ही, साथ ही इस प्रणाली की तैनाती पाकिस्तान के खिलाफ होगी जो खुद सैटेलाइट तकनीक से संपन्न है.

आयरन डोम का उन्नत संस्करण एक सपना है- भारत के लिए एक रणनीतिक सपना तो इजरायल के लिए आर्थिक तंगी से उबरने का सपना.

इसके अलावा छोटे हथियारों की खरीद में भी भारत-इजरायल की निकटता बढ़ी है. 2013 की शुरुआत में भारत सरकार ने घोषणा की थी कि वह उस साल तकरीबन 7-8 अरब डॉलर छोटे हथियारों के आयात और देश में ही उनके निर्माण के लिए खर्च करेगा. इसी के तहत भारतीय सेना ने तकरीबन 2372 टवोर टीएआर-21 गन खरीदी थीं. ये गन इजरायल की आईएमआई कंपनी बनाती है. इससे पहले भारतीय नौ सेना के विशेष दस्ते ‘मारकोस’ के लिए ऐसी ही 500 गन दिसंबर, 2010 में खरीदी गई थीं. 2011 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल को 12,000 एक्स 95/माइक्रो टवोर गन दी गई थीं.

भारत पहले भी इजरायल से ड्रोन आयात कर चुका है लेकिन इतनी संख्या में नहीं जिसकी संभावना अब व्यक्त की जा रही है

तहलका को यह भी जानकारी मिली है कि भारत सरकार मध्य प्रदेश और पुणे में ऐसी जगह तलाश रही है जहां ऊजी गनों की निर्माण इकाई लगाई जा सके. ऊजी को भी आईएमआई बनाती है. इजरायल सहित दुनिया के कई देशों में सेना इस गन का इस्तेमाल करती है. भारतीय सेना के तकरीबन 11.3 लाख जवानों, अर्ध सैन्य बलों के एक लाख 13 हजार और रिजर्व बलों के 11.5 लाख जवानों में हो सकता है सभी को ऊजी न दी जाए लेकिन यदि इनकी संयुक्त संख्या के तीसरे हिस्से को भी इस हथियार की जरूरत हुई तो इजरायल के लिए यह खजाना पूरा भर जाने जैसा सौदा होगा.

इजरायल ने भारत के माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में भी मदद का प्रस्ताव सरकार को दिया है. इसके तहत इन क्षेत्रों के लिए अर्द्ध स्वचालित ड्रोन दिए जा सकते हैं. सूत्र बताते हैं कि भारत सरकार ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाया है और हो सकता है दो-तीन सालों के भीतर ऐसे तकरीबन 100 ड्रोनों का आयात कर लिया जाए. हालांकि भारत पहले भी इजरायल से ड्रोन आयात कर चुका है लेकिन इतनी संख्या में नहीं जिसकी संभावना अब व्यक्त की जा रही है. दिसंबर, 2013 में रक्षा मामलों की कैबिनेट कमिटी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में 15 हेरॉन ड्रोनों की खरीद को मंजूरी दी थी. इनकी कीमत 30 करोड़ डॉलर थी.

रक्षा संबंधों के अलावा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार का इजरायल की तरफ झुकाव की अपनी भी वजहें हैं. गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी के संबंध इजरायल से काफी गर्मजोशी भरे थे. उन्होंने राज्य में जल नवीनीकरण और सिंचाई की ड्रिप तकनीक पर इजरायल के सहयोग को काफी समर्थन दिया था. मोदी सरकार के सत्ता में आने के चालीस दिन पहले सुषमा स्वराज ने दोहराया था कि इजरायल भारत का ‘भरोसेमंद सहयोगी’ है. वे अप्रैल में भारत-इजरायल संसदीय मैत्री समूह के प्रमुख के रूप में इजरायल की तीन दिन की यात्रा पर थीं. तब कांग्रेस ने भी स्वराज का समर्थन किया था. जाहिर है जब दोनों मुख्य दलों का रवैय्या एक जैसा हो तो भविष्य में भारत के इस नीति से पलटने की संभावना और कम ही होगी.

1 COMMENT

  1. dukh hota hai ye soch ker ki hum taqniki roop me itne piche hain. hum itna paisa dusre deshon ko fizool derahe hain. Jo desh sabse safal mangalyaan bana sakta hai Jo desh cryogenic engine bana sakta hai wo desh desh ki raksha ke liye unnat hathiyaar kyun nahi bana sakta. Ek taraf hum Kaale dhan ko desh me laane ki baat kerte hain or dusri taraf Bharat ki mahnat ki kamaai dusre deshon me khud bhej rahe hain, Bharat ki sarkaar se Ek bhartiya yuvak hone ke naatey sarkaar se guzarish hai ki Hume tavazzo den,,

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here