ह्त्याग्रही गांधी!

हमारे साथ बातचीत में कई अन्य गवाहों की तरह ही शारिक भी तहलका को बताते हैं कि गवाहों को मुकरवाने में पीलीभीत के वर्तमान पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमित वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. वे बताते हैं, ‘मुझे प्रशासन से बार-बार फोन आ रहे थे. खुद एसपी के पीआरओ ने फ़ोन करके गवाही देने के लिए कहा.’ अन्य गवाहों के बारे में भी वे बताते हैं कि जो आम जनता के बीच के गवाह थे उन सबको गवाही से दो-तीन दिन पहले थानों में उठवा लिया गया था. एसपी अमित वर्मा द्वारा गवाहों से डील किए जाने के बारे में वे कहते हैं, ‘देखिए आरवी सिंह (रामवीर सिंह) तब खुले …जब एसपी ने बातचीत करी.’

शारिक ने इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण लोगों के बारे में हमें और भी बहुत कुछ बताया. हालांकि ऊपर लिखी बात की तरह हम उनकी इन बातों को भी अलग से सत्यापित नहीं कर सके, मगर उन्होंने जो बातें हमें बताईं वही हमें इस मामले से जुड़े अन्य लोगों से भी मालूम हुईं. शारिक का कहना था, ‘सरकारी वकील पहले ही बता चुके थे एमपी वर्मा कि शारिक भाई सब कुछ खत्म है. हम समझ गए थे सब कुछ ऊपर से मैनेज हो रहा है.’

शारिक हमारे खुफिया कैमरे पर यह भी बताते हैं कि इस मामले में सरकारी वकील और न्यायपालिका तक को उपकृत किया गया. चूंकि हमारे पास इसे सत्यापित करने का कोई और जरिया नहीं था, इसलिए हम इसके बारे में बिल्कुल उतना और वैसा नहीं लिख रहे हैं जितना और जैसा हमें शारिक ने बताया था. मगर कुछ-कुछ ऐसा ही हमें मोहम्मद यामीन ने भी बताया था. उनका कहना था, ‘दरोगा हमें बता रिया था कि जज भी हमने सेट कर लिया है, सरकारी वकील भी सेट कर लिया है, सरकार भी हमारे साथ है, कप्तान भी हमारे साथ है.’ शारिक ने अपने साथी पत्रकार मोहम्मद तारिक और रामवीर सिंह को बयान बदलने के लिए पैसे और कार दिए जाने की जो बातें हमें बताई थीं उनका जिक्र हम पहले भी कर चुके हैं.

ये बातें तब और परेशान करने लगती हैं जब उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और पीलीभीत से विधायक रियाज अहमद भी कुछ-कुछ ऐसी ही बातें हमें बताते हैं.

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तहलका : हम लोगों ने देखा तो लगा कि ये एक तरह से ओपेन ऐंड शट केस है. जिस तरह से वीडियो आया था. आप लोग तो खैर नजदीक से देख रहे थे.
रियाज : मैं तो उम्मीदवार था ना.
तहलका : आप तो उम्मीदवार ही थे. तो ये समझ में नहीं आया कि वो बरी कैसे हो गए.
रियाज : देखिए, मैं ये ऐसे कह रहा हूं.
तहलका : बताएं.
रियाज : देखिए, उसमें एक तो गवाह उसके लोग थे. एक तो गवाह उनके लोग थे नंबर एक. दूसरे उसने उनको सबको ऑब्लाइज किया. किसी को दस लाख रुपया दिए, किसी को पांच लाख दिया, किसी ने ग्यारह लाख लिया, किसी ने बड़ी गाड़ी ली, किसी ने कुछ लिया किसी ने कुछ लिया.
तहलका : गवाहों ने?
रियाज : गवाहों ने… और यहां तक कि जुडीशरी तक को ऑब्लाइज किया… बड़े पैमाने पर.
तहलका : पीलीभीत कोर्ट को?
रियाज : (इशारे में हां)
तहलका : प्रशासन भी इसमें शामिल था?
रियाज : जी प्रशासन को भी ऑब्लाइज किया.

 परमेश्वरी दयाल गंगवार (भाजपा जिला उपाध्यक्ष -पीलीभीत)

पीलीभीत में मामले की पड़ताल करते वक्त हमारा सामना बार-बार परमेश्वरी दयाल गंगवार के नाम से हुआ. परमेश्वरी दयाल पीलीभीत में भाजपा के जिला उपाध्यक्ष हैं. बरखेड़ा से कुछ दूरी पर स्थित गांव दड़िया भगत के रहने वाले परमेश्वरी कुछ साल पहले ग्राम प्रधान थे (यहीं के रहने वाले रामऔतार ने हमें बताया था कि वरुण ने दड़िया भगत में भी भड़काऊ भाषण दिया था). शायद इसीलिए इस पूरे क्षेत्र में उन्हें आज भी परमेश्वरी ‘परधान’ के नाम से जाना जाता है. परमेश्वरी ‘परधान’ की वरुण गांधी से नजदीकियों के बारे में हम कई लोगों से सुन चुके थे और पीलीभीत में हमें भाजपा के कई ऐसे होर्डिंग भी दिखाई दिए जिनमें वरुण गांधी के साथ प्रमुखता से गंगवार का भी चित्र लगा हुआ था. हमने उनसे मिलने का फैसला किया. कई सालों से गांधी परिवार की विरासत रहे पीलीभीत संसदीय क्षेत्र के इस गांव तक पहुंचने के लिए आम आदमी के पास आज भी बैलगाड़ी ही एकमात्र साधन है. बैलगाड़ी से उतरकर हम जब परमेश्वरी परधान के घर पहुंचते हैं तो घर के बाहर ही हमारे बिना कुछ बोले ही उनके घर का एक सदस्य हमसे पूछता है, ‘गांधी जी के यहां से आए हैं?’ परमेश्वरी दयाल हमें घर पर नहीं मिलते. फिर यही रिश्तेदार हमें वापस बरखेड़ा लेकर जाता है. यहां एक गन्ने के जूस की दुकान के पास हमें परमेश्वरी मिलते हैं. दबंग प्रवृति के परमेश्वरी सामने से गुजरने वाले एक गन्ने के ट्रैक्टर को रुकवाते हैं और उसमें से कुछ गन्ने के गट्ठे उतरवा लेते हैं. परिचय के बाद हम उनसे बात शुरू करते हैं. कुछ देर इधर-उधर की बात के बाद परमेश्वरी हमें वे सारी बातें एकसाथ बताते हैं जो हमने अलग-अलग गवाहों से सुनी हैं. परमेश्वरी शुरुआत करते हुए ही बताते हैं कि उन्होंने ही बरखेड़ा वाली मीटिंग आयोजित करने के सारे इंतजाम किए थे और वे ही उस मीटिंग के प्रभारी भी थे. वे हमें यह भी बताते हैं कि उस मीटिंग में साधुओं को जो पैसे बांटे गए थे उसे बांटने वाले भी वे ही थे. उस समय समाचार चैनलों पर वरुण की सभा में पैसे बांटने और चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने की खबरें भी आई थीं और जाहिर है परमेश्वरी उसी का जिक्र कर रहे थे.

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बातचीत के क्रम में परमेश्वरी ने हमारे खुफिया कैमरे पर यह स्वीकार किया कि वरुण के जो भाषण टीवी पर दिखाए गए थे वरुण ने वास्तव में वही सब कहा था. हम उनसे पूछते हैं कि क्या बोल गए थे वरुण गांधी तो वे जवाब देते हैं, ‘बोल तो ये गए थे कि मुसलमान मजहब का कोई भी व्यक्ति अगर हिंदू की तरफ हाथ उठाता है तो हाथ काट दो, सर उठता है तो सर काट दो. और सबसे ज्यादा बीमारी बीसलपुर में है, वहां एक पहले फैक्ट्री खरीदूंगा, पेट्रोल पंप…वो तेल की…फिर स्प्रे करवाऊंगा…उससे ..हेलीकाप्टर से … फिर आग लगवाऊंगा हिंदुओं से …बस्ती खाली करवा के रहूंगा 24 घंटे में.’ बीसलपुर पीलीभीत का एक मुस्लिमबहुल क्षेत्र है और यहां जिस बीमारी की बात परमेश्वरी कर रहे हैं उसका मतलब मुस्लिम समुदाय के लोगों से ही है. वरुण अपनी कई सभाओं में मुसलमानों को बीमारी बता चुके थे. इस मामले में दर्ज की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट में भी यह लिखा गया था कि वरुण ने अपने भाषण में कहा है, ‘मुस्लिम एक बीमारी है. चुनाव के बाद खत्म हो जाएगी.’

जैसा कि हम इस स्टोरी में पहले देख ही चुके हैं, आगे बातचीत में भाजपा जिला उपाध्यक्ष हमें यह बताते हैं कि इस मामले में वरुण गांधी को बचाने में सपा सरकार की भी भूमिका रही है और कैसे सपा सरकार में मंत्री रियाज अहमद को ही मुस्लिम गवाहों को तोड़ने का काम सौंपा गया था.

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