‘साई’ पर संसद

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साई को अवतार मानने पर सबसे पहले बहस शंकराचार्य स्वरूपानंद ने ही शुरू की थी और उनके द्वारा बुलाई गई इस धर्म संसद में पहुंचे 13 अखाड़ा प्रमुखों ने भी उनकी बात का समर्थन किया है. निरंजनी अखाड़ा के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी का कहना है, ‘जब धर्म पर संकट आता है तब धर्म संसद का आयोजन किया जाता है. यह 19वीं धर्म संसद थी. फकीर को भगवान मानना पूरी तरह से गलत है. शंकराचार्य इसी बात का तो विरोध कर रहे हैं.’ पंचायती जूना अखाड़ा हरिद्वार के प्रमुख संत हरिगिरि का कहते हैं, ‘हिंदू सनातन धर्म की सुदृढ़ धार्मिक परंपराओं से कुछ लोग अंजान हैं. वेदों और शास्त्रों में सप्रमाण वर्णित व्यक्ति ही भगवान है. इसी प्रामाणिकता के आधार पर हिंदू धर्म में पूजा करने की परंपरा है. लाखों हिंदू भटकर साई की पूजा करने लगे हैं. उन्हें समझा बुझाकर सही राह पर लाया जाएगा. साई ट्रस्ट का नाम लिए बगैर स्वामी हरिगिरि ने कहा कि आपको व्यवसाय करना है तो करिए. हिंदूओं को भ्रमित मत करिए. लोगों को समझाने का काम शंकराचार्य और संतों का है. हमने अपना काम कर दिया है. धीरे-धीरे लोग भी इसे मानेंगे.’

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कबीरधाम के एक मंदिर में स्थापित हनुमान व साई बाबा की मूर्ति. फोटो: प्रतीक चौहान

हिंदू साधु-संतों को इस बात पर घोर आपत्ति है कि करीब दशक-भर पहले तक साई के आगे बाबा शब्द लगाया जाता था लेकिन अब उन्हें साई राम के रूप में स्थापित किया जा रहा है. पहले लोग ओम सीताराम का जाप किया करते थे अब ओम साई राम का प्रचार कर रहे हैं. साधु-संतों का आरोप है कि साई भक्त सनातन धर्म के प्रतीकों का इस्तेमाल करके साई को प्रतिष्ठित और धार्मिक लोगों को बरगलाने का काम कर रहे हैं. वे इसके पक्ष में यह तर्क भी देते हैं कि पहले लोग गुरुवार को भगवान विष्णु का व्रत रखते थे लेकिन उस व्रत की जगह साई के व्रत ने ले ली है.

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शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने धर्म संसद के दौरान साई को असत्य, अचेतन और अयोग्य करार दिया है. साई संस्थान से किसी भी प्रतिनिधि के धर्म संसद में नहीं पहुंचने के सवाल पर शंकराचार्य कहते हैं, ‘वे लोग विज्ञापन जारी करते हैं लेकिन धर्म संसद में पहुंचकर विमर्श करने को तैयार नहीं है. जब वे जवाब देने को तैयार नहीं हैं तो उनको जिम्मेदारी लेनी होगी कि धर्म संसद में जो निर्णय हो, उसे वे मानेंगे.’ शंकराचार्य ने साई के अवतार के बारे में प्रमाण मांगते हुए कहा कि सनातन धर्म में शिव, गणेश, विष्णु और सूर्य या उनके अवतारों की पूजा होती है  ऐसे में साई भक्त स्पष्ट करें कि साई किनके अवतार हैं. वहीं कई साई भक्त धर्म संसद को जबर्दस्ती का नाटक बता रहे हैं. छत्तीसगढ़ के ही एक साई भक्त संजय साई धर्म संसद पर आरोप लगाते हैं, ‘साई ट्रस्ट साधु-संतों को शिरडी बुलाकर साई बाबा की पूजा

संबंधित सारी बातें स्पष्ट कर चुका है. इसके बावजूद भी धर्म संसद का आयोजन किया जाना पाखंड की पराकाष्ठा है.’  संजय यह भी बताते हैं कि कवर्धा में धर्म संसद के मंच पर जिस तरह एक साई भक्त के साथ बदसलूकी की गई इसकी उन्हें आशंका थी इसलिए शिरडी साई संस्थान से कोई प्रतिनिधि धर्म संसद में नहीं पहुंचा. हालांकि साईं ट्रस्ट शिरडी ने इस आयोजन से पर कोई टिप्पणी नहीं की है. ट्रस्ट के जनसपंर्क अधिकारी मोहन यादव का कहना है, ‘हम धर्म संसद के फैसले पर कोई टिप्पणी या प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते.’

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3 COMMENTS

  1. साईं बाबा भगवान हैं या नहीं..सनातन धर्म के स्वयं भू संतों को यदि इस पर धर्म संसद का आयोजन करने की जरुरत आन पड़ी है तो क्या यही यह साबित करने के लिए काफी नहीं है कि इनकी दुकाने मंदी चल रही हैं….!

  2. sai baba sant the , unke sthan par jaane se logo kee samasyaye hal hotee hai. Unhe sant/ BABA hi kahana theek hai. Unhe bhagwan ka awtar na kahen.

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