‘मामला आगे बढ़ाया तो ग्रीनपीस को एक वालंटियर कम होने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा’

    ऐसे अनुभवों को बताने में झिझक हमेशा ही रहती है, मेरे साथ भी यही हुआ. कुछ महीनों बाद मैंने एचआर मैनेजर को ईमेल के जरिये इन सब के बारे में बताया और यौन प्रताड़ना की शिकायत दर्ज करवाई. शुरुआत में मेरी शिकायत को लेकर उनका रवैया ठीक था पर दिन बीतने पर मुझे लगा वो जानबूझकर इसे बिना कोई फैसला दिए खींच रहे हैं. और फिर उनके निर्णय से ये पता चल गया कि ऐसी शिकायतों के प्रति प्रबंधन कितना लचर है! उन्होंने कहा कि वो मानता है कि वो दोषी है. वो अपने किए पर शर्मिंदा है और ऐसा सोचा गया है उसे साल भर के लिए बैन किया जाएगा और उसके बाद वो फिर जॉइन कर सकता है. साथ ही वो मुझसे लिखित में माफी मांगेगा. मैंने उनसे साफ कहा कि मैं इस फैसले से खुश नहीं हूं, उसे ग्रीनपीस से निकालना चाहिए. इस पर एचआर मैनेजर परवीन में मुझसे कहा कि हमें मानव स्वभाव को समझते हुए उसे एक मौका और देना चाहिए. अगर वो कह रहा है कि आगे कभी ऐसा नहीं करेगा तो उसे इस बात को साबित करने का मौका तो देना चाहिए. क्या ये सेक्सुअल हरासमेंट के मसलों से निपटने का तरीका है? ये बहुत दुखद है. मैं निराश हो गई थी फिर भी मैंने वालंटियर को-ऑर्डिनेटर अली से इस बारे में बात की. उन्होंने मुझसे कहा कि अगर मैंने इस मामले को और आगे बढ़ाया तो मुश्किल हो जाएगी. ग्रीनपीस को एक वालंटियर (मेरे रूप में) कम हो जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

    सुमन

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here