‘शासन करने की बेहतर क्षमता का लिंग से क्या संबंध’

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मतलब क्या कुछ खास अच्छा नहीं रहा?

कई चीजें हैं. सबसे पहली बात तो ये कि मुझे जनता का अपार स्नेह मिला. लेकिन पार्टियों से मेरी नाराजगी है. उन्होंने कभी सहयोग नहीं किया. करेंगे भी कैसे कांग्रेस का काम किन्नरों का इस्तेमाल करना है और भाजपा का उनका अपमान करना.

साथी विधायकों का व्यवहार कैसा रहा?

एक किन्नर की जीत को पचा पाने की मर्दानगी बहुत कम लोगों में होती है. बड़ी संख्या में सदन और उसके बाहर ऐसे लोग थे जो एक अलग भावना से मुझे देखते थे. साथी विधायकों का जो सर्मथन मुझे मिलना चहिए था वो मुझे नहीं मिला. वो इस बात को समझ नहीं पाए कि जनता ने जिस तरह उन्हें सदन में भेजा है वैसे ही मुझे भी चुनकर वहां पहुंचाया है और शासन करने की क्षमता का लिंग से क्या संबंध है. अगर हमारा दिमाग तुमसे बेहतर सोच सकता है तो फिर हम क्यों राजनीति न करें? कुछ लोग मेरे विधायक बनने से कितना नाराज थे, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि उन्होंने मुझ पर दो बार जानलेवा हमला तक कराया.

मेरी बात अभी आपको भले ही अतिश्योक्ति लगे लेकिन देखिएगा अगर नेताओं ने अपना चाल चलन ऐसा ही रखा तो एक दिन इस देश में किन्नर राज करेगा

आज किन्नरों के बीच से एक ऐसा समुदाय उभर रहा है जो पारंपरिक काम छोड़कर मुख्यधारा के काम कर रहा है. इस बदलाव को किस रूप में देखती हैं?

आज किन्नर समाज अपनी पहचान को दोबारा परिभाषित करने की कोशिश कर रहा है. वो अपनी पुरानी छवि से बाहर आना चाहता है. कुछ करना चाहता है. मुख्यधारा में शामिल होना चाहता है. यह एक सकारात्मक परिवर्तन है. हालांकि यह धीरे-धीरे ही होगा लेकिन एक सुखद और ऐतिहासिक शुरुआत हो चुकी है. सबसे बड़ी बात इसमें ये है कि समाज भी धीमी गति से ही सही लेकिन इस बदलाव में किन्नरों का सहयोग कर रहा है.

आप देश की पहली किन्नर विधायक रही हैं. कैसा लगता है?

अच्छा लगता है कि मैंने बदलाव की दिशा में जो कदम रखा उस तरफ बड़ी संख्या में किन्नर जा रहे हैं. मध्य प्रदेश तो किन्नर सशक्तिकरण के गढ़ के रूप में उभर रहा है.

किन्नरों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने और उनकी जिंदगी बेहतर बनाने के लिए सरकार को क्या करना चाहिए?

देखिए, सरकार से मुझे कोई बड़ी उम्मीद नहीं है. सरकार ने आज तक किया क्या है. जब मैं विधायक थी उस दौरान केंद्र सरकार को हमने एक ज्ञापन दिया था, जिसमें हमने समाज से जुड़ी हुई विभिन्न मांगों को तत्कालीन सरकार के सामने रखा था लेकिन आज तक उन लोगों का जवाब नहीं आया. सरकार किन्नर समाज को लेकर जरा भी संवेदनशील नहीं है. सरकार के पास क्या पैसे की कमी है. किन्नर समाज को छोड़िए आम जनता इन सरकारों से नाराज बैठी है. चुनाव में जनता के सामने गिड़गिड़ा कर वोट मांगते हैं और जब जनता वोट देकर जिता देती है तो शेर बन जाते हैं. हम लोगों पर ताना कसते हुए कहते हैं कि अब किन्नर शासन चलाएंगे. हम उन से पूछते हैं कि तुम कौन-सा शासन चला रहे हो. लोगों को मूर्ख बनाने के सिवा और क्या कर रहे हैं ये आजकल के नेता. मेरी बात अभी आपको भले ही अतिश्योक्ति लगे लेकिन देखिएगा अगर नेताओं ने अपना चाल चलन ऐसा ही रखा तो एक दिन इस देश में किन्नर राज करेगा.

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