नीदरलैंड्स

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विश्व रैंकिंग: 15
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन : 1974,1978 और 2010 में उपविजेता

खास बात
डच कोच लुइस गाल ने क्वालीफाइंग दौर में 4-3-3 (पिछली पंक्ति 4 खिलाड़ी, मध्य में 3 और अग्रिम पंक्ति में भी 3 खिलाड़ी) वाली रणनीति को बखूबी इस्तेमाल किया था. लेकिन मिडफील्डर केविन स्ट्रूटमैन के चोटिल होने ने उनकी इस रणनीति को अनुपयोगी बना दिया है. अब उनके द्वारा 5-3-2 की रणनीति अपनाने से रोबिन पर्सी और अर्जेन रॉब्बेन को बेहतर प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा

दक्षिण अफ्रीका में हुए पिछले विश्व कप फाइनल में नीदरलैंड्स ने स्पेन को अंतिम समय तक कड़ी चुनौती दी थी. लेकिन अतिरिक्त समय में आंद्रेस इनिएस्ता द्वारा किए गए गोल के कारण नीदरलैंड्स 1-0 से हार गया. इस साल नीदरलैंड्स के लिए मुश्किलें अधिक हैं. विद्रोहों और असंतोष के बावजूद भी पूर्व की डच टीमें हमेशा साहसी प्रतिभाओं से भरी रही हैं. आखिरकार उन्होंने ही ‘टोटल फुटबॉल’ का आविष्कार किया था. लेकिन वर्तमान टीम बहुत ही कमजोर नजर आ रही है. चोटिल होने के कारण न तो मिडफील्ड पर केविन स्ट्रूटमैन का जोश पहले जैसा है और न ही राफेल वेन डर वार्ट की आक्रामक गति पहले की तरह है. कागजों पर रोबिन वैन पर्सी, वीजले स्निजडर और  अर्जेन रॉब्बेन की आक्रामक तिकड़ी जरूर घातक नजर आती है. लेकिन 2010 में प्रसिद्ध रहे स्निजडर अब अपनी राह से भटक गए हैं. वैन पर्सी भी बीते समय में मेनचेस्टर यूनाइटेड में चोटिल हुए. ऐसे में बेयर्न म्यूनिख क्लब के खिलाड़ी रॉब्बेन की कारगर फुर्ती ही टीम की सबसे बड़ी ताकत है. लेकिन क्या सिर्फ इसके भरोसे ही नीदरलैंड्स उस ग्रुप में टिक सकता है जहां स्पेन जैसे काबिल दुश्मन और चिली जैसे प्रतिभावान टीमें भी मौजूद हों? इन परिस्थितियों में नीदरलैंड्स पर दांव लगाना घातक हो सकता है.

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