कैमरून

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विश्व रैंकिंग: 56
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन : अंतिम आठ (1990)

खास बात
बार्सिलोना के लिए खेलते समय टीम के मिडफील्डर एलेक्स सान्ग की छवि एक रक्षात्मक मिडफील्डर की थी लेकिन अब उनसे उम्मीद की जा रही है कि अपने देश के लिए वे बड़ी भूमिका निभाएंगे. कोच वॉकर फिंक को उनके ऊपर जबर्दस्त भरोसा है

कैमरून का विश्व कप से पत्ता लगभग कट चुका था. बोनस को लेकर कैमरून के खिलाड़ियों और फुटबॉल अधिकारियों के बीच पैदा हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि हालात बेकाबू हो गए. खिलाड़ियों ने धमकी दे डाली थी कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो वे विश्व कप से वाकआउट करेंगे. खैर समय रहते अधिकारियों ने खिलाड़ियों की मांगें मान लीं. कैमरून अफ्रीका की अकेली टीम है जिसने सात बार विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया है. कैमरून के विश्व कप अभियान का शिखर 1990 में आया था जब टीम क्वार्टरफाइनल में जगह बनाने में सफल रही थी. लेकिन इंग्लैंड के हाथों क्वार्टरफाइनल में उसे मात खानी पड़ी और उसका अभियान खत्म हो गया था. इस विश्व कप में कैमरून की उम्मीदें स्ट्राइकर सैमुएल इटो के ऊपर टिकी हुई हैं जिन्हें दुनिया के प्रतिष्ठित रियल मैड्रिड, बार्सिलोना और चेल्सी जैसे क्लबों में खेलने का अनुभव है. मध्य और पिछली पंक्ति में खेलने के लिए कैमरून के पास जोएल मातिप और निकोलस एनकूलू की जोड़ी है. इसके अलावा भी कैमरून के पास मिडफील्ड में खेलने वाले कुछ शानदार खिलाड़ियों का समूह है जो किसी भी विपक्ष को परेशानी में डालने में सक्षम है. टीम के कोच वॉकर फिंक परंपरागत 4-3-3 संरचना में खेलने के हिमायती हैं क्योंकि इस संरचना में उनके मुख्य स्ट्राइकर इटो और सहयोगी स्ट्राइकर विंसेंट अबूबकर सबसे ज्यादा प्रभावी सिद्ध होते हैं. इसके अलावा टीम के पास फॉरवर्ड लाइन या अग्रिम पंक्ति में खेलने के लिए फैब्रिस ओलिंगा का विकल्प भी मौजूद है जिन्हें ला लीगा में खेलने का अनुभव है.

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