‘जो किसान फंदे पर लटकने से नहीं डर रहा, वो किसी को मारने से भी नहीं झिझकेगा’

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मैं समझता हूं कि यदि पूरे देश को निःशुल्क शिक्षा दी जाए तो किसी भी मानवीय हस्तक्षेप के बगैर विकास हो जाएगा. किसानों के बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा एक अच्छा कार्यक्रम है लेकिन सवाल भोजन का भी है. खाली पेट पढ़ाई नहीं हो सकती. भोजन बुनियादी जरूरत है.

इस मामले में सरकार का हस्तक्षेप बढ़ाने के लिए आप किस तरह के प्रयास कर रहे हैं? क्या महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने आपसे बात की है?

सरकार को उनका काम करने दें. मैं सरकार के कामकाज पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता. मैं अपने हिस्से का सहयोग कर रहा हूं. मैंने फड़णवीस से बात की है और उन्हें बताया है कि आप जो कुछ भी दे रहे हैं, वह किसानों के लिए पर्याप्त नहीं है. भविष्य में, उनकी समस्याएं घटने के बजाए कई गुना बढ़ेंगी. एक किसान, जो खुद को फंदे पर लटकाने से नहीं डर रहा है, भविष्य में किसी दूसरे को मारने में भी नहीं झिझकेगा. किसानों में मायूसी नहीं फैलनी चाहिए.

एक तरफ सरकार ने स्मार्ट सिटी की योजना पेश की है, किसान फसलों की कम कीमत और खेती से हो रही न्यूनतम आय की वजह से जान दे रहे हैं. आपका क्या कहना है?

मैं खुद गांव से आता हूं, मेरे पास स्मार्ट सिटी को लेकर कोई राय नहीं है. बुनियादी सच्चाई यह है कि किसान, जो देश को भोजन देता है, देश का अन्नदाता है, मर रहा है. उनकी समस्याओं के हल ढूंढने की वजह ने मुझे जीने का मकसद दिया है. उनकी आमदनी अनिश्चित है. वे बिना ये सोचे कि इसके बदले उन्हें क्या मिलेगा फसल में पैसा लगाते हैं.

किसानों की सबसे बड़ी समस्या सरकारी बैंक से कर्ज लेना है, हाल ये है कि बारिश न होने की स्थिति में उनके पास अपनी फसल व जमीन के दस्तावेजों को गिरवी रखकर सूदखोरों से कर्ज लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता

कोई किसान आपसे मदद चाहता है, तो कैसे संपर्क करे?

जैसे-जैसे हमारे पास फंड आ रहा है, हम गांवों को गोद लेने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि सभी घरों तक मदद पहुंच सके. हम नहीं चाहते कि किसानों को पानी के लिए मीलों तक दौड़ना पड़े, इसलिए पानी की समस्या के समाधान के लिए हमने कई इंजीनियरों को अपने साथ जोड़ा है.

इस अभियान में मदद के लिए क्या आप किसी अन्य कलाकार से आगे आने के लिए संपर्क करना चाहेंगे?

नहीं, मैं कौन होता हूं किसी से संपर्क करने वाला? यह अच्छा है कि लोग स्वेच्छा से आगे आ रहे हैं.

सूखाग्रस्त क्षेत्रों में किसानों की मौत के मुद्दे पर आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से क्या कहना चाहेंगे?

जैसे मैं इस विषय को लेकर गंभीर हूं, सरकार को भी इस मुद्दे पर गंभीरता दिखानी चाहिए. जब तक सरकार ऐसा नहीं करे, जनता को सरकार पर पूरी तरह से निर्भर नहीं होना चाहिए. हमें खुद-ब-खुद आगे आना होगा.

 आम जनता के लिए कोई संदेश?

कुछ नहीं बस केवल धन्यवाद. सिर्फ दो दिनों में लोगों ने दो करोड़ रुपये दान किए हैं. 10-20 रुपये जैसी छोटी ही सही लेकिन व्यक्तिगत मदद आ रही है. मुझे यह देखकर प्रसन्नता हो रही है कि युवा आगे आ रहे हैं और मुझसे कह रहे हैं कि वे किसानों के लिए अपना एक महीने का वेतन दान करना चाहते हैं. इसके अलावा वे लोग भी हैं, जिनके बारे में आप सोचते हैं कि उनके पास देने को कुछ नहीं है, वे मदद के लिए आगे आ रहे हैं. चाय बेचने वालों ने मिलकर 2,000 रुपये दान किए हैं. यह सब देखकर मैं खुश हूं. ये खुशी पैसे के लिए नहीं है बल्कि मुझे यह देख खुशी हो रही है कि किसानों की मदद करने की जरूरत को लेकर जागरूकता बढ़ रही है.

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