‘हिंदी में यूरोपीय साहित्य से बेहतर लिखा गया है’

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एकवचनीय संस्कृति कहां से आई है?

1930 के दशक में अंग्रेजी शिक्षा से प्रेरित वर्णवर्चस्ववादी ब्राह्मण आदि जातियों ने काल्पनिकता से एक राष्ट्र, एक धर्म, एक चर्च की हिटलरवादी प्रकृति जैसा एक काल्पनिक हिंदुत्ववाद संगठित किया है. इसकी प्रतिक्रिया में पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित होकर इसी प्रवृत्ति के कट्टर इस्लामपंथियों ने देशीय परम्पराओं का त्याग किया और देश विभाजन करवाया. इस ध्रुवीकरण के चलते भारतीय उपमहाद्वीप में सहिष्णु परंपरा का पूर्ण लोप हो गया और हिंसक धर्मयुग शुरू हो गया. हिंदू, मुसलमान, सिख सभी का अमानवीयकरण हुआ है. मेजोरिटी-माइनॉरिटी की मूल्य व्यवस्था लागू होने के कारण अनेकवचनीय भारतीय िंहंदू विविधता कबाड़ में चली गई. मसलन ‘अधिक हिंदू पैदा कीजिए’ या ‘भगवदगीता को राष्ट्रीय ग्रंथ’ माना जाए आदि-इत्यादि.

महाराष्ट्र में हिंदी बहुत ज्यादा पढ़ी जाती है. गालिब की सीडी महाराष्ट्र में पान की दुकानों तक में सुनी जाती है. मैंने गालिब को एक पानवाले से सीखा-समझा है

हिंदी पाठक अगर मराठी साहित्य के किसी साहित्यकार को पढ़ना चाहें तो आप किसका नाम लेना चाहेंगे?

मराठी में 1०-2० लोग तो  ऐसे हैं ही जो बहुत अच्छा लिख रहे हैं. रंगनाथ पठारे, राजन गवस, महेंद्र यादव, सदानंद देशमुख, गणेश आवटे आदि हैं.

हिंदी में किनका लेखन आपको अच्छा लगता है?

नागार्जुन, उदय प्रकाश, शरद जोशी, शेखर जोशी, विनोद कुमार शुक्ल, श्रीलाल शुक्ल सहित कई हिंदी लेखक हैं जो मुझे बहुत पसंद हैं. इनकी शैली बहुत अच्छी है और सच तो यह है कि इतना अच्छा अंग्रेजी में भी नहीं लिखा गया है.

 आप हिंदी लेखन के बारे में कह रहे हैं कि ऐसा साहित्य अंग्रेजी में नहीं लिखा गया है. आपको ऐसा क्यों लगता है?

मैं यूरोप का साहित्य बहुत पढ़ता रहता हूं. हिंदी साहित्य के लेखकों ने उपनिवेशवाद का चोला बहुत जल्दी खुद के ऊपर से उतार फेंका है. अमेरिका को दो सौ साल लगे. ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, कनाडा को बहुत समय लगा. हिंदी के लोग अपनी जड़ें ढूंढते रहते हैं. आप देहात में रहते हैं तो देहात की लिखिए. यूरोप में यथार्थवाद चल रहा है कि संकेतवाद, यह सब उनपर छोड़ दीजिए. हमारे यहां के लेखक हमेशा अपनी जमीन के बारे में ही सोचते और उसके बारे में रचते रहते हैं. हिंदी ने गालिब, मीर, इकबाल सबको अपना कहा है.

हिंदी ने उर्दू, फारसी, बंगाली या फिर उसके आसपास जो भाषाएं व्यवहार में लाई जाती हैं, सबको अपने साथ कर लिया है?

यह आज नहीं हुआ है, ऐसा बहुत पहले से ही होता आया है. महाराष्ट्र में हिंदी बहुत ज्यादा पढ़ी जाती है. गालिब की सीडी महाराष्ट्र के पान दुकानों में सुनी जाती है. मैंने गालिब एक पान वाले सीखा.

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