बाल यौन शोषण रैकेट

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पीट्स को 1991 में गिरफ्तार किया गया और इसके एक साल बाद सभी आरोपितों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया. बाद में सीबीआई को इस मामले की जांच सौंपी गई. इस मामले की सुनवाई में सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि आरोपितों को कैसे उनके मूल देश से प्रत्यर्पित करवाया जाए. सीबीआई को इस मामले में पहली सफलता तब मिली जब ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने 1998 में इस अपराध में शामिल अपने नागरिकों को भारत सरकार को सौंप दिया. पीट्स के साथ इन दोनों को सजा सुनाई गई थी. इस मामले के बाकी आरोपित आज तक पकड़ में नहीं आ सके हैं. इनमें से एक रेमंड वेर्ली पिछले कुछ महीनों से चर्चा में है. ब्रिटेन के नागरिक वेर्ली ने वहां की अदालत में अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील की है जिस पर अभी अंतिम फैसला आना बाकी है.

इस घटना के बाद गोवा में बाल यौन शोषण के खिलाफ एक नया कानून- गोवा बाल अधिकार कानून- 2003  बनाया गया था. आज यह इस तरह के मामलों में सबसे आदर्श और सक्षम कानून माना जाता है.

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