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‘मुझे अफसोस है कि मैंने भारत के विकास की कहानी दुनिया भर में साझा की’

अपनी तड़क-भड़क भरी जीवन शैली के लिए पहचाने जाने वाले उद्योगपति विजय माल्या पिछले दो साल से किंगफिशर एयरलाइन के वित्तीय संकट की वजह से काफी विवादों में रहे हैं. इसमें उन्होंने मीडिया द्वारा बनाई गई अपनी छवि, किंगफिशर ब्रांड सहित सांसद बनने तक के अपने कई अनुभवों पर बात की. इस बातचीत के अंश  

जीवन की पाठशाला

शिक्षा जब कारोबार की जगह सरोकार से जुड़ती है तो क्या चमत्कार हो सकता है, यह बताता है पंजाब के गुरदासपुर जिले में चल रहा एक अनोखा कॉलेज. बृजेश सिंह की रिपोर्ट. फोटो: विकास कुमार  

युवाबल से युगपरिवर्तन

महाराष्ट्र में हिवड़े बाजार के लोगों को कभी खाने के लाले थे. लेकिन युवाओं की इच्छा शक्ति ने इसे करोड़पतियों का गांव बना दिया है.  

दस्तखत फर्जी हुए तो राज्यसभा से इस्तीफा दे दूंगा’

हाल ही में 65 भारतीय सांसदों द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति को लिखा एक पत्र सामने आया. इसमें नरेंद्र मोदी को वीजा न देने की अपील की गई थी. कई सांसदों द्वारा पत्र पर हस्ताक्षर करने की बात से इनकार करने के बाद, इसकी पहल करने वाले राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब से हिमांशु शेखर की बातचीत.  

महंत महिमा का अंत

क्यों करीब एक दशक पहले तक असम में राजनीति के शीर्ष पर रहे प्रफुल्ल कुमार महंत की आज उसी राज्य में कोई पूछ नहीं है? रतनदीप चौधरी की रिपोर्ट.  

‘मीडिया जरूरत से ज्यादा दिल्ली केंद्रित है’

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित शोमा चौधरी और अशहर खान के साथ बातचीत में खुद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को नकारते हुए दावा कर रही हैं कि अगले चुनाव में जीत फिर उनकी ही होगी.  

कौन है यासीन भटकल?

इतने बम धमाकों में सीधा हाथ होने के बाद भी यासीन भटकल सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर कैसे है? राना अय्यूब की रिपोर्ट.  

करवट लेती कुदरत

हाल के कुछ सालों में मौसम के मिजाज में अजीबोगरीब बदलाव हुए हैं. कहीं सर्दियां लंबी हो रही हैं तो कहीं कम समय में घनघोर बरसात हो रही है. जिस उत्तराखंड में आधी सदी पहले तक भूस्खलन और बाढ़ की तबाही दशक-डेढ़ दशक में एकाध बार सुनने को मिलती थी, पिछले दशक में वहां ऐसी घटनाएं हर साल हुई हैं. पहले जहां जान-माल की हानि नाम मात्र की होती थी,वहां अब इनका आंकड़ा आसमान छू रहा है. इन विचित्र बदलावों...  

मातम में मार्केटिंग

उत्तराखंड में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के राहत अभियान का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन जहां आलोचनाओं के घेरे में रहा वहीं बाकी राज्यों ने इस मामले में कहीं अधिक गरिमा दिखाई. बृजेश सिंह की रिपोर्ट.  

हे भगवान प्लास्टिक

पिछले दिनों देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि हमारा देश प्लास्टिक के एक टाइम बम पर बैठा है. यह टिक-टिक कर रहा है. कब फट जाएगा, कहा नहीं जा सकता. हर दिन पूरा देश लगभग नौ हजार टन कचरा फेंक रहा है! उसने इस पर भी आश्चर्य प्रकट किया है कि जब देश के चार बड़े शहर- दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता- ही इस बारे में कोई कदम नहीं उठा रहे तो और छोटे तथा मध्यम शहरों की...