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मोदी के बहाने भारत पर निशाने

छह हफ्ते तक जिस पश्चिमी मीडिया को भारत में हो रहे आम चुनाव की सुध नहीं थी उसका एक बड़ा हिस्सा चुनाव परिणाम आते ही इसे हिंदू राष्ट्रवाद की विजय बताते हुए बौखलाता सा दिखने लगा  

शीतयुद्ध की बढ़ती गर्मी

यूक्रेन-संकट पर अमेरिका और रूस में नित नई घुड़कियों वाले प्रचार-युद्ध की गर्मी जिस तरह बढ़ रही है उसकी आंच से कहीं सच्चे युद्ध की आग न लग जाए.  

जो बली उसी की चली

यूक्रेन इसका सबसे नया उदाहरण है कि 21वीं सदी की दुनिया 20वीं सदी में लौट रही है. अंतरराष्ट्रीय कानून हो या आत्मनिर्णय का अधिकार, सही वही है, जिसके पास बाहुबल है.  

यूरोप के अनाथ भारतवंशी

यूरोप के सबसे बड़े जातीय अल्पसंख्यक रोमा और सिंती इस कदर हाशिये पर हैं कि हर जगह दुत्कारे ही जाते हैं. उनके मूल देश भारत ने भी उनसे मुंह फेर लिया है  

शीतयुद्ध का पुनर्जन्म !

तीन महीने से चल रही तीसरी यूक्रेनी क्रांति न सिर्फ इस देश के लिए अब तक की सबसे बड़ी भ्रांति सिद्ध हो सकती है, बल्कि उसने दुनिया को एक और शीतयुद्ध के मुहाने पर भी ला खड़ा किया है.  

प्रश्नों से घिरा प्रेम

प्रीति कोई रीति-नीति भले ही न जानती हो, पर इससे किसी देश के राष्ट्रपति को क्या अनीति का भी स्वाभाविक अधिकार मिल जाना चाहिए? फ्रांस के सामने आज यही प्रश्न है.  

सहमति से आगे के सवाल

अंतिम क्षण में हुई न्यूनतम सहमति के चलते संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन विफल होने से बाल-बाल बच गया. लेकिन इस मोर्चे पर सही मायने में सफलता के लिए भारत-चीन सहित सारी दुनिया को अभी एक बड़ी और दुविधानजक लड़ाई लड़नी है  

‘जिंदगी शतरंज से ज्यादा जटिल है’

शतरंज और राजनीति, दोनों की बिसात उन्हें भाती है. विश्व शतरंज पर दो दशक तक बादशाहत कायम रखने वाले दिग्गज गैरी कास्परोव रूस के मौजूदा शासन की लगातार मुखालफत के चलते भी चर्चा में रहे हैं. गोवा में आयोजित थिंक 2013 में उन्होंने तरुण तेजपाल के साथ अपने खेल, अपनी जिंदगी और राजनीति पर खुल कर बात की. बातचीत के संपादित अंश :  

जासूसी के हम्माम में सब..

अमेरिका और यूरोप प्रतिस्पर्धियों की तरह एक-दूसरे की जासूसी कर रहे हैं और सहयोगियों की तरह सारी दुनिया की.