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‘मैं शंकर बिगहा बोल रहा हूं’

बिहार के अरवल जिले में पड़नेवाला शंकर बिगहा गांव साल 1999 के गणतंत्र दिवस के दिन देश की चेतना को झकझोर रहा था. 25 और 26 जनवरी 1999 की दरम्यानी रात में इस गांव का सामना मानवता को शर्मसार करने- वाली घटना से हुआ था. गांव के 23 दलितों की हत्या कर दी गई. इसके पीछे बिहार के बाहुबलियों के संगठन रणवीर सेना की भूमिका सामने आई. इस नरसंहार पर पिछले महीने जहानाबाद की जिला अदालत का फैसला आया,...  

‘लालू ऊपरी वार करते हैं, जबकि नीतीश…’

बिहार की राजनीति में समाजवादी धारा के एक प्रमुख नेता शिवानंद तिवारी ने चुनावी राजनीति से संन्यास ले लया है. वे रिटायर भले हो गए हैं, लेकिन सियासी सरगर्मी उनके यहां अभी भी कायम है. फिलहाल वे अपनी आत्मकथा लिखने में लगे व्यस्त हैं. इसे लेकर अभी से बिहार में उत्सुकता है क्योंकि तिवारी लालू और नीतीश के समान रूप से नजदीकी रह चुके हैं. उनके अपने राजनीतिक अनुभव, जदयू और राजद के विलय की अटकलों और बिहार की...  

मांझी के बोलः महत्वाकांक्षा या रणनीति?

जीतन राम मांझी के विवादित बयानों से जदयू के भीतर जो दरार दिख रही है उसकी असलियत क्या है?  

सत्ता का इकबाल खत्म?

दशहरे की शाम पटना के गांधी मैदान में भगदड़ से 33 लोगों की मौत के बाद जो हो रहा है उससे संकेत मिलता है कि बिहार मेंशासन और सत्ता का इकबाल खत्म हो चुका है.  

जीत-हार का सार

बिहार में 10 सीटों पर हुए विधानसभा उपचुनाव के नतीजों के संदेश एक तरफ से साफ दिखते हैं तो दूसरी ओर से धुंधले  

दो का मेल, दो की लड़ाई और तीसरा कोण

बिहार में जो नए राजनीतिक हालात बने हैं उनमें आगे के सारे समीकरण नीतीश कुमार-लालू प्रसाद यादव के मेल और उनके सामने खड़ी भाजपा के संदर्भ में ही देखे जा रहे हैं. लेकिन भविष्य के इन राजनीतिक समीकरणों में एक तीसरा कोण भी है-वर्तमान मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का  

फिर मंडल की हांडी

लालू प्रसाद यादव फिर मंडलवादी राजनीति के सहारे बड़ा और आखिरी दांव खेलना चाहते हैं. जिन नीतीश कुमार के साथ वे इस राह चलना चाहते हैं उन्होंने इस पर मौन साधा हुआ है. क्या आज के बिहार में मंडल कार्ड से राजनीतिक मुनाफे की फसल काटना मुमकिन है?  

मेल और खेल

नीतीश कुमार द्वारा लालू प्रसाद यादव से समर्थन मांगना बिहार की राजनीति में संभावनाओं के नए द्वार खुलने और विडंबनाओं के दोहराव का संकेत है  

अगर-मगर के बीच!

लोकसभा चुनाव के बाद बिहार में नीतीश कुमार के हाशिये पर जाने की भविष्यवाणी करते आकलनों और अनुमानों में कितना दम है?  

पलटी से पलटा पासा

ऐन मौके पर चुनाव न लड़कर बिहार की किशनगंज सीट से जद(यू) के लोकसभा प्रत्याशी अख्तरुल ईमान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को झटका दिया तो राजद-कांग्रेस गठबंधन को खुशी की वजह.