जाति पूछी और मोटर साइकिल से उतरने की रट लगा दी

बाबा ने एक साथ बहुत सारे सवाल दाग दिए थे. अब मुझे समझ नहीं आया कि इन सवालों के पीछे उनका मंतव्य क्या है? खैर मैंने उनसे कहा बाबा मेरे घर में मां-पिता, पत्नी-बच्चे, भाई हैं. और थोड़ी साझे की जमीन भी है.

बाबा को संतोष नहीं हुआ और उन्होंने फिर पूछा कि भाई जात कौन-सी है?

मैंने जवाब दिया बाबा मैं जातपात मैं भरोसा नहीं करता. बाबा साहब आंबेडकर की विचारधारा को मानता हूं.

मेरा इतना कहना था कि बाबा थोड़ा भन्नाते हुए बोले क्या चमार हो ?

मैंने थोड़ा सख्ती से कहा हां बाबा मैं चमार हूं. यह सुनते ही बाबा का हिलना ढुलना शुरू हो गया. वह राम-राम रटने लगे. मैंने मैं पूछा बाबा क्या बैठने में कोई तकलीफ हो रही है? उन्हाेंने फौरन जवाब दिया हां, भईया हमको उतार दो. सीट में कुछ चुभ रहा है. मैंने पूछा, ‘क्या चुभ रहा है ?’ उन्होंने कहा बस यहीं उतार दे हमें, आगे नहीं जाना है. मैंने कहा अभी तो गोल चक्कर दूर है तो उनका जवाब आया बस यहीं उतार दो हमें यही जाना है. तुम हमें गलत दिशा में ले जा रहे हो. मुझे समझ नहीं आया कि एकाएक उन्हें क्या परेशानी हो गई है. खैर मैंने गाड़ी रोकी और उन्हें उतार दिया. उतारते हुए मैंने पूछा क्या बाबा मेरे चमार होने से दिक्कत हो गई. वह बोले भई जब सब जान गए हो तो पूछते क्यों हो?

इस घटना की टीस मेरे मन में बहुत गहरे उतर चुकी थी. मैंने यहां तक सोचा लिया था कि अब सवर्ण पर भरोसा नहीं करूंगा. लेकिन एकाएक मुझे बाबा साहब अांबेडकर की कही बात याद आ गई कि हमारी लड़ाई ब्राह्मणवाद से है , सवर्णों या सिर्फ ब्राह्मणों से नहीं.

लेखक पेशे से अध्यापक हैं और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रहते हैं

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