शबनम मौसी

लेकिन यह शबनम मौसी के विधायक बनने के शुरुआती दिनों की मनोहर कहानी है. कुछ वक्त गुजरने के बाद ही मध्य प्रदेश विधानसभा में उनका मजाक बनाया जाने लगा, जिसमें कांग्रेसी नेता सबसे आगे थे. वे शबनम पर फब्तियां कसते, उनके उठाए सवालों पर हंसते थे और उनके किन्नर होने को बार-बार मुद्दा बनाते थे. शबनम मौसी पर खुद असभ्य व्यवहार के आरोप भी लगने लगे. कहते हैं उन पर कांग्रेस विधायक बिसाहूलाल सिंह की कृपा थी, लेकिन एक बार विधानसभा की लॉबी में दोनों में इस कदर झगड़ा हुआ कि आवाजें सदन तक पहुंचीं. और झगड़ा भी. विवाद इतना बढ़ा कि शबनम मौसी कांग्रेस विधायक के पीछे जूता लेकर दौड़ गईं. इससे एक दिन पहले ही वे प्रदेश सचिवालय पहुंच कर जोरदार हंगामा खड़ा कर चुकी थीं. इस तरह की कुछ और अप्रिय घटनाओं ने उन्हें प्रदेश की विधानसभा में बहिष्कृत-सा कर दिया. उन पर अपहरण गिरोह चलाने का भी आरोप लगा. इन आरोपों और घटनाओं ने शबनम मौसी की लोकप्रियता का क्षेत्रफल और उसका घनत्व काफी कम कर दिया. यह समझ कर वे बीजेपी और कांग्रेस दोनों के करीब जाने की कोशिश करने लगीं लेकिन किसी ने उन्हें हाथ नहीं लगाया. ‘मैं सोनिया गांधी से भी मिली. उन्होंने सहानभूति भी दिखाई लेकिन उस समय के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राधा किशन मालवीय और उन जैसे दूसरे कांग्रेसी नेताओं की वजह से मुझे पार्टी में शामिल नहीं किया गया’. आखिरकार, 2003 के विधानसभा चुनावों में वे बुरी तरह हारीं. इन चुनावों में प्रदेश के किन्नरों द्वारा मिलकर बनाई गई पार्टी ‘जीती जिताई पार्टी’ ने मध्य प्रदेश में सौ से ज्यादा किन्नरों को चुनाव में उतारा, और शबनम मौसी सहित सभी हारे. राजनीतिक चिंतक सही सिद्ध नहीं हो सके.

यहीं से शबनम मौसी के राजनीतिक जीवन के पटाक्षेप की शुरुआत हुई. उनके साथ उस तरह के लोग भी नहीं थे जो दम लगा के कह सकें, ‘अभी न परदा गिराओ कि ठहरो, दास्तान अभी और भी है’. 2005 में हालांकि उन पर बनी आशुतोष राणा अभिनीत फिल्म ‘शबनम मौसी’ आई, लेकिन कुछ वक्त की त्वरित प्रसिद्धि के अलावा वह मौसी को कुछ नहीं दे पाई. राजनीति में हाशिए पर पहुंच चुकी शबनम मौसी ने फिर हर मौजूदा राजनीतिक पार्टी के दरवाजे की सांकल बजाना शुरू किया. 2008 में दरवाजा खोला लालू प्रसाद यादव की आरजेडी ने जिसकी तरफ से शबनम 2008 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में खड़ी हुई और एक बार फिर बुरी तरह हारीं. ‘लालू चीटर है, हमको चीट किया. चुनाव में कैंपेन करने तक नहीं आया’, हारने के बाद ऐसा कहकर शबनम मौसी ने लालू की पार्टी छोड़ दी. चार साल बाद 2012 में उन्होंने मध्य प्रदेश भी छोड़ा और उत्तर प्रदेश के कानपुर कैंट क्षेत्र से ‘राष्ट्रीय विकलांग पार्टी’ की तरफ से चुनाव लड़ा. इससे पहले कि इसे आप उनकी राजनीतिक जीवटता समझें, आगे पढ़िए. 1999 की वह स्टार विधायक जो सोहागपुर सीट 18 हजार मतों से जीती थी, उतने मत जितने उस वक्त के कांग्रेस और बीजेपी उम्मीदवारों के मिलाकर भी नहीं थे, उसको 2012 में सिर्फ 118 वोट मिले. पूछने पर कहती हैं, ‘अब मुझे यह तो पता नहीं है कि मुझे कानपुर में कितने वोट मिले, लेकिन मौका मिला तो मैं अगला चुनाव भी जरूर लडूंगी’. अगला विधानसभा चुनाव वे कहां से लड़ेंगी और किस पार्टी की तरफ से, उन्हें अभी इसकी अनुभूति नहीं हुई है.

‘मैं सोनिया गांधी से भी मिली. उन्होंने सहानभूति भी दिखाई लेकिन प्रदेश कांग्रेस नेताओं की वजह से मुझे पार्टी में शामिल नहीं किया गया’

1955 की मुंबई में एक पुलिस अफसर के यहां जन्मी शबनम मौसी का जन्म का नाम चंद्र प्रकाश था लेकिन परिवार ने नकारा, तो पालन-पोषण आदिवासी परिवार में हुआ. आठवीं तक पढ़ी शबनम मौसी जीविका की तलाश में बंबईया फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा भी बनीं. उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ भी फिल्म की और राजेश खन्ना के साथ भी. अमर अकबर एंथोनी, जनता का हवलदार, कुंवारा बाप. बाद में वे मध्य प्रदेश आ गईं और समाज सेवा करने लगीं. यहीं से राजनीति में आईं. कहते हैं उन्हें 14 भाषाओं का ज्ञान है. अंग्रेजी का तो जरूर है, यह पता चलता है क्योंकि बातचीत में वे ‘आई एम बिजी राइट नाऊ’ बार-बार कहने में काफी रुचि लेती हैं. वैसे आजकल उनकी व्यस्तता मध्य प्रदेश स्थित अनूपपुर के मंदिरों में शाम को प्रभु की आरती करना, भजन गाना, समाज सेवा करना (उनके अनुसार), और जब कभी किन्नरों को लेकर कोई राष्ट्रीय खबर बने, तो अपने फोन बजने का इंतजार करना है. हमारे टीवी न्यूज चैनल उन्हें इसी सिलसिले में फोन करते हैं, कभी थर्ड जेंडर की मान्यता पर तो कभी मध्य प्रदेश सरकार के किन्नरों को नौकरी देने के लिए डेटाबेस बनाने और एक बोर्ड का गठन करने पर बाइट लेने के लिए, फोनो लेने के लिए.

कुछ समाज जिम्मेदार है और कुछ वे खुद कि आज हिंदुस्तान की पहली किन्नर विधायक शबनम मौसी हाशिए पर बैठी हैं, समाज में अपनी जगह तलाश रहीं हैं, पुराने दिनों की यादों में अपना आज गुजार रही हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here