सचिन और रेखा, कम ही देखा

तेंदुलकर सूचना-तकनीकी पर बनी संसदीय समिति के सदस्य भी हैं. रेखा भी खाद्य और नागरिक आपूर्ति मामलों पर बनी एक संसदीय समिति में हैं. संसद में इन दोनों दिग्गजों की गैरमौजूदगी उन्हें महत्वपूर्ण समितियों में रखने के ऐसे फैसलों को भी हास्यास्पद बना देती है.

हालांकि धूप में इक्का-दुक्का छांव के कतरों की तरह इस मामले में भी कुछ अपवाद रहे हैं. 1953 में नर्तक रुक्मिणी देवी अरुंदाले की मदद से पशुओं के खिलाफ क्रूरता रोकने के लिए एक विधेयक पेश किया गया. मशूहर लेखक आरके नारायण ने संसद में अपने पहले भाषण में भारी-भरकम स्कूल बैग को हटाने की मांग की थी. उनका कहना था कि इससे बच्चे झुककर चलते हैं और चलते वक्त चिंपाजी की तरह उनके हाथ आगे की तरफ लटके रहते हैं जिससे उन्हें रीढ़ संबंधी चोटों का खतरा रहता है.

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