बाबरी मस्जिद विध्वंस : सभी आरोपी बरी

आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती आदि थे आरोपी

बाबरी मस्जिद ढांचे के 6 दिसंबर, 1992 को विध्वंश के मामले में 28 साल बाद आखिर बुधवार को लखनऊ में विशेष सीबीआई अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए इस मामले के मुख्य आरोपियों लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत 32 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा यह काम सुनियोजित नहीं था।

जोशी, आडवाणी और उमा भारती ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फैसला सुना। कोर्ट के बाहर अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गयी थी। करीब 28 साल पुराने इस आपराधिक मुक़दमे की सुनवाई कर रहे विशेष जज सुरेंद्र कुमार यादव आज ही सेवानिवृत हो जाएंगे। अगर उन्हें विशेष न्यायालय (अयोध्या प्रकरण) के जज की जिम्मेदारी न मिली होती तो वे पिछले साल सितंबर के महीने में ही रिटायर हो गए होते। पांच साल पहले 5 अगस्त को उन्हें इस मुक़दमे में विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।

लखनऊ की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने आदेश जारी कर सभी आरोपियों को फैसले के दिन कोर्ट में मौजूद रहने को कहा था, हालांकि, तीनों बड़े आरोपी आडवाणी,  जोशी और उमा भारती उपस्थित नहीं रहे।

फैसले के मद्देनजर अयोध्या और लखनऊ में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

फैसले से पहले आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, महंत नृत्यगोपाल दास सहित छह आरोपियों को छोड़कर बाकी सभी 26 अभियुक्त अदालत पहुँच गए थे।  विशेष जज को इसकी सूचना दे दी गई। फैसला सुनने के लिए विनय कटियार, साध्वी ऋतम्भरा, पवन पांडेय, रामजी गुप्ता, राम विलास वेदांती अदालत में उपस्थित रहे।

कोर्ट में कुल 16 कुर्सियां लगाई गई थीं। बाकी लोग कोविड-19 के प्रोटोकॉल के कारण बाहर ही बैठे। जोशी, आडवाणी और उमा भारती ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फैसला सुना।

आडवाणी और जोशी अधिक उम्र और खराब स्वास्थ्य की वजह से नहीं आ पाए जबकि उमा भारती कोरोना संक्रमित होने के बाद ऋषिकेश एम्स में भर्ती हैं। फैसले से  पहले रामविलास वेदांती ने कहा – ‘हमको विश्वास है कि मंदिर था, मंदिर है और मंदिर रहेगा। हमने मस्जिद तोड़वाई। हम रामलला के लिए जेल जाने और फांसी चढ़ने को भी तैयार हैं।’

लखनऊ में विशेष सीबीआई कोर्ट के आसपास फोर्स तैनात की गयी है। कोर्ट के चारों तरफ बैरिकेडिंग लगाई गई है और हर आने-जाने वाले से पूछताछ की गयी। लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत के बाहर करीब 2 हजार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा प्रदेश के 25 संवेदनशील जिलों में सुरक्षा व्‍यवस्‍था तगड़ी कर की गई है।

कौन-कौन हैं आरोपी

अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी के विवादित ढांचे को गिराए जाने के मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने फैसला सुनाया। मामले में कुल 49 आरोपी थे जिसमें से 17 की मौत हो चुकी है। बाकी बचे सभी 32 मुख्य आरोपियों पर फ़ैसला आया।

इस मामले में मुख्य आरोपियों में बीजेपी के सीनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह, विनय कटियार, राम विलास वेदांती, ब्रज भूषण शरण सिंह आदि शामिल हैं। इनके अलावा महंत नृत्य गोपाल दास, चम्पत राय, साध्वी ऋतम्भरा, महंत धरमदास भी मुख्य आरोपियों में थे।

पांच आरोपियों एलके आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सतीश प्रधान, उमा भारती और नृत्य गोपाल दास इनके आने की संभावना बेहद कम है। क्योंकि इनकी उम्र ज्यादा है और इनके न आने को लेकर सुबह स्थिति साफ हो जाएगी। अगर ये नहीं आएंगे तो इनके वकील कोर्ट की कार्यवाही शुरु होते ही व्यक्तिगत रुप से मौजूद नहीं रहने का आवेदन कोर्ट में डालेंगे।

जिन आरोपियों का निधन हो चुका है उनमें बाल ठाकरे, अशोक सिंघल, आचार्य गिरिराज किशोर, विष्णु हरि डालमिया, महंत अवैद्यनाथ, महंत परमहंस दास, महामंडलेश्वर जगदीश मुनि, बैकुंठ लाल शर्मा प्रेम, डॉ सतीश नागर , मोरेश्वर साल्वे (शिवसेना नेता), डीवी रे (तत्कालीन एसपी), विनोद कुमार वत्स (हरियाणा निवासी), रामनारायण दास, हरगोबिंद सिंह, लक्ष्मी नारायण दास महात्यागी, रमेश प्रताप सिंह और विजयराजे सिंधिया शामिल हैं।