नये साल में नये संकल्पों की ज़रूरत

फ़ालतू के ‘डे’ मनाने के बजाय युवा समझें राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय दिवसों का महत्त्व

बीते वर्षों की तरह साल 2022 भी विदा हो गया और हम 2023 में प्रवेश कर चुके हैं। जनवरी का स्वागत दुनिया भर ने पूरे ज़ोर-शोर से किया है। इसी तरह हमारी ज़िन्दगी के साल दर साल गुज़रते जाते हैं, और हम हर साल कुछ नया करने का संकल्प लेते हुए आगे बढ़ते रहते हैं। ज़ाहिर है इस साल के लिए भी सभी ने कोई न कोई संकल्प लिया ही होगा। लेकिन इसके बावजूद कुछ ऐसे संकल्पों को पूरा करने से हम लोग चूक जाते हैं, जिनके लिए बहुत से लोग पछतावा करते नजर आते हैं। यह स्थिति जागरूक युवाओं की ज़्यादा होती है, ख़ासकर उनकी जो पढ़ाई करके अपना करियर बनाने में दिन-रात लगे रहते हैं।

लेकिन अगर हम सब अपनी ज़िन्दगी सँवारने के लिए संकल्पों के अलावा भी कुछ संकल्प लें, तो हो सकता है कि हमें बेहद ख़ुशी मिले। इन्हीं संकल्पों में से एक है- हर साल के हर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस पर अपनी ओर से कुछ ऐसा करना, जिससे हमें और हमारे समाज को फ़ायदा पहुँचे। लेकिन विडंबना यह है कि आजकल के युवा कई ज़रूरी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवसों पर कुछ करने के बजाय रोज़-डे, प्रपोज-डे, स्लैप-डे, किस-डे, फ्रैंड्स-डे जैसे फ़ालतू के मनगढ़ंत दिवसों में उलझ गये हैं, जिन्हें न तो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवसों की मान्यता मिली है और न इन्हें मनाने का कोई फ़ायदा है। यहाँ तक कि मदर-डे और फादर-डे जैसे दिवसों पर भी लोग सिवाय एक-दूसरे को बधाई देने के कुछ नहीं करते, भले ही फिर वो माँ-बाप की सही मायने में इज़्ज़त करने की बात हो।

हर साल की तरह इस साल भी जनवरी में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस हैं, जिनमें 4 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस है। 6 जनवरी को विश्व युद्ध अनाथ दिवस है। 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस है। 9 जनवरी को भारतीय प्रवासी दिवस है। 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस है। 11 जनवरी से 17 जनवरी तक राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा सप्ताह है। 11 जनवरी को लाल बहादुर शास्त्री पुण्य-तिथि है। 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस एवं स्वामी विवेकानंद जयंती है। और 14 जनवरी को सशस्त्र बल वयोवृद्ध दिवस, तो 15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस प्रमुख है।

विश्व युद्ध अनाथ दिवस

6 जनवरी को विश्व युद्ध अनाथ दिवस मनाया जाता है। लेकिन अब इसका उतना महत्त्व नहीं रह गया है। क्योंकि अब द्वितीय विश्व युद्ध को हुए भी 83 साल बीत चुके हैं। इसलिए द्वितीय विश्व युद्ध में भी अनाथ हुए बच्चों में शायद ही कोई बचा होगा। लेकिन इन दिनों रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के चलते अनाथ हुए बच्चों को अंतरराष्ट्रीय संरक्षण की ज़रूरत है, जिस पर ध्यान दिये जाने की बहुत ज़रूरत है। विश्व युद्ध अनाथ दिवस मनाने का मतलब भी तभी सार्थक होगा, जब किसी भी युद्ध में अनाथ और घायल हुए बच्चों को संरक्षण, शिक्षा और पोषण मिले। आज इस तरह के बच्चों की ओर देखने वाले संगठनों और देशों का नितांत अभाव है, केवल इस नाम पर पैसों की लूटमार ही हर देश में चल रही है। कई देशों में युद्ध में अनाथ और घायल हुए बच्चों के फंड का तो इस्तेमाल भी नहीं होता है।

विश्व पटल पर हिन्दी

बात जब हिन्दी की आती है, तो हमारे ही देश के कुछ लोग नाक-भौं सिकोडऩे लगते हैं। लेकिन वे भूल जाते हैं कि जिस हिन्दी भाषा की वे अवहेलना कर रहे हैं, वही हिन्दी भाषा उनकी जन्मघुट्टी में उन्हें पिलायी गयी है और इसके बिना उनका वजूद उसी तरह नहीं है, जिस तरह देश के बिना उनका कोई वजूद नहीं है। इसलिए अपनी मातृ भाषा से सभी को उसी तरह प्यार करना चाहिए, जिस तरह वे अपने देश से करते हैं। हर साल 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाता है। अगर हम आज विश्व पटल पर हिन्दी की बात करें, तो यह दुनिया की तीसरी सबसे समृद्ध भाषा है और धीरे-धीरे इसे बोलने-समझने वालों की तादाद बढ़ रही है। आज दुनिया में 72 करोड़ से ज़्यादा लोग हिन्दी पढ़ते-लिखते और बोलते हैं। भारत में 18 करोड़ से ज़्यादा लोगों की मूल भाषा हिन्दी है, जबकि $करीब 31 करोड़ लोग इसे दूसरी और 25 करोड़ तीसरी मुख्य भाषा के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। माना जा रहा है कि आने वाले तीन दशक में हिन्दी दुनिया की दूसरी सबसे समृद्ध भाषा का दर्जा पा चुकी होगी।

राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा सप्ताह

राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा दिवस पहली बार 4 मार्च 1972 को मनाया गया था। साल 2015 में यह दिवस 11 जनवरी से 17 जनवरी तक मनाया गया। इस प्रकार इसे अब राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा सप्ताह कहा जाता है। भारत में जहाँ साल 2020 में 3,35,050 लोग सडक़ हादसे में ज़ख्मी हुए, वहीं 1,33,201 लोग मारे गये, वहीं साल 2021 में 3,71,884 लोग ज़ख्मी हुए, जबकि 1,55,622 लोग मारे गये। इस साल के आँकड़े अभी जारी नहीं हुए हैं। भारत में कुल 78.7 फीसदी सडक़ दुर्घटनाएँ चालकों की $गलती से होती हैं। सबसे ज़्यादा हादसे बारिश और सर्दियों में होते हैं। भारत में सडक़ दुर्घटनाएँ रोकने के लिए सडक़ नियमों का कड़़ाई से पालन होने के अलावा, ड्राइविंग लाइसेंस में बरती जाने वाली असावधानियाँ भी हैं, जिसकी सबसे बड़ी वजह है रिश्वत के दम पर लाइसेंस जारी होना। साथ ही सडक़ों की दशा $खराब होना भी सडक़ हादसों का बड़ा कारण है। हालाँकि आज़ादी के बाद से सडक़ व्यवस्था में का$फी इज़ाफ़ा हुआ है और दिनोंदिन सडक़ें बढ़ती तथा सुधरती जा रही है; लेकिन आज भी सडक़ों की गुणवत्ता और उनमें बहुत जल्द पडऩे और लम्बे समय तक न भरे जाने वाले गड्ढों की वजह से भी सडक़ हादसे होते हैं, जिसके लिए सरकार के राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय परिवहन विभाग, नेता और ठेकेदार सभी ज़िम्मेदार हैं।

भारतीय सेना दिवस

हर साल 15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस के रूप में मान्यता मिली हुई है। यह दिन भारत के लिए कई मायने में ख़ास है। 15 जनवरी को भारत के गौरव बढ़ाने वाले जवानों को सम्मानित किया जाता है। इस साल 15 जनवरी को 75वाँ राष्ट्रीय सेना दिवस मनाया जाएगा। इस मौक़े पर थल सेना की वीरता, शौर्य और शहादत को याद किया जाएगा। 15 जनवरी को राष्ट्रीय सेना दिवस मनाने के पीछे की कहानी यह है कि 15 अगस्त, 1947 को देश के आज़ाद होने के बाद भी भारतीय सेना का अध्यक्ष ब्रिटिश मूल का ही होता था। 14 जनवरी, 1949 तक आख़िरी ब्रिटिश कमांडर इन चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर रहे। लेकिन 15 जनवरी, 1949 को पूर्ण आज़ाद भारत के भारतीय सेना प्रमुख के.एम. करियप्पा बने थे। इसी दिन से भारतीय सेना दिवस मनाया जाता है।

इन दिवसों पर अगर अपने स्तर पर हर व्यक्ति कुछ सकारात्मक करे, तो इसका लाभ पूरे मानव समाज के साथ-साथ अन्य प्राणियों और प्रकृति को भी मिलेगा। इसी सोच के साथ जनवरी के पहले पखवाड़े में आने वाले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवसों के बारे में कुछ जानें, महान् लोगों से कुछ सीखें।