देश को समर्पित युद्ध स्मारक

भारत को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक मिल गया है जिसकी परिकल्पना 1960 में की गई थी, जब सशक्ष्त्र बलों ने एक प्रस्ताव दिया था- साराह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी को समर्पण की प्रतीक अमर ज्योति को जलाकर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक देश को समर्पित किया। उन्होंने इसे सैनिकों के बलिदान और साहस का प्रतीक कहा। 40 एकड़ के क्षेत्र में फैले इस स्मारक में चार चक्र हैं- अमर चक्र, वीरता चक्र, त्याग चक्र, और रक्षक चक्र और इसमें ग्रेनाइट पर स्वर्ण अक्षरों में 25,942 शहीद सैनिकों के नाम अंकित हैं।

रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण और तीनों सेनाओं के प्रमुख- सेनाप्रमुख जनरल बिपिन रावत, एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ और नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्मारक का दौरा किया। उन्होंने आंगतुक पुस्तिका में लिखा,” यह हमारे सैनिकों की वीरता, बलिदान और साहस का प्रतीक है। यह स्मारक हमें हर पल जीने और राष्ट्र के लिए कुछ करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। शौर्य और शहादत के इस तीर्थस्थल को मेरा सलाम’’।

1960 में सशस्त्र बलों ने पहली बार एक राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का प्रस्ताव रखा था। 2016 में इंडिया गेट क्षेत्र में एक राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के लिए सशस्त्र बलों और बुर्जुग सैनिकों की लगातार मांग के मद्देनजऱ तत्कालीन केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की मांग की जांच करने के लिए प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में ‘मंत्रियों के समूह’ का गठन किया। 2006 में रक्षा मंत्रालय ने निर्णय लिया कि युद्ध स्मारक को इंडिया गेट के आसपास बनाया जाना चाहिए।

20 अक्तूबर 2012 को लगभग 50 साल के बाद रक्षामंत्री एके एंटनी ने घोषणा की कि  सरकार ने भारतीय सशस्त्र बलों की लंबे समय से चली आ रही राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की मांग को मान लिया है और इंडिया गेट पर एक राष्ट्रीय युद्ध स्मारक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के समूह ने मामले के सभी बकाया मुद्दों को मंजूरी दे दी है। आखिर सशस्त्र बलों की मांग पूरी होगी।

फरवरी 2014 के चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछली सरकार युद्ध स्मारक के निर्माण में विफल रही। उन्होने युद्ध स्मारक बनाने का वादा किया। सात अक्तूबर 2015 को कैबिनेट ने युद्ध स्मारक बनाने का प्रस्ताव पारित किया और स्मारक और संग्रहालय के लिए 500 करोड़ रुपए मंजूर किए। मई 2016 में कैबिनेट नें केंद्रीय मत्रिमंडल को अधिकार प्राप्त सर्वोच्च संचालन समिति (ईएएससी) के निर्णय से अवगत कराया कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण ”सी’’ टेक्सागन ऑफ इंडिया गेट में किया जाएगा। 25 फरवरी 2019 को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक देश को समर्पित किया गया।

निकटवर्ती प्रिंसेस पार्क के साथ युद्ध संग्रहालय का निर्माण किया गया है। एक सब-वे राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और राष्ट्रीय युद्ध संग्रहालय को जोड़ता है। स्मारक इंडिया गेट के पास बनाया गया है। 1947, 1961(गोवा), 1962 (चीन), 1965, 1971, 1987 (सियाचिन), 1988 (श्रीलंका) और 1999 (कारगिल) के युद्धों और दूसरी सैन्य कार्रवाइयों में मारे गए शहीदों के नाम स्मारक की दीवारों पर अंकित  हंै। परियोजना का डिजाइन बनाने वाले चेन्नई के वास्तुकार योगेश चंद्राहासन ने कहा,”पूरी  अवधारणा इस विचार पर आधारित है कि युद्ध स्मारक एक ऐसी जगह होनी चाहिए जहां हम मृत्यु का शोक नहीं मानते हैं बल्कि सैनिकों के जीवन का जश्न मानते हैं और उनके द्वारा किए गए बलिदान को सम्मान देते हैं।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक 2014 के चुनावों में भाजपा द्वारा किया गया एक चुनावी वादा था जो अब पूरा हुआ। लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का अनावरण प्रधानमंत्री के लिए लाभदायक होगा। प्रधानमंत्री ने कहा,” कुछ लोग देश के हित से पहले अपने परिवार का हित सोचते हैं- उन्होंने सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा को अपनी कमाई का जरिया बनाया था। वे शहीदों को भूलना चाहते थे’’। सभा को संबंोधित  करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा,” आज लोग पूछ रहे हैं कि शहीदों और वीरों के साथ ऐसा अन्याय क्यों हुआ। ऐसे कौन से कारण थे जो शहीदों पर केंद्रित नहीं थे। भारत पहले या ”परिवार पहले ‘‘?

इससे पहले पूर्व सैनिकों की एक बड़ी

रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह लाखों सैनिकों की वीरता और समर्पण का परिणाम है कि भारतीय सेना आज दुनिया में सबसे मज़बूत मानी जाती है। उन्होंने कहा कि दुश्मनों और प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ सैनिक पहली रक्षा रेखा है।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में पुलवामा में हुए आतंकी हमले में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सीआरपीएफ के जवानों को याद किया और भारत की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि नया भारत विश्व स्तर पर अपना कद बढ़ा रहा है और यह इसके सशस्त्र बलों द्वारा किए गए बड़े उपायों के कारण है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त  की कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक या राषट्रीय समर स्मारक राष्ट्र को समर्पित है।

प्रधानमंत्री ने याद किया कि केंद्र सरकार ने सैनिकों और पूर्व सैनिकों को वन रैंक, वन पैंशन प्रदान करने की अपनी प्रतिज्ञा भी पूरी की है। उन्होंने कहा ओआरओपी के परिणामस्वरूप 2014 की तुलना में पैंशन में 40 फीसद तक और सैनिकों के वेतन में 55 फीसद तक की वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि एक सुपर स्पेशियालिटी अस्पताल की मांग की गई है और उन्होंने घोषणा की कि ऐसे तीन सुपर सप्ेशियालिटी अस्पताल बनाए जाएंगे।

सैनिकों के प्रति सरकार के दृष्टिकोण का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने सेना दिवस, नौसेना दिवस, और वायुसेना दिवस पर सैनिकों को दिए जा रहे प्रोत्साहन का उल्लेख किया। उन्होंने 15 अगस्त 2017 को लाँच किए गए गेलेंट्री अवाड्र्स पोर्टल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अब फाइटर पायलट बनने का अवसर मिला है। महिला अधिकारियों को शॉर्ट सर्विस कमीशन के ंसाथ अपने पुरूष सहयोगियों के समान स्थायी कमीशन के अवसर भी दिए जा रहे है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा खरीद के पूरे परिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तन शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि आधार स्तर पर पारदर्शिता सरकार के दृष्टिकोण की पहचान है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना ने संयुक्त राष्ट्र संघ के 70 प्रमुख शंति  अभियानों में से लगभग 50 अभियानों में हिस्सा लिया है और लगभग 2 लाख सैनिक इन अभियानों का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना ने  2016 में अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू आयोजित किया इसमें 50देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे सशस्त्र बल हर साल मित्र देशों के सशस्त्र बलों के साथ औसतन 10 बड़े संयुक्त अभ्यास करते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की सैन्य ताकत और हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के कारण हिन्द महासागर में समुद्री डकैती में भारी कमी आई है। प्रधानमंत्री ने भारतीय सेना की 1.86 लाख बुलेट प्रूफ जैकेटों की लंबे समय से लंबित मांग का उल्लेख किया और कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले साढ़े चार सालों में 2.30 लाख बुलेट पू्रफ जैकेटों की खरीद की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने भारतीय सेना को आधुनिक विमानों, हेलीकाप्टरों, पनडुब्बियों, जहाजों और हथियारों से लैंस किया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित फैसले राष्ट्र हित में लिए जा रहे हैं।