उपचुनाव नतीजे तय करेंगे येद्दियुरप्पा सरकार का भविष्य

आखिर कर्नाटक के बागी विधायकों पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आ गया और साथ ही येद्दियुरप्पा की परीक्षा की घड़ी का भी। सर्वोच्च अदालत ने इन विधायकों की सदस्यता तो बहाल नहीं की; लेकिन तत्कालीन विधानसभा स्पीकर के उनके 2023 तक चुनाव में हिस्सा लेने पर लगायी पाबंदी को हटा दिया। कर्नाटक में अब इन विधायकों की सीटों पर 5 दिसंबर, 2019 को उपचुनाव होगा और भाजपा को इनमें कम-से-कम छ: सीटें जीतनी होंगी और ऐसा नहीं हुआ तो येद्दियुरप्पा सरकार अल्पमत में आ जाएगी और उनके सामने बड़ी मुश्किल पैदा हो जाएगी।

आज की तारीख में कर्नाटक विधानसभा में बहुमत के लिए 104 विधायकों की ज़रूरत है जबकि भाजपा को 106 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। लेकिन चुनाव के बाद कुल सीटों की संख्या 222 होने से बहुमत के लिए 112 विधायकों की ज़रूरत रहेगी। वैसे कर्नाटक में 224 सीटें हैं लेकिन 17 में से 15 विधायकों के हलकों में ही उपचुनाव हो पायेगा। कारण है दो हलकों मस्की और राजराजेश्वरी नगर पर कर्नाटक हाई कोर्ट में मामला लंबित होना। लिहाजा इन सीटों पर उपचुनाव नहीं होगा, जिससे कुल सीटों की संख्या 222 रह जाएगी और बहुमत का आँकड़ा होगा-112 विधायक।

स्पीकर द्वारा अयोग्य करार दिये गये 17 विधायकों के फैसले को शीर्ष अदालत ने नहीं बदला, अब इनमें से 15 सीटों पर 5 दिसंबर को उपचुनाव तय है। पहले इन 15 सीटों पर 21 अक्टूबर को चुनाव होने थे; लेकिन विधायकों को अयोग्य करार देने से जुड़ा मामला हाई कोर्ट में लम्बित था। इसके चलते चुनाव आयोग ने मतदान की तारीखों को 5 दिसंबर तक टाल दिया था।

दिलचस्प यह भी है कि अयोग्य करार दिये गये विधायक सदस्यता खोने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब भाजपा में ही शामिल हो गये हैं और पार्टी ने इनमें से 13 को उपचुनाव में टिकट भी थमा दिया है।

सर्वोच्च अदालत का फैसला आने से पहले तक राजनीतिक दलों की साँसें अटकी थीं। सर्वोच्च अदालत का फैसला 13 नवंबर को आया। याद रहे इसी साल जुलाई में कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर ने दल-बदल कानून के तहत इन 17 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था। स्पीकर की तरफ से अयोग्य घोषित किये गये विधायकों में 14 विधायक कांग्रेस के, जबकि तीन विधायक जेडीएस के थे।

विधानसभा स्पीकर ने इन विधायकों को सिर्फ अयोग्य ही नहीं करार दिया था, बल्कि अगले विधानसभा चुनाव यानी 2023 तक के लिए चुनाव लडऩे पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। इस तरह 17 विधायकों के विधानसभा में होने वाली वोटिंग में हिस्सा लेने से इन्कार करने के बाद कांग्रेस -जेडीएस गठबन्धन की सरकार गिर गयी थी। इन सभी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर माँग की थी कि स्पीकर के फैसले को गलत साबित करते हुए उन्हें योग्य बताया जाए।

कर्नाटक के स्पीकर के.आर. रमेश कुमार की तरफ से अयोग्य ठहराये गये इन 17 बागी विधायकों की सदस्यता को बहाल नहीं हुई; लेकिन सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी राहत उन्हें ज़रूर मिली। अब ये बागी विधायक उपचुनाव लड़ सकेंगे। कोर्ट ने 2023 तक अयोग्य ठहराये जाने के कर्नाटक विधानसभा स्पीकर के फैसले को रद्द कर दिया। गौरतलब है कि इन विधायकों के बागी हो जाने के बाद ही जेडीएस-कांग्रेस गठबन्धन की सरकार गिर गयी थी। कांग्रेस और जेडीएस ने आरोप लगाया था कि उनके विधायकों के बागी होने के पीछे भाजपा (येद्दियुरप्पा) हैं और वे सरकार गिराने की सा•िाश रच रहे हैं। हालाँकि, येद्दियुरप्पा ने ऐसी किसी सा•िाश से साफ इन्कार कर दिया था।

कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिरने के बाद भाजपा ने बीएस येद्दियुरप्पा की अगुआई में राज्य में सरकार बना ली। एक निर्दलीय को साथ मिलकर उसने अपना बहुमत भी साबित कर दिया।

दोहरी चुनौती होंगे उपचुनाव के परिणाम

17 विधायकों ने इस्तीफा देते समय कहा था कि कोई उन्हें इस बात के लिए मज़बूर नहीं कर सकता कि वह विधानसभा में आएँ। साथ ही कहा था वे इसके िखलाफ कोर्ट में जाएँगे और वे गये भी जिस पर अब फैसला भी आ चुका है। बी.एस. येद्दियुरप्पा ने उस दौरान इन विधायकों के समर्थन में आवाज उठाई थी। अब 224 सदस्यों की विधानसभा में 106 विधायक भाजपा के साथ हैं, जबकि जेडीएस और कांग्रेस के पास 101 विधायक हैं।

सर्वोच्च अदालत का फैसला आने के अगले ही ये सभी पूर्व विधायक कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा की मौज़ूदगी में बेंगलूरु में भाजपा में शामिल हुए। भाजपा ने पार्टी में शामिल हुए कांग्रेस और जेडीएस के इन 15 पूर्व (बागी) विधायकों में से 13 को उपचुनाव में प्रत्याशी बना दिया है। जस्टिस एन.वी. रमना की बेंच ने फैसले में कहा था कि विधायक 5 दिसंबर को होने वाला उपचुनाव लड़ सकते हैं। ज़ाहिर है अगर वे जीतते हैं, तो मंत्री भी बन सकते हैं। लिहाज़ा येद्दियुरप्पा पर दबाव रहेगा कि वे जीतने वालों को सरकार में ‘एडजस्ट’ करें।

यदि सभी 13 बागी जीत गये तो येद्दियुरप्पा का सिरदर्द का सबब भी हो सकता है। क्योंकि उन सभी सरकार में एडजस्ट करना होगा। अगर कहीं 15 में से छ: से कम विधायक जीते, तो सरकार का बहुमत जाता रहेगा और सरकार गिर भी सकती है। लिहाज़ा येद्दियुरप्पा के सामने दोहरी चुनौती है।

उपचुनाव में जुटे दल

अब सभी प्रमुख राजनीतिक दल 15 सीटों के उपचुनाव में जुट गये हैं। भाजपा अपनी पूरी ताकत इस उपचुनाव में झोंक रही है। उसके पास सत्ता और प्रशासन की ताकत है। लिहाज़ा प्रचार में भी वह आगे दिख रही है; लेकिन यह नहीं भूला जा सकता है कि 15 सीटों पर पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस या जेडीएस जीते थे। तब दल बदलने वाले इन विधायकों ने कांग्रेस-जेडीएस के ही टिकट पर चुनाव लड़ा और जीता था।

जनता के सामने अब यह 13 दोहराये गये बागी उम्मीदवार किस मुद्दे पर वोट माँगेंगे, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। पिछले चुनाव में इन सभी ने भाजपा के िखलाफ बयान देकर वोट माँगे थे और जनता ने उनको जिताया भी था।  ऐसे में यदि उनके तर्क जनता के गले नहीं उतरते हैं, तो उन्हें लेने के देने भी पड़ सकते हैं।

मुख्यमंत्री येद्दियुरप्पा ने खुद उपचुनाव की कमांड अपने पास रखी है। वे जानते हैं कि जीत ही उनकी सरकार को बचा सकती है। दूसरी और कांग्रेस और जेडीएस ने भी पूरी ताकत झोंकी हुई है। चुनाव को अभी 15 दिन बाकी हैं; लेकिन यह दोनों दल मिलकर जनता से ‘बािगयों को सबक सिखाने’ की जनता से अपील कर रहे हैं।

ज़मीन से मिली जानकारी के मुताबिक, भले इस समय भाजपा की सरकार हो, पर जनता का मूड इस तरह पाला बदलने वालों के प्रति नाराज़गी से भरा है। ऐसे में भाजपा को उपचुनाव में ज्य़ादा मेहनत करनी होगी।

कांग्रेस का ऐतराज़

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री येद्दियुरप्पा पर बागी विधायकों को भाजपा में शामिल करते समय उन्हें भविष्य का मंत्री बताने को लेकर ऐतराज़ जताते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा है और चुनाव आयोग से मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा के िखलाफ कार्यवाही की माँग की है। कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री येद्दियुरप्पा ने आदर्श आचार संहिता का  उल्लंघन किया है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुंडु राव ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखे पत्र में कहा – ‘येद्दियुरप्पा’ ने 16 विधायकों का भाजपा में स्वागत करते समय उन्हें उपचुनाव के बाद कर्नाटक के भावी मंत्री बताते हुए कहा था कि उनसे जो भी वादे किये गये थे, उन्हें पूरा किया जाएगा।’ राव का आरोप है कि येद्दियुरप्पा ने भाजपा उम्मीदवारों की चुनावी सम्भावनाओं को बढ़ाने के मद्देनज़र इन क्षेत्रों के मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से यह बयान दिया था जो आचार संहिता का उल्लंघन है।

कर्नाटक में सीटों का गणित

कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 सीटें हैं। हालाँकि 17 विधायकों को अयोग्य ठहराने के बाद इनकी संख्या 207 रह गयी। इस लिहाज़ से बहुमत के लिए 104 सीटों की ज़रूरत थी। भाजपा, जिसके पास 105 विधायकों का समर्थन है; ने एक निर्दलीय के समर्थन से सरकार बना ली और बहुमत भी साबित कर दिया। लेकिन जब 15 सीटों पर उपचुनाव के बाद सीटों की तादाद 222 होने पर ज़रूरी विधायकों की संख्या 112 हो जाएगी। भाजपा के पास इस समय 105 विधायक हैं, लिहाज़ा उसे छ: और सीटें जीतनी होंगी। यदि वह ऐसा नहीं कर पायी तो येद्दियुरप्पा सरकार के लिए खतरा पैदा हो जाएगा।