हिंदी का सम्मान कभी कम न होगा: हिमानी

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कितना उदार है हमारा समाज औरतों के प्रति?
आज भी समाज में तमाम हंसाओं का शोषण बदस्तूर जारी है। चाहे वह बाल श्रमिक के रूप में किसी घर में काम कर रही हों। या अपनों के बीच में ही क्यों न हों। क्या किसी की निगाहों में पाकीजग़ी मिलती है उनको?
यदि औरतें संवेदनशील बन जायें, दमन का शिकार की खिल्ली उड़ाने के बजाय उसको हेमा की तरह नैतिक, मानसिक, भावनात्मक संबल भी दे सकें तो समाज में बहुत सारी घटनायें होने से रुक जाएंगी।
उपन्यास में एक उपकथा भागीरथी की है। यह घटना है मेरी नानी के परिवार की। आज भी वहां पर भूत रूप में भागीरथी आमा की पूजा की जाती है। आज हम विकास के ऊंचे पायदान की ओर बढ़ रहे हैं। बेशक शहरी औरतों का जीवन बदला है पर ग्रामीण स्त्री का जीवन बहुत नहीं बदला है। आज भी कई भागीरथियां प्रसव के दौरान मौत के मुंह में चली जाती हैं। हमारे गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी है गांव स्तर पर।

आज अंग्रेज़ी पर जब ज़्यादा ज़ोर है आप हिंदी लेखन को कितना लोकप्रिय और सफल मानती हैं?
यह सही है कि आज हिंदी के पाठक बहुत कम रह गये हैं। लेखकों का बुरा हाल है। कोई लेखक केवल लेखन से जीविकोपार्जन नहीं कर सकता है अंग्रेजी का हर जगह बोलबाला है। इस सबके बावजूद हिंदी में अच्छा साहित्य लिखा जा रहा है। हिंदी के जो पाठक हैं वे गुणी पाठक हैं। आज सोशल मीडिया में भी हिंदी साहित्य का काफी प्रचार किया जा रहा है। हिंदी का सम्मान कभी कम न होगा।

नए हिंदी लेखकों को लोकप्रिय और सफल होने के लिये किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
नये उभरते लेखकों को मेरा यही कहना है कि जीवन में अनुभव आने दीजिए। चुनौतियों का सामना कीजिए। खूब लिखिए।