‘हम साधारण लड़कियां लड़ रही हैं अधिकारों के लिए

     छात्र संगठन क्या कर रहे हैं, वे इन मुद्दों को क्यों नहीं उठाते?

बीएचयू में छात्र संगठन बनाने की इजाज़त नहीं हैं। यहां छात्र संगठन बनाने की मांग कई बार उठी है पर वे मान नहीं रहे।

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनके पास ऐसी रिपोर्टस हैं कि विरोध प्रदर्शनों के पीछे गैर सामाजिक तत्व थे। यह आरोप भी हैं कि कुछ छात्राएं दूसरे शहरों से भी आई थी।

इन आरोपों में कोई तथ्य नहीं है। हर वह व्यक्ति जो इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुआ वह बीएचयू से ही था। क्या यह सम्भव है कि सैकड़ों छात्र बिना किसी की नज़र में आए, बीएचयू परिसर में पहुुंच जांए और छात्रावासों में रहें। यदि उनको विश्वास है कि प्रदर्शनकारी बाहर के थे तो बीएचयू केे 1000 छात्रों के खिलाफ एफआरआई क्यों दर्ज की गई है। इन विरोध प्रदर्शन की कई विडिय़ो बनी हैं, उन्हें देख लें। बहुत से छात्रों ने विडियो फिल्में बनाई है और वे सारी ‘सोशल मीडियाÓ पर उपलब्ध हैं। उन सभी की जांच की जाए और हर छात्र जो उनमें है उसकी फोटो बीएचयू रिकार्ड में उपलब्ध फोटो के साथ मिला कर देखी जा सकती है।

     छात्र हिंसक क्यों हुए?

छात्र बिलकुल भी हिंसक नहीं हुए। हम केवल नारे लगा रहे थे ता कि उपकुलपति आकर हमसे मिल लें और हमारी शिकयतों को सुन लें। हमने वहां से जाने से इंकार किया। ‘लाठीचार्जÓ बिना किसी उत्तेजना के किया गया। असल में प्रोक्टर ओएन सिंह ने ‘लाठीचार्जÓ का आदेश दिया। हालांकि अब उन्होंने त्यागपत्र दे दिया हैं। उन्होंने पुलिस से छात्रों को पीटने के लिए कहा था। जब छात्रों पर बेदर्दी से लाठियां चल रही थी, तब भी वह वहीं थे।

     क्या एक महिला को प्रोक्टर बनाने पर आप प्रसन्न हैं?उन्होंने छात्रों के पक्ष में कुछ बयान भी दिए हैं।

हां! अब इतनी बड़ी घटना हुई है, स्वाभाविक है कि कुछ सकारात्मक बयान तो आंएगे ही। मैं व्यक्तिगत तौर पर उन्हें नहीं जानती। यह तो समय ही बताएगा कि क्या वे छात्रों के फायदे के लिए कुछ करती हैं या नहीं।

     क्या लगता है कि जिस तरह से बीएचयू के मामले का राजनैतिक करण हुआ है उसका आपको लाभ होगा।

मैं आप को स्पष्ट रूप से बता दूूं कि हमारा आंदोलन राजनैतिक नहीं है। हम साधारण लड़कियां है जो एक सामान्य जीवन जीना चाहती हैं। हम केवल अपने अधिकारों और आज़ादी के लिए उठ खड़ी हुई हैं। हमने मुद्दे का राजनैतिककरण नहीं कया है। यदि उन्होंने हमारी बात पहले ही सुन ली होती तो इतना हंगामा होता ही नहीं। इस मामले को असली मुद्दों से भटकाने के लिए जानबूझ कर इसे राजनैतिक रंग दिया जा रहा है।