सीआईएसएफ विद्रोह: बोकारो

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कहा जाता है कि बल के भीतर विद्रोह की घटना का शुरुआती बिंदु वह था जब रांची में कथिततौर पर एक कमांडेंट की प्रताड़ना से एक जवान की मौत हो गई थी. इसके बाद बोकारो में सीआईएसएफ कर्मियों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. देशभर से बल के कुछ चुने हुए प्रतिनिधि दिल्ली में अपनी मांगों को लेकर दिल्ली भी गए. लेकिन यहां उन्हें विरोध प्रदर्शन करने पर हिरासत में ले लिया गया. इन दोनों घटनाओं ने बोकारो के जवानों को पूरी तरह आंदोलित कर दिया.

जून के महीने में इन जवानों ने अपने वरिष्ठों के आदेश मानने से पूरी तरह इनकार कर दिया. आखिरकार इनको नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार को सेना भेजनी पड़ी. 25, जून को जब सेना यहां पहुंची उसके पहले ही सीआईएसफ के विद्राेही जवान अपने आवासीय परिसरों के आसपास सशस्त्र संघर्ष की तैयारी कर चुके थे. उन्होंने सेना से मुठभेड़ के लिए रेत की बोरियां जमा करके बैरकें बना ली थीं. सेना जब इस क्षेत्र में आगे बढ़ी तो इन जवानों ने फायरिंग कर दी. दोनों पक्षों में मुठभेड़ शुरू हो गई और तीन घंटों की मुठभेड़ के बाद आखिरकार विद्रोही जवानों ने आत्मसमर्पण कर दिया. लेकिन इस पूरी घटना का सबसे दुखद पक्ष यह रहा कि सेना की कार्रवाई में दर्जनों जवानों की मौत हो गई. सेना को अपने तीन जवान खोने पड़े तो सीआईएसएफ के तकरीबन 60 जवान मारे गए. इस घटना के बाद स्टील प्लांट से सीआईएसएफ हटा ली गई. इस यूनिट के तकरीबन 500  जवानों को बर्खास्त कर दिया गया और उनपर मुकदमा चलाया गया.

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