सातवें आसमान पर

 ओलंपिक की किसी स्पर्धा के फाइनल तक पहुचने वाली प्रथम भारतीय महिला पीटी उषा हैं। वह सेकेंड के 100वें हिस्से के अन्तर से पदक से चूक गयी थीं। इस बार ओलंपिक की व्यक्तिगत स्पर्धा में भारत को 13 साल बाद दूसरा स्वर्ण पदक मिला। बीजिंग ओलंपिक 2008 में पहली बार शूटर अभिनव बिंद्रा ने स्वर्ण पदक जीता था।

 

भारत के पदक विजेता

 

नीरज चोपड़ा (स्वर्ण पदक)

ओलंपिक खेलों में पहली बार हिस्सा ले रहे नीरज चोपड़ा ने भारत के लिए गौरव के सबसे बेहतरीन क्षण दिये। भारतीय टीम ने 13 साल बाद ओलंपिक में स्वर्ण पदक का सूखा ख़त्म किया और ट्रैक ऐंड फील्ड में तो यह भारत का पहला स्वर्ण पदक रहा। टोक्यो में नीरज चोपड़ा ने भारत को यह स्वर्ण पदक दिलाया। उन्होंने 87.58 मीटर भाला फेंक (जैबलिन थ्रो) के साथ भारत की झोली में यह स्वर्ण पदक डाला।

नीरज ने 2021 में ही इंडियन ग्रॉ प्री-3 में 88.07 मीटर भाला फेंक के साथ अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था। जून में पुर्तगाल के लिस्बन में हुए मीटिंग सिडडे डी लिस्बोआ टूर्नामेंट में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। नीरज का लक्ष्य 90 मीटर भाला फेंक करने का है। उनसे पहले सन् 2008 के बीजिंग ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल के व्यक्तिगत स्पर्धा में अभिनव बिंद्रा एकमात्र स्वर्ण पदक विजेता रहे।

 

मीराबाई चानू (रजत पदक)

टोक्यो ओलंपिक में भारत के पदकों का खाता पहले ही दिन मीराबाई चानू ने रजत पदक के साथ खोला था। चानू ने भारोत्तोलन के 49 किलोवर्ग में कुल 202 किलो (87 किलो + 115 किलो) भार उठाकर भारत के लिए इस प्रतिस्पर्धा में 21 साल बाद ओलंपिक पदक हासिल किया। सिडनी ओलंपिक 2000 के 69 किलो भारोत्तोलन में कर्णम मल्लेश्वरी ने भारत के लिए कांस्य पदक जीता था।

 

पीवी सिंधु (कांस्य पदक)

पिछले ओलंपिक में रजत पदक जीत चुकीं महिला बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने टोक्यो में भारत को दूसरा पदक दिलाया। सिंधु ने रियो ओलंपिक में रजत पदक जीता था। टोक्यो में कांस्य पदक जीतकर वे (पहली महिला) दूसरी ऐसी खिलाड़ी बन गयीं, जिन्होंने व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा में दो ओलंपिक पदक हासिल किये हैं। सुशील कुमार ने कुश्ती में बीजिंग ओलंपिक 2008 में कांस्य और लंदन ओलंपिक 2012 में रजत पदक हासिल किये थे।

लवलीना बोरगोहाईं (कांस्य पदक)

मुक्केबाज़ लवलीना बोरगोहाईं ने टोक्यो ओलंपिक में यादगार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। लवलीना 69 किलो वेल्टरवेट कैटिगरी के सेमीफाइनल में तुर्की की वल्र्ड नंबर-1 बॉक्सर बुसेनाज सुरमेनेली से हार गयी थीं। उन्हें कांस्य पदक मिला। भारत को नौ साल के बाद ओलंपिक बॉक्सिंग में पदक हासिल हुआ है। असम के गोलाघाट ज़िले की लवलीना बॉक्सिंग में ओलंपिक पदक हासिल करने वाली तीसरी भारतीय खिलाड़ी हैं। उनसे पहले विजेंदर सिंह ने सन् 2008 बीजिंग ओलंपिक और मेरी कॉम ने सन् 2012 लंदन ओलंपिक में भारत के लिए बॉक्सिंग में कांस्य पदक हासिल किये थे।

 

 

रवि दहिया (रजत पदक)

भारत को टोक्यो ओलंपिक में दूसरा रजत पदक रवि दहिया ने दिलाया। रवि 57 किलोवर्ग फ्री स्टाइल कुश्ती के फाइनल में दूसरी वरीयता प्राप्त रूसी ओलंपिक समिति के पहलवान जावुर युगुऐव से 4-7 से मात खा गये थे और उन्हें रजत से सन्तोष करना पड़ा था। रवि दहिया ओलंपिक में रजत पदक हासिल करने वाले दूसरे पहलवान हैं। उनसे पहले सुशील कुमार ने सन् 2012 के लंदन ओलंपिक में यह कामयाबी हासिल की थी।

बजरंग पूनिया (कांस्य पदक)

बजरंग पूनिया का यह पहला ओलंपिक था और वे 65 किलोवर्ग फ्री स्टाइल कुश्ती के सेमीफाइनल में हार गये। लेकिन कांस्य पदक के मु$काबले में उन्होंने कज़ाख़िस्तान के दौलेत नियाज़बेक़ोव को कोई मौक़ा नहीं दिया और 8-0 से हराकर पदक हासिल किया। यह टोक्यो ओलंपिक के समाप्त होने से ठीक एक दिन पहले भारत का छठा पदक था।

पुरुष हॉकी टीम

किसी समय हॉकी का पॉवर हाउस कहलाये जाने वाले भारत ने आठ बार ओलंपिक में स्वर्ण जीता है। इस बार चैंपियन भारतीय हॉकी टीम के लिए टोक्यो ओलंपिक बड़ी सफलता लेकर आया; वह भी 41 साल के लम्बे सूखे के बाद। भारतीय टीम लम्बे अरसे के बाद ओलंपिक हॉकी के सेमीफाइनल में पहुँची और वल्र्ड नंबर-1 और टोक्यो में चैंपियन बनी बेल्जियम को कड़ी टक्कर देने के बाद हारी। लेकिन जब मुक़ाबला कांस्य पदक के लिए हुआ, तो भारतीय टीम ने अपनी रफ़्तार से जर्मनी जैसी मज़बूत टीम को मात दे दी। अब ओलंपिक हॉकी में भारत के आठ स्वर्ण, एक रजत और तीन कांस्य पदकों समेत 12 पदक हो गये हैं। यह टोक्यो में भारत का पाँचवाँ पदक रहा।

पदक से चूके, लेकिन प्रतिभा ग़ज़ब

इस ओलंपिक में हमारे कई खिलाड़ी पदक के बहुत पास पहुँचकर भी चूक गये। बहुत सम्भावना थी कि वे पदक अपने नाम कर लेंगे; लेकिन ऐन मौक़े पर वे इससे वंचित रह गये। टीम और व्यक्तिगत स्पर्धा दोनों में। आइए, जानते हैं उन खेलों और खिलाडिय़ों को, जो पदक के बहुत क़रीब पहुँच गये थे :-

महिला हॉकी टीम

अभी तक निचले पायदान पर माने जाने वाली महिला हॉकी टीम ने ऐसा खेल दिखाया कि ख़ुद भारतीय महिला हॉकी के कर्ताधर्ता अवाक् रह गये। टीम ने ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को पानी पिला दिया और सेमीफाइनल तक जा पहुँची। इस टीम की खिलाडिय़ों का प्रदर्शन कमाल का रहा। और भी हैरानी भरी बात यह थी कि यह टीम महज़ अपना तीसरा ओलंपिक खेल रही थी। भारतीय महिला हॉकी टीम कांस्य पदक से भले चूक गयी, लेकिन उसने बता दिया कि आने वाले समय में महिला हॉकी में दुनिया की कोई भी टीम उसे हलक़े में नहीं लेगी। कांस्य पदक मैच में भी वह अपने से कहीं अनुभवी ग्रेट ब्रिटेन की टीम से महज़ एक गोल के अन्तर से 3-4 से हारी। पहले क्वार्टर में कमज़ोर प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम ने दूसरे क्वार्टर में शानदार खेल दिखाया और एक मौक़े पर ब्रिटेन की खिलाडिय़ों को हक्का-बक्का कर दिया। चार मिनट में तीन गोल करके भारत ने ब्रिटेन पर जो दबाव बनाया, उसे अगर बरक़रार रख पायी होती, तो कांस्य पदक ब्रिटेन की नहीं, भारत की झोली में होता। पूरे टूर्नामेंट में भारत ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। वह पूल-ए में थी और उसने मैच भी सिर्फ़ दो ही जीते थे, जिसके बूते वह क्वार्टर फाइनल में पहुँची थी। लेकिन क्वार्टर फाइनल में भारतीय टीम पूरी तरह बदली हुई दिखी। ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से रौंदकर वह सेमीफाइनल में पहुँची। सेमीफाइनल में भारत को अर्जेंटीना ने 2-1 से हरा दिया, जिसके बाद भारत को कांस्य पदक का मैच ब्रिटेन से खेलना पड़ा। टीम ने कमाल का खेल खेला।

हालाँकि अनुभव की कमी से रक्षा पंक्ति भी कुछ मौक़ों पर छिन्न-भिन्न हुई और दाएँ छोर का आक्रमण भी कमज़ोर रहा। इन ग़लतियों ने भले कांस्य पदक भारत की झोली में आने से रोक दिया; लेकिन भविष्य की बड़ी उम्मीद ज़रूर जगा दी। वंदना कटारिया ने टूर्नामेंट में चार गोल दाग़े। यही नहीं, ओलंपिक्स में हैट्रिक मारने वाली वंदना पहली भारतीय बनीं। गोलकीपर सविता पूनिया की कलाई का जादू देखने को मिला, तो ड्रैग फ्लिकर गुरजीत कौर की पेनेल्टी कार्नर को गोल में बदलने की प्रतिभा और मेहनत से निखर सकती है।

अदिति अशोक : हॉकी के बाद बात व्यक्तिगत स्पर्धा की। इसमें 23 वर्षीय गोल्फर अदिति अशोक आख़िरी वक़्त तक पदक की दावेदार बनी रही। दुनिया में गोल्फ में भले अदिति की रैंकिंग 200वीं हो, टोक्यो ओलंपिक में अदिति का नाम हर किसी की ज़ुबान पर था। अदिति ने चार दिन तक ज़्यादातर समय ख़ुद तो दूसरे नंबर पर बनाये रखा। लेकिन चौथे दिन उनका प्रदर्शन थोड़ा ख़राब हुआ, जब जापान और न्यूजीलैंड की गोल्फर्स ने कमाल का प्रदर्शन कर अदिति को चौथे नंबर पर धकेल दिया। अदिति इसके बाद ओवरऑल चौथे नंबर पर रहीं और बेहद क़रीबी अन्तर से पदक गँवा बैठीं।

याद रहे पिछले ओलंपिक में जो रियो में हुआ था, में अदिति 41वें नंबर पर रही थीं। अब टोक्यो में अदिति के प्रदर्शन ने अगली बार के लिए बड़ी उम्मीद जगा दी है। भारत, जहाँ गोल्फ उतना ज़्यादा लोकप्रिय खेल नहीं है, वहाँ अपने प्रदर्शन से खेल को घर-घर में परिचित करवा दिया है। अभी उम्र अदिति के हक़ में है और बहुत ज़्यादा उम्मीद है कि आने वाले समय में वह और ऊपर के पायदान पर पहुँचेगी।

अतनु दास : आर्चरी में अतनु दास (29) ने सिंगल्स इवेंट में कमाल का प्रदर्शन किया। अतनु भारत की उम्दा आर्चर दीपिका कुमारी के पति हैं, जो ख़ुद पदक की मज़बूत दावेदार थीं। तीसरा ओलंपिक्स खेल रहीं दीपिका उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं; लेकिन उनके पति अतनु दास ने लगातार अपने पहले दो मैचों में दुनिया के टॉप आर्चर्स को हराकर सनसनी मचा दी। दास ने पहले ओलंपिक्स टीम इवेंट के सिल्वर मेडलिस्ट चाइनीज ताइपे के डे यु चेंग को हराया। अतनु 6-5 से विजयी हुए। अगले मैच में ओलंपिक्स चैंपियन कोरिया के ओह जिन हाएक को हराकर उन्होंने अपने लिए पदक की मज़बूत सम्भावना जगा दी। अतनु ने कोरियन आर्चर के ख़िलाफ़ शूट ऑफ में गये मैच को 6-5 से अपने नाम किया। याद रहे ओह जिन 2012 के लंदन गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट और टोक्यो गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट कोरियन टीम का हिस्सा थे। लेकिन राउंड ऑफ-16 में दास को जापानी आर्चर से हार झेलनी पड़ी। फुरुकावा ने अतनु को 6-4 से हराया, जो बाद में कांस्य पदक जीते।

अविनाश सबले : स्टीपलचेज (बाधा दौड़) की 3,000 मीटर रेस में भारत की ओर से अविनाश सबले ने दूसरी हीट में 8.18.12 का समय निकाला, जो नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बना। उन्होंने इसके लिए अपना ही पिछले रिकॉर्ड तोड़ा। लेकिन सबले फाइनल तक नहीं पहुँच पाये। कुल मिलाकर 13वें सबसे तेज़ धावक इस ओलंपिक में बने। सबले ने हाल के महीनों में लगातार अपना प्रदर्शन बेहतर किया है। यदि कोशिश करें तो सबले सम्भावना जगा सकते हैं।

रिले टीम

एथलेटिक्स में भारत के पुरुषों की 4 & 400 मीटर रिले टीम फाइनल में तो नहीं पहुँची लेकिन अमोल जैकब, नागनाथन पंडी, निर्मल नोआह टॉम और मुहम्मद अनस की टीम ने टोक्यो में अपने प्रदर्शन से एशियाई रिकॉर्ड तोड़ डाला। टीम ने 3.00.24 मिनट का समय लिया और दूसरी हीट में चौथे नंबर पर रहे। इवेंट की दोनों हीट मिलाकर कुल आठ टीमों को फाइनल में जाना था, जबकि भारतीय टीम ओवरऑल नौवें नंबर पर रही। हालाँकि उनका प्रदर्शन ज़ाहिर करता है कि मेहनत से टीम टॉप की पंक्ति में पहुँच सकती है।