सर्दी की दस्तक के साथ दिखने लगा कुहासा

वहीं दिल्ली के कई बड़े पुल है जो रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों के पास उनके नीचे भी लोग अलाव जलाकर सर्दी से बचने का पूरा इंतजाम करते है।

तहलका संवाददाता को पुल के नीचे रात गुजारने वाले लोगों ने बताया कि सर्दी हो गरमी वे पुल के नीचे ही रहते है और दिहाड़ी, रिक्शा चलाकर अपना दैनिक जीवन –यापन करते है। उन्होंने सरकार से अपील की है। जो दिहाड़ी मजदूर है। जिनके रहने के लिये कोई घर नहीं है वे किराये पर घर नहीं ले सकते है। तो उनके लिये पुलों के नीचें या आस-पास अलाव या रैन बसेरा बनाये जाये ताकि सर्दी के सितम से बच सकें।