सज़ा का खौफ नहीं बैंकों में लूट जारी

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सीबीआई की पड़ताल

मुंबई की सीबीआई अदालत में इस मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों को पुलिस की हिरासत में भेज दिया। इनमें पंजाब नेशनल बैंक के उपप्रबंधक गोकुलनाथ शेट्टी, सिंगिल विंडों ऑपरेटर मनोज खराट और नीरव मोदी समूह की ओर से दस्तखत करने वाले अधिकारी।

इन तीनों के अलावा सीबीआई ने इस धोखधड़ी में शामिल रहने के आरोप में दस निदेशकों और अधिकारियों को पूछताछ के दायरे में रखा है। एन्फार्समेंट डायरेक्टोरेट, ने नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और 39 स्थानों पर पंजाब नेशनल बैंक के ठिकानों पर भी अचल संपत्तियों की पड़ताल की।

यह सारा घोटाला हुआ कैसे

इस सारे घोटाले में स्विफ्ट (एसडब्लू आईएफटी) यानी बैंकों में एक दूसरे से संपर्क रखने की प्रणाली और अधूरी लेजर एंट्रीज और जांच और समुचित व्यवस्था और बैंक की अपनी बनाए हुए बैंकिंग कायदे-कानूनों की जानबूझ कर की गई अनदेखी। पंजाब नेशनल बैंक के सीईओ सुनील मेहता ने कहा, हां, समस्या तो है। हमने इसकी पड़ताल कर ली है। हम इससे निपटने में जुटे हैं। हम तमाम कमियों को देखेंगे और उन्हें दुरूस्त करेंगे। यह जोखिम तो जनता से जुड़ा हुआ है। हम इसे देख रहे हैं।

सीबीआई के अदालती दस्तावेजों के अनुसार एक बड़ी संख्या में जाली लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) जारी किए गए। यह एक तरह की गारंटी है दूसरे बैंकों को किसी उपभोक्ता को कजऱ् देने के लिए। यह बैंकों की विदेश स्थित शाखाओं को दिए गए। इस मामले में खासतौर पर ये जेवरात की कंपनियों के एक समूह को दिए गए। चूंकि ये गारंटी पत्र भारतीय बैंकों की विदेश स्थित शाखाओं को भेजे गए थे। यह माना गया कि सभी भारतीय हैं और बैंको ने तमाम जेवरात कंपनियों को धन दे दिया।

शेट्टी ने बैंक की स्विफ्ट प्रणाली के ज़रिए उन पासवर्ड का इस्तेमाल किया जिनसे वह कागज बना सका। ऐसे भी उदाहरण हैं कि एक या उससे ज़्यादा भी जूनियर सहयोगी रहे हों जिन्होंने संदेश भेजे और व्यक्ति विशेष ने सहमति देने के लिहाज से सारे खतूत को जांचा। बैंक एकज्क्यूटिवस से छानबीन और अदालती दस्तावेजों और साक्षात्कारों से यह बात सामने आई।

मुंबई की अदालत में जमा सीबीआई के एक दस्तावेज के अनुसार ‘इस मामले में बैंक के एक या ज़्यादा कर्मचारियों,अधिकारियों के शामिल होने का अंदेशा संभव है। स्विफ्ट पर लेनदेन शुरू करते ही शेट्टी जो उस बैंक की उस शाखा में 2010 से 2017 तक काम करता रहा ने रेगुलर रोटेशन की आम बैंकिंग व्यवस्था को भी बैंक की इंटरनल प्रणाली पर रिकार्ड नहीं किया। क्योंकि पंजाब नेशनल बैंक की आंतरिक साफ्टवेयर प्रणाली स्विफ्ट से आटोमेटिक तौर पर नहीं जुड़ी थी। कर्मचारी खुद स्विफ्ट प्रणाली से जुड़ कर काम करते थे। यह न होने के ही कारण लेन देन बैंक के खाते में दिखाई नहीं देता था। सीबीआई के एक अधिकारी के अनुसार सात साल की अवधि में ऐेसे घोटाले के 150 मामले सामने आए।

आखिर वित्तमंत्री ने तोड़ा मौन

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने पंजाब नेशनल बैंक घोटाले पर अपना मौन तोड़ा। उन्होंने इसके लिए ऑडिटर और पंजाब नेशनल बैंक के प्रबंधन की नाकामियों को जि़म्मेदार ठहराया। जिसके चलते समय रहते कदम नहीं उठाए गए जिनके चलते रुपए 11,400 करोड़ मात्र का गोलमाल पकड़ में नहीं आ सका।

‘अनियमितताओं पर लगाम लगाने के लिए नज़र रखले वाली एजेंसियों को ध्यान देना चाहिए। उन्हें यह निश्चय करना होगा कि ऐसी गड़बडिय़ां

शुरूआत में ही दबा दी जाएं। वित्तमंत्री एशिया और प्रशांत सागर के एसोसिएश्सन ऑफ डेवलपमेंट फाइनेंशियल इंस्टीटयूशनल की 41वीं बैठक में अपनी बात रख रहे थे। जांच एजेंसियां अब पंजाब नेशनल बैंक के कर्मचारियों से पूछताछ कर रही हैं। यह पता लगाने के लिए कि आरोपियों से उनका कितना संपर्क रहा है।

‘आडिटर्स भी इस घोटाले को नहीं पकड़ पाए उस पर वित्तमंत्री ने कहा, आखिर ऑडिटर्स क्या कर रहे थे? भीतरी और बाहरी ऑडिटर तक इसे नहीं पकड़ सके। ऐसे में ज़रूरी है कि यह जाना जाए कि ऐसी धोखाधड़ी का खर्च प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर होता है। कर देने वालों के लिए यह प्रत्यक्ष है जबकि अप्रत्यक्ष तौर पर लागत देना बैंकों की क्षमता पर है।

आरबीआई की बैंक धोखाधड़ी रोकने पर समिति

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने (आरबीआई) ने एक समिति बनाने की घोषणा की है। आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड ऑफ डारेक्टर्स के पूर्व सदस्य वाईएच मालेगम की अध्यक्षता में यह समिति गाठित हुई है। यह समिति बैंकों में धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों का अध्ययन करेगी और एक योजना तैयार करेगी जिससे इन्हें रोका जा सके।

आरबीआई ने दावा किया है कि पहले ही इसने बैंकों को चेतावनी दी थी। यह चेतावनी अगस्त 2016 से ‘स्विफ्टÓ प्रणाली के बेजा इस्तेमाल पर तीन बाद चेताया था। बैंकों ने अपनी व्यावसायिक ज़रूरतों के लिहाज से ‘स्विफ्टÓ का विकास किया लेकिन उसके इस्तेमाल के साथ जोखिम भी है इसी कारण बैंकों को संभावित बेजा इस्तेमाल से बचने की तीन बार सलाह दी। उन्हें सलाह दी कि आरबीआई के दिशा निर्देशों के तहत उसे दुरुस्त किया जाए। जिस पर ध्यान नहीं दिया गया।