शांता ‘युग’ समाप्त, सुख राम अभी भी ‘मैदान’ में

भाजपा ने प्रदेश की चार सीटों पर उमीदवारों की घोषणा की तो साफ़ हो गया कि दिग्गज शांता कुमार के चुनावी सफर अब थम गया है। शांता कुमार के चुनावी परिदृश्य से बाहर होने की ख़बरों के ही बीच सुख राम पोते के साथ भाजपा छोडक़र कांग्रेस में शामिल हो गए और अपने पोते आश्रय के लिए मंडी से टिकट का इंतजाम करने में भी सफल रहे हैं। इस बार का चुनाव भाजपा के लिए बड़ी चुनौती इसलिए भी रहेगा क्योंकि ज़मीन पर 2014 जैसी मोदी नाम की कोई लहर नहीं है। एक विश्लेषण। राकेश रॉकी

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इस बार का लोक सभा चुनाव पहाड़ की राजनीति में दिलचस्प मोड़ लेकर आया है। भाजपा ने दिग्गज शांता कुमार का टिकट काटकर उनकी चुनावी राजनीति पर ‘फुल स्टाप’ लगा दिया तो उनसे भी बड़े सुख राम ने ऐसी पलटी मार ी की राजनीति के बड़े-से-बड़े जानकार हैरान रह गए। सुख राम खुद तो चुनाव राजनीति में नहीं हैं लेकिन उनकी चालें सक्रिय राजनेताओं से भी ज्य़ादा चतुराई भरी दिखती है।

भाजपा ने इस बार पिछले लोक सभा चुनाव में जीते चार में से दो सांसदों के टिकट काट दिए। इनमें एक तो शांता कुमार ही हैं और दूसरे शिमला आरक्षित सीट से जीते वीरेंदर कश्यप हैं जहाँ पार्टी ने दो बार के विधायक सुरेश कश्यप को टिकट दिया है। कांगड़ा में भले शांता कुमार चुनाव परिदृश्य से बाहर को गए, पर टिकट पार्टी ने उनके समर्थक और जयराम सरकार में मंत्री किशन कपूर को दिया है जो गद्दी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।

पिछली बार मोदी लहर में भाजपा प्रदेश की चारों सीटें जीत गयी थी। इस बार उसकी राह उतनी आसान नहीं दिखती। वजह यह कि ज़मीन पर 2014 जैसे मोदी नाम की कोई लहर इस बार नहीं दिखती। भाजपा की प्रदेश में भी सरकार है इस लिहाजा मुयमंत्री जय राम के सामने सभी चार सीटों पर फिर पार्टी को जीत दिलाना बड़ी चुनौती रहेगी।

हमीरपुर से भाजपा ने लगातार चौथी बार अपने युवा चेहरे अनुराग ठाकुर पर भरोसा जताया है जबकि मंडी से राम स्वरुप शर्मा पर जो पिछली बार पहली लोक सभा की दहलीज लांघे थे। इस तरह भाजपा ने दो नए चेहरे मैदान में उतारे हैं जो अभी तक विधानसभा चुनाव जीतने तक सीमित थे।

सुख राम के कांग्रेस में जाने से मंडी में स्थितियां बदलेंगी। भाजपा प्रत्याशी राम स्वरुप भी ब्राह्मण हैं और सुख राम भी। किसी वक्त प्रदेश के मुयमंत्री पद के दावेदार रहे सुख राम पूर्व मुयमंत्री वीरभद्र सिंह के कट्टर विरोधी माने जाते हैं।  यह अलग बात है कि प्रदेश की राजनीति ने दोनों को फिर एक साथ-साथ खड़ा कर दिया है। दल दोनों का भले एक हो गया, दिल मिलने की संभावना कम ही है।

2014 के चुनाव में भाजपा के सभी उमीदवार मोदी लहर के चलते बड़े अंतर से जीते थे। वैसी स्थिति इस बार नहीं दिखती। जिस मंडी जिले में सुख राम के भाजपा ज्वाइन करने के बाद भाजपा सभी 10 सीटें जीत गई थी उस जिले में अब सुख राम कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। दिलचस्प यह है कि उनके पुत्र अनिल शर्मा अभी भी भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

सुख राम ने दिल्ली में कांग्रेस में शामिल होने से पहले अपने पोते आश्रय के लिए टिकट की गुहार लगाई थी। उनकी कामना पूरी हो गयी है। आश्रय को कांग्रेस टिकट मिलने से मंत्री पिता अनिल शर्मा के लिए मुश्किल पैदा हुई है। वे भाजपा प्रत्याशी के लिए अपने बेटे के खिलाफ प्रचार करेंगे ऐसी संभावना कम ही है। मुयमंत्री साफ़ कर चुके हैं कि अनिल शर्मा को भाजपा प्रत्याशी के लिए प्रचार करना ही होगा।

ऐसे में अनिल शर्मा को या तो पिता-पुत्र संबंध के लिए मंत्री पद त्यागना होगा या कुर्सी का मोह रखते हुए पुत्र के खिलाफ मैदान में उतरना होगा। शायद ही अनिल शर्मा ऐसी हिमत दिखा पाएं। बहुत ज्यादा संभावना है कि अनिल शर्मा भाजपा और मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे।

सुख राम किस मकसद से कांग्रेस में आएं हैं, यह इस बात से जाहिर हो जाता है कि वे अपने पोते आश्रय को मंडी से कांग्रेस टिकट दिलाने में सफल  रहे हैं। मंडी मुयमंत्री जय राम ठाकुर का गृह जिला है लिहाजा सुख राम ने कांग्रेस ज्वाइन करके निश्चित ही भाजपा की चुनौती बढ़ा दी है। यदि वीरभद्र सिंह खुलकर आश्रय के हक़ में प्रचार करते हैं तो निश्चित ही इससे भाजपा का सरदर्द बढ़ेगा। कांग्रेस ने युवा आश्रय को टिकट देकर निश्चित ही बड़ा दांव खेल दिया है।

मंडी मुयमंत्री के लिए इसलिए भी ज़रूरी और इज्जत वाली सीट हैं, क्योंकि वे खुद मंडी जिले से हैं। पिछले करीब सवा महीने के राजकाल में वे अपने जिले के लिए बड़े प्रोजेक्ट लाए हैं। विपक्ष तो उन पर आरोप लगा रहा है कि वे गृह जिले के मोह में बाकी जिलों के हितों की बलि दे रहे हैं।

खुद मुयमंत्री जयराम ठाकुर इससे इंकार करते हैं। ‘तहलका’ से बातचीत में जयराम ने कहा – ‘यह सब मनघडंत बातें हैं। मंडी से हमें सभी 10 सीटें मिली हैं तो हमारा फज़ऱ् बनता है कि पिछले सालों में इस जिले की जो उपेक्षा हुई है उस पर लोगों की उमीदों और भावनाओं का याल रखें। लेकिन ऐसा दूसरे क्षेत्रों की कीमत पर किया जा रहा है ऐसा कहना तो एक मजाक ही होगा। हमारी सरकार सभी क्षेत्रों का सामान रूप से विकास कर रही है। जनता को सब कुछ मालूम है और हम अपनी सरकार के काम के बूते फिर चारों सीटें जीतने जा रहे हैं।’

लेकिन हिमाचल में नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के गले मुयमंत्री की यह सफाई नहीं उतरती। उनका कहना है – ‘मुयमंत्री जिस समान विकास की बात कर रहे हैं वह ज़मीन पर तो नहीं दिखता। भाजपा ने तो जो बड़े अपने चुनाव घोषणा पत्र में किये थे उन पर ही अभी काम शुरू नहीं किया। विकास तो दूर की बात है। यह सरकार पूरी तरह फेल हुई है और कांग्रेस इस बार चारों सीटों पर जीत का झंडा गाड़ेगी।’

इस बार विधानसभा के शीतकालीन सत्र में प्रदेश में बेरोजगारी के चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। करीब 8. 5 लाख पहुँच चुका है प्रदेश में बेरोजगारी का आंकड़ा। दरअसल बेरोजगारी पूरे देश में सबसे बड़ा मुद्दा है। हिमाचल भी इससे अछूता नहीं जहाँ निजी क्षेत्र तो नाम मात्र का ही है। ऐसे में युवाओं की निगाह सरकारी नौकरियों पर ही है। पिछले सालों में प्रेम कुमार धूमल, वीरभद्र सिंह से लेकर वर्तमान मुयमंत्री तक केंद्र से प्रदेश के सेना के कोटे में बढ़ोतरी की मांग करते रहे हैं। हिमाचल के जवान को ही देश का पहला परमवीर चक्र मिलने का सौभाग्य हासिल है और यह भी सच है प्रदेश के लाखों जवान देश की सीमाओं की हिफाजत में डटे हैं। ऐसे में प्रदेश की यह मांग जायज़ भी दिखती है।

इस बार चुनाव में जयराम अपनी सरकार के कामों और मोदी के ‘करिश्मे’ पर निर्भर रहेंगे। भले 2014 जैसा माहौल इस बार नहीं है। हमीरपुर में अनुराग ठाकुर मज़बूत दिखते हैं। उनका अपना ें अच्छा जनाधार है और युवा उन्हें विकास तुर्क के रूप में देखते हैं। रेल लाइन और क्रिकेट के क्षेत्र में अनुराग के काम युवाओं की जुबान पर दिखते हैं। बिलासपुर में मुकेश चंदेल ने तहलका से बातचीत में कहा – ‘अनुराग ठाकुर ने सांसद के रूप में अच्छा काम किया है। हिमाचल को क्रिकेट का तो उन्होंने हब बना दिया ।’

कांग्रेस हमीरपुर हलके में भाजपा के अध्यक्ष रहे सुरेश चंदेल को अपने पाले में करने की कोशिश में है। चंदेल बिलासपुर  हैं और कांग्रेस का टिकट चाहते हैं। दरअसल कांग्रेस के लोग नहीं चाहते कि चंदेल को कांग्रेस में शामिल किया जाये। उनको टिकट  का विरोध तो कांग्रेस के बीच है ही। चंदेल को टिकट मिलने से सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा भी बिदक सकते हैं जो अपने बेटे को टिकट के लिए ज़मीन-आसमान एक किए हुए हैं। राणा पहले भाजपा में ही थे और उन्हें धूमल का बहुत करीबी माना जाता था ।

अनुराग की सबसे बड़ी ताकत उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल हैं जिनका पूरह्य प्रदेश में मज़बूत जनाधार  है। वे विधानसभा का चुनाव 2017 में हारने के बाद भी भाजपा में बहुत सक्रिय हैं। उनकी आज भी पूरे क्षत्र में गहरी पैठ है।

उधर कांगड़ा में किशन कपूर को पूरी तरह शांता कुमार पर निर्भर रहना होगा क्योंकि किशन की अपनी ज़मीन अपने विधानसभा हलके धर्मशाला से बाहर बिलकुल नहीं है।

शिमला में कांग्रेस की तरफ से पूर्व मंत्री और सांसद और वर्तमान में विधायक धनी राम शांडिल को टिकट की चर्चा है। वहां भाजपा ने दो बार के  विधायक  सुरेश कश्यप को मैदान में उतारा है। लिहाजा मुकाबला बहुत दिलचस्प होगा। धनी राम की हलके में अच्छी पैठ मानी जाती है। यहाँ सुधीर कुमार, जीएस बाली, आशा कुमारी कांग्रेस टिकट के दावेदार हैं।

हिमाचल में मतदान 19 मई को होना है यानी अंतिम चरण में। लिहाजा सभी दलों के पास प्रचार के लिए बहुत वक्त है। लोगों की भी चुनाव पर नजर है। शिमला के लोअर जाखू में मिठाई की दुकान करने वाले विकास लखनपाल ने कहा – ‘इस बार मोदी का करिश्मा ख़त्म हो चुका है। अच्छे दिन आये नहीं और बेरोजगारी और विकराल रूप से सामने खड़ी है। मुझे लगता है लोगों में मोदी के प्रति नाराजगी है क्योंकि वो बातें ही करते रहे हकीकत में काम नहीं हुआ है।’ हालांकि, हमीरपुर के नादौन में सेना से रिटायर सूबेदार सुरेश सिंह ने कहा – ‘आतंकवाद के खिलाफ जो मादा मोदी साहब ने दिखाया है वो हम सैनिकों का सीना गर्व से भर देता है। मोदी इस देश की ज़रुरत हैं।’ कुछ ऐसी ही बात पटलांदर (सुजानपुर) में युवा राम सिंह ठाकुर ने कही – ‘अभी तो मोदी साहब का कोईं विकल्प नहीं दिखता।’ लेकिन रिवालसर की सविता ने कहा – ‘महंगाई बहुत है। हमारा बेटा  बेरोजगार है। उसे नौकरी नहीं मिली, पांच साल हो गए। मोदी जी की बातें ही रहीं कुछ हुआ नहीं।’